Home Opinions छूट के चलते खरीदीं बीएस थ्री बाइक, अब हो रही है ये दिक्कत
Opinions - May 1, 2017

छूट के चलते खरीदीं बीएस थ्री बाइक, अब हो रही है ये दिक्कत

छूट के लालच में 31 मार्च को खरीदी गई बीएस थ्री मॉडल की दो पहिया गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में पेंच फंस गया है। यूपी के लखनऊ में ऐसी बिना रजिस्ट्रेशन सैकड़ों गाड़ियां दौड़ रही है। इन गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन न होने की वजह यह है कि गाड़ी खरीदने के बाद गाड़ी का इंश्योरेंस डिजिटल के बजाए मैनुअल कराया गया था। इससे यह साबित नहीं हो रहा है कि गाड़ी 31 मार्च को ही खरीदी गई है या 31 मार्च के बाद अप्रैल में खरीदी गई है।

छूट पर खरीदी गई बीएस थ्री गाड़ियों के सैकड़ों खरीददार इन दिनों गाड़ी रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे है। वाहन खरीदते समय गाड़ी मालिक यह भूल गए कि उनका टैक्स या फिर इंश्योरेंस का भुगतान ऑनलाइन डिजिटल पेपर पर हुआ है कि मैनुअल। यह भूल अब वाहन स्वामियों पर भारी पड़ रही है।

वजह यह है कि 31 मार्च की रात 12 बजे तक जिन वाहन स्वामियों का कम्प्यूटराइज्ड टैक्स जमा होने पर उसकी कॉपी या फिर इंश्योरेंस की कॉपी है उनका तो रजिस्ट्रेशन अभी तक किया जा सकता है, लेकिन जिनके पास सिर्फ मैनुअल पेपर या फिर कवर कॉपी ही है, उनका रजिस्ट्रेशन फिलहाल आरटीओ कार्यालय में नहीं किया जा रहा है।

ऐसे कई वाहन स्वामियों ने ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ कार्यालय और महानगर स्थित एआरटीओ कार्यालय में अपने वाहन रजिस्टर्ड कराने का आवेदन किया है लेकिन ज्यादातर के पास कम्प्यूटराज्ड पेपर या हार्ड कॉपी नहीं हैं।

लालच के चक्कर में जिन लोगों ने बीएस थ्री गाड़ी खरीद तो ली, लेकिन अब वाहन के रजिस्ट्रेशन पर पशोपेश की स्थिति बनी हुई है।

आरटीओ कार्यालय में अधिकारी वाहन रजिस्टर्ड करने से मना कर रहे हैं तो वाहन स्वामी एतराज जता रहे हैं। रोजाना ऐसे दर्जनों वाहन स्वामी कार्यालय पहुंच रहे हैं जो अधिकारियों पर वाहन रजिस्टर्ड करने को कह रहे हैं। हैरत की बात यह है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अपने अधिनस्थ अधिकारियों पर अपने जानने वालों का रजिस्ट्रेशन करने का भी दबाव बनाने से परहेज नहीं कर रहे हैं

आरटीओ प्रशासन राघवेंद्र सिंह ने कहा कि 31 मार्च व उसके पहले खरीदी गई बीएस थ्री दो पहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन तभी होगा जब गाड़ी का इंश्योरेंश कॉपी कम्प्यूटराइज्ड होगा। यदि आरटीओ व एआरटीओ कार्यालय में ऐसे ज्यादा मामले आते हैं तो वाहन का रजिस्ट्रेशन न करके ऐसे मामलों को मुख्यालय भेजा जाए, मुख्यालय के अधिकारी कोई फैसला लेगें तभी रजिस्ट्रेशन संभव है।

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