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Opinions - April 18, 2017

भा. ज. पा. ने जम्मू कश्मीर में रचा इतिहास

विधान परिषद की दो सीटों के लिए सोमवार को हुए मतदान में भाजपा व पीडीपी के उम्मीदवार को 29-29 वोट मिले। इसके बाद लाटरी निकालकर फैसला हुआ और सीट भाजपा की झोली में आई। दूसरी सीट कांग्रेस ने जीती और सत्ताधारी पीडीपी को हार का सामना करना पड़ा। दो सीटों का फैसला होने के बाद भाजपा ने छह सीटों में से तीन पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। पीडीपी, कांग्रेस व नेशनल कांफ्रेंस को एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा। चार सीटों का फैसला निर्विरोध हो गया था। अब अपने तीन एमएलसी बनाने के साथ ही भाजपा 11 सदस्यों के साथ विधान परिषद में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। पीडीपी के 10 एमएलसी हैं। नए सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होगा। दो सीटों के लिए शाम चार बजे तक चली वोटिंग में कांग्रेस ने अपने 12, नेशनल कांफ्रेंस के 15 व पीडीएफ के हकीम यासीन, माकपा के मुहम्मद यूसुफ तारीगामी, निर्दलीय इंजीनियर रशीद व पवन गुप्ता के वोट लेकर पहली सीट सीधे 31 वोटों से जीत ली। बची एक अन्य सीट के लिए पीडीपी अपने 30 व भाजपा 28 वोट मान रही थी। मतदान के दौरान पीडीपी के कोटे से मंत्री न बनने के बाद नाराज सैयद मुहम्मद बकीर रिजवी ने अपना वोट पीडीपी को देने के बजाए भाजपा को देकर मुकाबला 29-29 से बराबर कर दिया। इसके बाद रिटर्निग अधिकारी मुहम्मद रमजान ने लाटरी से जीत का फैसला करने का निर्णय लिया। इसमें किस्मत ने भाजपा का साथ दिया और पर्ची में विक्रम रंधावा का नाम आया और वह चुनाव जीत गए। लगातार दो साल तक विधान परिषद व राज्यसभा के चुनाव में पीडीपी को वोट देने वाले रिजवी चंद दिन पहले ही पीडीपी से नाराजगी का इजहार करते हुए गठबंधन से अलग हो गए थे।

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