रोहित कभी मरा नहीं करते… रोहित हमेशा ज़िंदा रहते हैं…

संघर्ष के इतिहास के साथ…

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BY- डॉ. जयंत चंद्रपाल ~        

रोहित कभी मरा नहीं करते … रोहित हंमेशा जिन्दा रहते है

संघर्ष के इतिहास के साथ…

अब तू नहीं … बस तेरी यादे है … और संघर्ष से भरा हुआ तेरा इतिहास है |

रोहित,….. जकजोर कर रख दिया है तेरे आखरी शब्दों ने

“आदमी की कीमत तो बस उसकी फौरी पहचानमें सिमटकर रहगयी है | निकटतम सम्भावना ही पहचान तय करती है एक वोट से एक संख्यासे एक चीज से | आदमी को एक दिमाग की तरह तो देखा ही नहीं गया….”

तेरे पत्र की कुछ बातों ने मुझे बहुत रुलाया…

“मैं बचपन के अकेलेपन से कभी उबर नहीं पाया, बचपन में मुझे किसी का प्यार नहीं मिला। इस क्षण मैं आहत नहीं हूँ, मैं दुखी नही हूँ. मैं बस खाली हूँ”

काश तुम्हारे खालीपन को कोई भर पाता, तुम्हें कोई समझ पाता, कोई तुम्हारी भावनाओ को, अंतर्मन को पढ़ पाता ।

तुम संघर्ष से नहीं टूटे, बस तुम्हारी भावनाओं को ,तुम्हारे संघर्ष को, तुम्हारी अंतर्मन को कोई पढने वाला नही मिला…

तुम थे तब भी अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहे थे और….

आज भी मोर्चा ले रहा है तेरा नाम ब्राह्मणी व्यवस्था के खिलाफ;

और

देशव्यापी शक्ल ले रहा है तेरा नाम ब्राह्मणवाद से लेकर फ़ासीवाद तक के ख़िलाफ ।

विचारधारा के युद्ध मे तेरा यह बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा ।

द्रोणाचार्य के ताबूत की आखिरी कील बनेगी तुम्हारी शहादत |

कौन कहता है रोहित मर गया?

रोहित कभी मरा नहीं करते … रोहित हंमेशा जिन्दा रहते है संघर्ष के इतिहास के साथ |

सलाम .. नमन.. वन्दन रोहित

 

(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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