RSS ने शहीद राजगुरु को बताया अपना स्वयंसेवक

0
Want create site? With Free visual composer you can do it easy.

नई दिल्ली. RSS के पूर्व प्रचारक और पत्रकार नरेंद्र सहगल की एक नयी किताब आयी है. इस किताब का नाम ‘भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ है अपनी किताब में दावा किया है कि शहीद राजगुरु आरएसएस से जुड़े हुए थे जिसके एक हिस्से जिसका शीर्षक ‘स्वयंसेवक स्वतंत्रता सेनानी’ में सहगल ने लिखा है कि ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सांडर्स की हत्या के बाद राजगुरु ने नागपुर में संघ मुख्यालय का दौरा किया था. इस किताब की मदद से यह साफ करने की कोशिश की गई है कि देश की आजादी की लड़ाई में भी आरएसएस का योगदान रहा है.

सहगल ने अपनी किताब में दावा किया है कि राजगुरु संघ की मोहित बाड़े शाखा के स्वयंसेवक थे. नागपुर हाईस्कूल ‘भोंसले वेदशाला’ के छात्र रहते हुए राजगुरु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक हेडगेवार से घनिष्ठ परिचय था. किताब में तो यहां तक दावा किया गया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस संघ से काफी प्रभावित थे.

सहगल के अनुसार, राजगुरु ने इस दौरान तत्कालीन आरएसएस चीफ और आरएसएस के फाउंडर केबी हेडगेवार से मुलाकात भी की थी. किताब के अनुसार, हेडगेवार ने ही राजगुरु को छिपने में मदद की थी और उन्हें सलाह दी थी कि वह अपने पुणे स्थित घर ना जाएं क्योंकि पुलिस हर जगह उनकी तलाश कर रही है. नरेंद्र सहगल ने दावा किया है कि राजगुरु आरएसएस की मोहिते बाग शाखा के स्वयंसेवक थे. किताब में नरेंद्र सहगल ने लिखा है कि राजगुरु के बलिदान पर हेडगेवार काफी दुखी हुए थे और उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा था कि राजगुरु का बलिदान बेकार नहीं जाएगा.

खास बात यह है कि इस किताब की भूमिका संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लिखी. जहां उन्होंने लिखा कि पिछले 92 सालों में संघ के स्वयंसेवक ने लौकिक प्रसिद्धि से दूर रहकर भारत की स्वतंत्रता और सर्वांगीण उन्नति के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है. भागवत ने लिखा कि स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका पर सवाल उठाने वालों को जवाब देगी. उन्होंने लिखा कि संघ के संस्थापक हेडगेवार का जीवन भारत की स्वतंत्रता, एकात्मकता और अखंडता के लिए समर्पित रहा.

हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में इतिहासकार आदित्य मुखर्जी ने कहा था, ‘बीआर आंबेडकर, स्वामी विवेकानंद और बाल गंगाधर तिलक की तरह राजगुरु को अपना बताना संघ का एक हास्यापद प्रयास है.’

भगत सिंह और उनके साहित्यों के दस्तावेज़ नामक किताब का संपादन करने वाले जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर चमन लाल ने भी सहगल के इस दावे को ख़ारिज किया था. उन्होंने कहा था, ‘इससे पहले संघ की ओर से भगत सिंह को अपना सहयोगी बताने की कोशिश की गई थी. इस बात का कोई सबूत नहीं है कि भगत सिंह या राजगुरु संघ में शामिल थे. उनके सहयोगियों की ओर से लिखी गई आत्मकथाओं में भी इस तरह के दावे का ज़िक्र नहीं है.’

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

शयद आपको भी ये अच्छा लगे लेखक की ओर से अधिक