Home Language Hindi सियाचिन व लद्दाख में तैनात जवानों के पास ठंड से लड़ने के लिए न तो ढंग के जूते हैं और न ही ज़रूरी खाना
Hindi - Political - Politics - Social - December 15, 2019

सियाचिन व लद्दाख में तैनात जवानों के पास ठंड से लड़ने के लिए न तो ढंग के जूते हैं और न ही ज़रूरी खाना

मोदी सरकार को सैनिकों का कितना ख़्याल है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सियाचिन व लद्दाख में तैनात हमारे जवानों के पास ठंड से लड़ने के लिए न तो ढंग के जूते हैं और न ही ज़रूरी भोजन।

इस बात का ख़ुलासा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, सियाचिन (Siachen) व लद्दाख में तैनात भारतीय सेना के जवानों के पास न पहनने के लिए स्‍नो गॉगल्स हैं और न ही मल्टीपर्पज शूज़। जिससे जवानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके साथ ही रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि सेना के जवान (Indian Army) ऊंचाई वाले इलाके में भोजन के अधिकृत दैनिक उपयोग से भी वंचित है। इन इलाकों में जवानों को कैलोरी इनटेक से भी समझौता करना पड़ रहा है। जिससे कई जवानों की तबीयत भी बिगड़ रही है।

CAG रिपोर्ट के इस खुलासे पर पत्रकार साक्षी जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए ट्विटर पर लिखा- अगर आर्मी को सशक्त बनाना है तो मुझे वोट दो, आपका हर वोट सेना को मज़बूत बनाएगा.कहीं सुना सुना सा लगता है न!

सूत्रों के मुताबिक, ऊंचाई वाले इलाकों में सेना के जवान कई तरह की कमियों से जूझ रहे हैं। यहां स्‍नो गॉगल्स की कमी 62 फीसदी से 98 फीसदी है, जिससे जवानों का चेहरा व आंखें ऊंचाई वाले इलाकों में खराब मौसम में बिना ढकी रहती हैं। इससे भी बुरी बात है कि जवानों के पास नए मल्टीपर्पस जूते नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें पुराने जूतों का ही इस्तेमाल करना पड़ता है।

इन इलाकों में स्थिति बेहद निराशाजनक है। यहां तैनात जवानों को पुराने वर्जन के फेस मास्क, जैकेट व स्लीपिंग बैंग दिए गए हैं। इसके साथ ही यहां जवान बेहतर उत्पादों के इस्तेमाल से वंचित हैं।

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