Home Social कांचा इलैया ने जो किताब लिखी है, क्या वो वाकई में बहुत खतरनाक है ?
Social - Southern India - State - September 27, 2017

कांचा इलैया ने जो किताब लिखी है, क्या वो वाकई में बहुत खतरनाक है ?

वारंगल। लेखक और सामाजिक चिंतक कांचा इलैया पर वैश्य समुदाय के लोगों ने हमला बोल दिया. इस दौरान उनके साथ चप्पलों से मारपीट की गई. कांचा इलैया पर ये हमला वारंगल में हुआ. बता दें कि आंध्र प्रदेश और तेलांगाना में कांचा इलैया के खिलाफ पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन हो रहा है. साथ ही कांचा इलैया को लगातार धमकियां भी दी जा रही हैं. वहीं तेलुगू देशम पार्टी के सांसद टी जी वेंकटेश, जो वैश्य समुदाय के हैं, ने तो यह तक कह डाला है कि कांचा इलैया जैसे लेखक को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए.


दरअसल अपनी नई किताब ‘सामाजिका स्मगलर्लु कोमाटोल्लू’की वजह से वो वैश्य समुदाय के लोगों के निशाने पर हैं. गौरतलब है कि इस महीने की शुरूआत से ही कांचा इलैया को जान से मारने और जीभ काटने की धमकी दी जा रही थी. जिसके बाद सितंबर के महीने में कांचा इलैया ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी.

बहरहाल भारत में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठन भी उन लेखकों और कलाकारों का विरोध करते रहे हैं जिनके विचार या जिनका रचनाकर्म उन्हें पसंद नहीं आता. सफदर हाशमी भी इसका एक बड़ा मिसाल हैं. इस सिलसिले में एक ही तर्क दिया जाता है और वह है “भावनाएं आहत होने” का तर्क.
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि मोदी सराकर के तीन सालों में देश में वैचारिक, धार्मिक और सांस्कृतिक असहिष्णुता जितनी बढ़ी है उतनी पहले कभी नहीं बढ़ी. इसलिए इन बीते तीन सालों में देशभर में कभी गौरक्षा के नाम पर लोगों को मारा जा रहा है तो कभी हिंदुत्ववादी विचारों और संगठनों की आलोचना करने वाले लोगों की चुन-चुनकर हत्या की जा रही है या फिर उनका मुंह बंद करने की हर तरह से कोशिश की जा रही है. बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हाल ही में हुई हत्या इसका ताजातरीन उदाहरण है. गौरी लंकेश को हिंदुत्ववादियों की ओर से धमकियां मिलती रहती थीं.


इलैया की जान के साथ-साथ चिंतन और लेखन की स्वतंत्रता भी खतरे में है. किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में विचार का जवाब विचार से और पुस्तक का जवाब दूसरी पुस्तक लिख कर ही दिया जाना चाहिए. विचार और लेखन का जवाब हिंसा की धमकी देकर, दबाव डालने या फिर हिंसक तरीके अपना कर कुचल देने से नहीं दिया जा सकता. नरेंद्र दाभोलकर, एम एम काल्बुर्गी, गोविंद पनसारे और गौरी लंकेश की हत्या के बाद कांचा इलैया को मिल रही धमकियां बतलाती हैं कि भारत में अब कट्टर हिंदुवादी विचारधारा खतरनाक होती जा रही है.

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