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Social - State - Uttar Pradesh & Uttarakhand - August 17, 2017

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 35 और बच्चों की मौत

 

गोरखपुर। बीआरडी कालेज में हुई बच्चों की मौत को लेकर एक तरफ यूपी सरकार सवालों के घेरे में हैं. एक तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत को इनकार कर चुकी है, तो वहीं दूसरी तरफ डीएम की जांच कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है, डीएम की जांच कमेटी की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि बच्चों की मौत अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं होने की वजह से ही हुई है

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डीएम ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया, जिसमें पता लगा है कि बीते दो दिनों में 35 और बच्चों की मौत हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों की मौत ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से ही हुई है।

सीएम योगी आदित्यनाथ औऱ स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ तक यह कह चुके हैं कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई है, ऐसे में डीएम की रिपोर्ट सीएम औऱ स्वास्थ्य मंत्री के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

डीएम की रिपोर्ट में हुए यह खुलासे

ऑक्सीजन सप्लाई कंपनी पुष्पा सेल्स ने लिक्विड ऑक्सिजन की आपूर्ति बाधित की, जिसके लिए वो जिम्मेदार है।

लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई लगातार होती रहे, इसके प्रभारी डॉक्टर सतीश है, जो अपनी डियूटी ना निभाने के पहली नजर में दोषी है।

ऑक्सीजन सिलेंडर का स्टॉक संभालने की जिम्मेदारी सतीश पर है, जिन्होंने लॉग बुक में एंट्री ठीक से नहीं की, ना ही प्रिंसिपल ने इसे गंभीरता से लिया।

प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव मिश्रा को पहले ही कंपनी ने ऑक्सीजन सप्लाई रोकने की जानकारी दी थी, लेकिन दस तारीख को वो मेडिकल कॉलेज से बाहर थे।

प्रिंसिपल के बाहर रहने पर सीएमएस, कार्यवाहक प्राचार्य, बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ कफील के बीच समन्वय की कमी थी।

लिक्विड ऑक्सीजन कंपनी के भुगतान के बारे में आगाह करने के बावजूद औऱ 5 अगस्त को बजट मिल जाने के बाद भी प्रिंसिपल को जानकारी ना देने के लिए लेखा अनुभाग के कर्मचारी दोषी हैं

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 48 घंटे में बीआरडी कॉलेज में 35 और बच्चों की मौत हुई है, बच्चों की मौत का काऱण जब प्रिंसिपल से पूछा गया तो उन्होंने कहा ‘’बीते दिन 24 बच्चों की मौत हुई है.” जब प्रिंसिपल से इंसेफेलाइटिस को लेकर डाटा मांगा गया तो उन्होंने कहा, नहीं मेरे पास टोटल वॉर्ड का डाटा है

अब ऐसे में सवाल इस बात का है कि जब बच्चों की मौत के जो नए मामले सामने आए हैं, उनकी वजह प्रिसिंपल तक नहीं बता पा रहे हैं, को स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री ने कैसे पता कर लिया था कि 36 बच्चों की मौत की कमी से नहीं हुई है ?

दूसरा सवाल इस बात का है कि अगर सरकार कहती है कि बच्चों की मौच ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होने से नहीं हुई तो डीएम की जांच रिपोर्ट में सीधे पहला दोषी ऑक्सीजन देने वाली कंपनी को क्यों नहीं माना गया ?

वहीं ऐसे में सवाल इस बात का भी है कि सीधे तौर पर ऑक्सीजन कंपनी को देषी क्यों माना जा रहा है जब वो 6 महीने से गोरखपुर से लखनऊ तक बकाया भुगतान करने की जानकारी दे रही थी ?

जांच रिपोर्ट में सिर्फ ऑक्सिजन सप्लाई कंपनी, प्रिंसिपल और डॉक्टर ही दोषी क्यों जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव तक को बकाया भुगतान करने की जानकारी होनी चाहिए थी।

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