जातिगत भेदभाव पाटने निकली केरल सरकार, ‘दलित’ और ‘हरिजन’ शब्द के इस्तेमाल पर लगाई रोक
केरल। केरल की सरकार ने 'દલિતvol.14.pp 4-12રોડ્રિગ્સ અને 'હરિજનvol.14.pp 4-12રોડ્રિગ્સ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. कहा जा रहा है जातिगत भेदभाव की खाई पाटने के लिए सरकार ने ऐसा कदम उठाया है. लेकिन वहीं सरकार से इस फैसले के बाद से सूबे में दलित वर्ग में आक्रोश है उनका कहना है कि राजनीति में दलितों की उभरती छवि को दबाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

आपको बता दें पीआर विभाग ने एसटी/एससी आयोग की एक सिफारिश का हवाला देते हुए नोटिस जारी किया है। पीआर विभाग ने सर्कुलर के जरिए सभी सरकारी पब्लिकेशन और सरकार की प्रचार-प्रसार सामग्री में ‘दलित’, 'हरिजन’ शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की अपील की है।

पीआर विभाग का यह सर्कुलर सरकार और अन्य विभागों के बीच इन शब्दों पर बैन लगाने को लेकर चल रही चर्चा के बीच आया है। सर्कुलर में दलित/हरिजन शब्दों की जगह एससी/एसटी शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।
इंडिया टुडे के मुताबिक एससी/एसटी कमीशन के सूत्रों का कहना है कि दलित और हरिजन शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने की सिफारिश उन सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के लिए की गई थी जो आज भी कई जगहों पर हो रहे हैं।

वहीं दलित आंदोलनकारियों को सरकार का यह फैसला पसंद नहीं आया। उनका कहना है कि सरकार का यह कदम वह स्वीकार नहीं कर सकते, क्योंकि दलित शब्द उन्हें एक सामाजिक-राजनीतिक पहचान देता है।
एक दलित आंदोलनकारी ने कहा, 'सरकार इस तरह के मुद्दों में क्यों घुसना चाहती है।’ हालांकि इस मामले में अंतिम आदेश लोगों से बात करने के बाद ही आएगा।
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