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Social - State - September 15, 2017

जानिए रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में क्यों नहीं जगह देना चाहती मोदी सरकार ?

नई दिल्ली। बर्मा में रोहिंग्या मुसलमानों पर जुल्म अत्याचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, रोहिंग्या और उनके मासूमों का बेरहमी से कत्ल किया जा रहा है. लेकिन म्यामांर की सरकार और वहां के इंसान से हैवान बने लोगों को रोहिंग्या मुस्लिमों का दर्द महसूस नहीं हो रहा है. बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे रोहिंग्या मुसलमान अपनी जान बचाने के लिए पड़ोसी देशों में आसरा ढूंढ रहे हैं.

भारत, बंग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की शरहद पर बने शिवर कैंपों में रोहिंग्या मुसलमान छिपकर अपनी जान बचाने की जुगत में लगे हुए हैं. भारत में तकरीबन 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान रुके हुए हैं. लेकिन भारत सरकार का रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति बेरुखा रवैया बना हुआ है. मोदी सरकार रोंहिग्या मुसमानों को भारत में जगाह नही देना चाहती है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा था कि रोहिंग्या मुसलमान देश की सुरक्षा के लिए खतरा है, इस समुदाय के लोग आंतकी संगठनो से भी जुड़े हो सकते हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इसे होल्ड करने की अपील की है.

मोदी सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को यह कहकर भारत में जगह देना नहीं चाहती है. कि रोहिंग्या मुसलमानों से भारत की आंतरिक सुरक्षा को खतरा होगा. लेकिन सवाल इस बात का है कि क्या 40 हजार रोहिंग्या भारत के लिए सच में खतरा है या इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण है.

यदि भारत के अतीत पर नजर दौड़ाई जाए तो शरणार्थियों के लिए भारत हमेशा दरवाजे खोलता रहा है. अब तक तिब्बती, बांग्लादेश के चकमा-हाजोंग, अफगानी और श्रीलंका के तमिलों को भारत में शरण मिली है. इनमें से हाल ही में चकमा और हाजोंग समुदाय के लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय नागरिकता देने तक का आदेश दिया है.

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