प्लास्टिक की बोरियों में जवानों के शव का क्या है पूरा सच ?
नई दिल्ली। भारतीय सेना के सात जवान शहीद. सातों के शव प्लास्टिक की बोरियों में भरे हुए. बोरियां गत्ते में रखी हुईं. ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. आपने भी अपने फेसबुक पेज पर यकीनन देखा होगा इन तस्वीरों को. आपके भी मन में गुस्सा भड़का हो शायद.

सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने ट्वीट की थीं तस्वीरें
शुक्रवार, 6 अक्टूबर. भारतीय सेना का एक MI-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. अरुणाचल प्रदेश के तवांग में. चीन की सीमा के पास. उसमें भारतीय वायु सेना के पांच अधिकारी थे. सेना के दो जवान भी थे. हादसे में ये सातों शहीद हो गए. लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एच एस पनाग ने ट्वीट कर दिया. तस्वीर के साथ. शहीदों की नहीं, उनकी लाशों की. प्लास्टिक की बोरियों में भरी हुईं. जमीन पर पड़ी थीं. उन्होंने लिखा, ”कल सात जवान सूरज की रोशनी में बाहर निकले. अपनी मातृभूमि भारत की सेवा करने के लिए. वापस अपने घर वो इस तरह लौटे हैं.”

सोशल मीडिया पर लोगों ने सेना को खरी-खोटी सुनाई
सोशल मीडिया पर एक ओर जहां आम लोगों ने पनाग के इस ट्वीट के बाद नाराजगी जताई. सेना को खरी-खोटी सुनाई. लोग इस तस्वीर को जमकर शेयर करने लगे.
विश्वा सोडान लिखते हैं, ”हर एक का राष्ट्रवाद अलग है. उनमें से बीजेपी वालों का कुछ एसा है जैसा आप देख रहे हैं. अखलाक के हत्यारे को राष्ट्रीय झंडे का ताबूत. देश के सरहद पर पहरा देने वालों के लिए गत्ते के खोखे.

वहीं राजन उपाध्याय लिखते हैं, ”मोदी सरकार ने 2 दिन पहले शहीद हुए 7 सैनिकों के शवों को इस हालत में उनके घर भेजा. शर्म नहीं आई सरकार को. ऐसे सरकार पे थूकता हूं. जो अपने शहीद सैनिकों को सम्मान तक नहीं दे सकती. बस उनके नाम पे वोट लेना जानती है.

Remembering Maulana Azad and his death anniversary
Maulana Abul Kalam Azad, also known as Maulana Azad, was an eminent Indian scholar, freedo…






