मूलनिवासी दिवस पर बामसेफ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का सनसनीखेज खुलासा !
By: Sushil kumar
नई दिल्ली। 9 अगस्त यानी की आज विश्व स्तर पर मूलनिवासी दिवस मनाया जा रहा है, भारत में भी मूलनिवासी दिवस काफी खास तरीके से मनाया जा रहा है, बामसेफ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीषा बांगर ने मूलनिवासी दिवस के मौके पर सभी लोगों को हार्दिक बधाई दी है, साथ ही मूलनिवासी दिवस को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं होने पर उन्होंने मीडिया पर भी कटाक्ष किया है।
मनीषा बांगर ने कहा कि ‘पिछले 10-12 सालों से यूनाइटेड स्टेट विश्व स्तर पर मूलनिवासी दिवस मनाता आ रहा है, लेकिन भारत में इसको इतने महत्वपूर्ण तरीके से नहीं मनाया जाता’। भारत में बामसेफ और मूलनिवासी संघ जैसे संगठन इसको मनाते हैं। मनीषा ने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय मीडिया इस मुद्दे पर ज्यादा चर्चा नहीं करती, इसको ज्यादा हाइलाइट नहीं करती है’
मनीषा बांगर ने कहा कि मूलनिवासी दिवस मनाने का मकसद बताते हुए कहा कि ‘मूलनिवासी दिवस मनाने की वजह है कि देश के मूलनिवासियों को उनके हक औऱ अधिकारों के प्रति जागरुक किया जाए’
मनीषा बांगर ने हावर्ड युनिवर्सिटी की रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ‘हालिया रिपोर्ट से पता लगा है कि भारत में आर्य लोग विदेशों से आए थे, जिन्होंने अपनी जातिवादी व्यवस्था हम पर थोपने का काम किया, और इस व्यवस्था के अन्तर्गत पीढ़ी दर पीढ़ी मूलनिवासियों को प्रताड़ित किया गया’
मनीषा ने आगे कहा कि देश के मूलनिवासियों को उनके शैक्षणिक, समाजिक, संस्कृतिक अधिकारों से दूर रखकर उनके खिलाफ अन्याय किया है, जिसके लिए मूलनिवासी दिवस मनाया जाता है, ताकि उनके हितों और अधिकारों के लिए वो जागरुक हों। उन्होंने कहा ‘आर्यों ने ही जातिवादी व्यवस्था थोपकर हकों से वंचित रखा’
मनीषा बांगर ने कहा कि ‘इसलिए हम लोगों को यानी कि एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक को मूलनिवासी दिवस के महत्व को समझना चाहिए, और हमें मजबूती से मिलकर रहना चाहिए तब ही हम इस जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़ सकेंगे’
9 अगस्त यानी की आज विश्व स्तर पर मूलनिवासी दिवस मनाया जा रहा है, भारत में भी मूलनिवासी दिवस काफी खास तरीके से मनाया जा रहा है, बामसेफ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीषा बांगर ने मूलनिवासी दिवस के मौके पर सभी लोगों को हार्दिक बधाई दी है, साथ ही मूलनिवासी दिवस को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं होने पर उन्होंने मीडिया पर भी कटाक्ष किया है।
मनीषा बांगर ने कहा कि ‘पिछले 10-12 सालों से यूनाइटेड स्टेड विश्व स्तर पर मूलनिवासी दिवस मनाता आ रहा है, लेकिन भारत में उसकी इतने महत्वपूर्ण तरीके से नहीं मनाया जाता’। भारत में बामसेफ और मूलनिवासी संघ जैसे संगठन इसको मनाते हैं। मनीषा ने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय मीडिया इस मुद्दे पर ज्यादा चर्चा नहीं करती, इसको ज्यादा हाइलाइट नहीं करती है’
मनीषा बांगर ने कहा कि मूलनिवासी दिवस मनाने का मकसद बताते हुए कहा कि ‘मूलनिवासी दिवस मनाने की वजह है कि देश के मूलनिवासियों को उनके हक औऱ अधिकारों के प्रति जागरुक किया जाए’
मनीषा बांगर ने हावर्ड युनिवर्सिटी की रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ‘हालिया रिपोर्ट से पता लगा है कि भारत में आर्य लोग विदेशों से आए थे, जिन्होंने अपनी जातिवादी व्यवस्था हम पर थोपने का काम किया, और इस व्यवस्था के अन्तर्गत पीढ़ी दर पीढ़ी मूलनिवासियों को प्रताड़ित किया गया’
मनीषा ने आगे कहा कि देश के मूलनिवासियों को उनके शैक्षणिक, समाजिक, संस्कृतिक अधिकारों से दूर रखकर उनके खिलाफ अन्याय किया है, जिसके लिए मूलनिवासी दिवस मनाया जाता है, ताकि उनके हितों और अधिकारों के लिए वो जागरुक हों। उन्होंने कहा ‘आर्यों ने ही जातिवादी व्यवस्था थोपकर हकों से वंचित रखा’
मनीषा बांगर ने कहा कि ‘इसलिए हम लोगों को यानी कि एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक को मूलनिवासी दिवस के महत्व को समझना चाहिए, और हमें मजबूती से मिलकर रहना चाहिए तब ही हम इस जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़ सकेंगे’
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