मॉब लिंचिंग, वर्णिका कुंडू और दलित उत्पीड़न मामले में खामोश रहने वाले अमिताभ बच्चन ने तीन तलाक पर खोला मुंह
By Sayed Shaad
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीन तलाक़ पर दिए अपने ऐतिहासिक फ़ैसले में एक बार में तीन तलाक़ को असंवैधानिक क़रार दिया है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की यह पांच सदस्यीय बेंच कुछ अनोखी बेंच थी. चीफ जस्टिस जे.एस. खेहर सिख, जस्टिस नज़ीर मुस्लिम, जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन पारसी, जस्टिस कुरियन जोसेफ ईसाई और जस्टिस यू.यू. ललित हिंदू. इससे भी ज़्यादा अनोखी बात ये है कि तीन तलाक से जुड़ा यह मुद्दा जो महिलाओं की ज़िंदगी से ताल्लुक़ रखता है, कोई महिला जज नहीं थीं. आप ख़ुद इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि आज भी देश की न्यायपालिका की परंपरा उतनी ही पुरुष प्रधान है जितनी कि 70 साल पहले थी. बात महिलाओं के अधिकारों और आजादी की हो रही है. और हमारे देश की न्यायपालिका आज भी पुरूष प्रधान है.
वहीं तीन तलाक को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमिताभ बच्चन ने बड़ा बयान दिया है. अमिताभ बच्चन ने कहा है कि तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय का फैसला खुद ही बोलता है और ‘‘हम अपने देश के कानून से तर्क नहीं कर सकते.’’
अमिताभ बच्चन ने आगे कहा कि समाज में महिलाएं जिस तरह से पाबंदियों का सामना करती हैं, यह देखकर उन्हें दुख होता है. अमिताभ यहीं नहीं रूके वो आगे कहते हैं कि ‘‘लड़कियों को शिक्षित होने से रोक दिया जाता है क्योंकि उसका विवाह होना है, इसलिए उस पर पैसे क्यों खर्च किये जाएं. मुझे उनके लिए दुख होता है. वे बाहर आकर और मेरे सामने (केबीसी के लिए) हॉट सीट पर बैठने के लिए वर्षों से प्रचलित सामाजिक नियमों को तोड़ती हैं, वे उसमें सफल होती हैं जिसका सपना उन्होंने अपने लिए देखा होता है जो बहुत ही प्रेरक होता है.’’ दरअसल ये बातें अमिताभ बच्चन ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के संवाददाता सम्मेलन में लोगों को संबोधित करते हुए बोल रहे थे.
बहरहाल तीन तलाक पर फैसले आने के बाद से ही नेताओं से लेकर कई नामचीन हस्तियां भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. बड़ा सवाल है कि देशभर में जहां गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग का मामला हो, वर्णिका कुंडू से छेड़छाड़ का मामले हो या फिर महिला उत्पीड़न के हजारों मामले हों ऐसे तमाम मुद्दे पर चुप्पी साधने वाले अमिताभ बच्चन ने तीन तलाक पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. वाकई में अपने आप में यह काफी दिलचस्प है. अमिताभ बच्चन खुद कह रह हैं कि फैसला खुद ही बोलता है और ‘हम अपने देश के कानून से तर्क नहीं कर सकते’. गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग का जो गंदा खेल देशभर में चल रहा है उसे देश के किस कानून ने इजाजत दिया है. ‘हम अपने देश के कानून से तर्क नहीं कर सकते’ ये बात तब अमिताभ बच्चन क्यों नहीं कहते जब गाय के नाम पर भीड़ बेकसुर लोगों को पीट-पीट कर मौत के घाट उतार देती है. तो ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या सदी के महानायक यह भूल गए हैं कि उसी देश का कानून सभी को जीने का अधिकार देता है. चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम या फिर ब्राहमण या दलित. जिन मुस्लिम महिलाओं के हक में अमिताभ बच्चन बोल रहे हैं उन्हीं मुस्लिम महिलाओं के शौहर,भाई और अब्बा को गाय के नाम पर पीट-पीट कर मार डाला जाता है.
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