‘ये सिर्फ मेरी जीत नहीं, बल्कि सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल और धनबल की हार है’
करून: NIN कार्यालय
गुजरात में राज्यसभा चुनाव के चलते कांग्रेस औऱ बीजेपी के बीच काफी कड़ा मुकाबला रहा। दांव पर वरिष्ठ कांग्रेसी और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल की कुर्सी थी। राज्य सभा चुनाव की घोषणा के साथ ही गुजरात में भारी उठापटक शुरू हो गई थी। आधा दर्जन कांग्रेसी विधायक बीजेपी के पाले में चले गए। चुनाव आयोग ने तीनों राजसभा सीटों के चुनाव परिणाम घोषित कर दिए हैं।

चुनाव आयोग ने गुजरात की 3 सीटों पर बीजेपी को 2 और कांग्रेस को एक सीट पर विजयी घोषित किया है। इसके साथ ही उस बड़े राजनीतिक गतिरोध का पटाक्षेप हो गया है, जिसकी बिसात पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच गुजरात से लेकर नई दिल्ली तक रस्सा-कस्सी हुई। इस क्रम में बीजेपी और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडलों ने 3-3 बार चुनाव आयोग के दफ्तर तक दौड़ लगाई, जिसमें कांग्रेस को जीत मिली।




मंगलवार को गुजरात के 182 पासून 176 विधायकों ने वोट दिया। दो विधायकों के वोट अवैध घोषित हो जाने के बाद अंतिम मुकाबला 174 वोटों के आधार पर हुआ। यानी अब जीत के लिए पहले के 45 की जगह केवल 44 विधायकों के वोट की जरूरत रह गई। अहमद पटेल को ठीक 44 फक्त मते मिळाली.
कांग्रेस के गुजरात में कुल 51 विधायक हैं लेकिन इनमें से 44 विधायक ही कर्नाटक के रिसॉर्ट गए थे। कांग्रेस को उम्मीद थी कि ये सभी विधायक उसे वोट देंगे लेकिन इनमें से केवल 43 विधायकों ने ही अहमद पटेल को वोट दिया। हालांकि अभी तक ये साफ नहीं है कि किस एक अन्य विधायक ने अहमद पटेल को वोट दिया जिससे उनकी जीत हो पाई।
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