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AMU में विवाद के पीछे कैसी मंशा?

By- Aqil Raza

AMU यानी अलिगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। इस विवाद को लेकर सभी मीडिया हउसिस ने अपने अपने हिसाब से कवरेज की है…हम इस बात का प्रूफ नहीं दे सकते की मैन स्ट्रीम मीडिया पर दिखाया जा रहे विवाद को उन मीडिया चैनल्स ने कवर किया है या नहीं…लेकिन इतना ज़रूर है कि छात्रों से बात करने पर औऱ वीडियो के सामने आने से जो तथ्य निकलकर सामने आ रहे हैं वो उन न्यूज़ चैनल्स की कवरेज से काफी परे है।

दरअसल इसकी शुरुआत कुछ दिन पहले हुई थी जब यूनिवर्सिटी कैंपस में आरएसएस की साखा के लिए परमीशिन मांगी गई थी जिसको यूनिवर्सिटी ने मना कर दिया था। और उसके बाद बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने खत लिखकर पूंछा कि जिन्ना की तस्वीर AMU के स्टूडेंट्स यूनियन हॉल में क्यों लगी है, इसको हटाया जाना चाहिए। इस मसले पर कुछ टीवी चैनल्स पर डिबेट होती है और इस सवाल की अवज में कई और सवाल पैदा हो जाते हैं…और टीवी के एंकर इसको राष्ट्रवादी मुद्दा बना देते हैं। यह मामला अभी घटना से एक दिन पहले का है यानी 1 मई का है..

एक मई को और भी कई सारे नेताओं के इस पर बयान आते हैं, जिसमें एटा के बीजेपी से राज्यसभा सदस्य हरनाथ सिह यादव एएमयू को देशद्रोहियों का अड्डा तक बता देतें हैं। अब आप देखिए की उनके देशद्रोही या देशद्रोहियों का अड्डा कहना कितना आसान है। अब दो तारीख को इन बयानों और इन डीबेटों के साहारो जो प्लॉटफार्म बनकर तैयार होता है…उसपर वो भीड़ अपना काम करती है।

2 मई को पूर्व राष्ट्रपति हमिद अंसारी का AMU में प्रोग्राम था जहां उन्हें अजीवन सदस्यता मिलने वाली थी। अजीवन सदस्यता का मतलद, ये AMU की एक उपाधी है..जो और भी लोगों को मिल चुकी है जिसमें कई सारे नाम शामिल हैं…जिसमें सबसे पहला नाम महात्मा गांधी का है और इस उपाधि में जिन्ना का नाम भी शामिल है और यही वजह जो जिन्ना की तस्वीर AMU में लगी हुई है। इसका एक बड़ा रीज़न ये भी है कि AMU आज़ादी से काफी सालों पुरानी युनिवर्सिटी है और कई सारे लोगों ने इसमें अपना बड़ा योगदान दिया था..और इसी को ध्यान में रखते हुए जिन्ना को 1938 में अजीवन सदस्यता दी गई थी…यानी ये फोटो एक ऐतिहासिक चिन्ह की तरह पिछले 80 बरसों से यूनियन हाल मे लगी हुई है.

इसमें कोई ऐसी अपत्ति उस समय नहीं की गई, क्यूंकि बाकी नेताओं की तरह उस समय जिन्ना एक ‘भारतीय’ नेता ही माने जाते थे. जिन्ना की तरह, नेहरू, आज़ाद और गाँधी जी की तस्वीरें यूनियन हाल मे मौजूद हैं. लेकिन हाँ, सावरकर और गोडसे की नहीं है, जिनसे RSS को ज्यादा प्यार है. जिन्ना की इस तस्वीर का कोई ज़िक्र आज तक नहीं हुआ ना जिन्ना के बारे मे कभी कोई बात कही गई. ना ही गोडसे की मूर्तियों की तरह कभी कोई मालार्पण वगैरा हुआ. हाँ ये है कि किसी ने भी इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने की ज़रूरत बहतर नहीं समझी।

लेकिन अब मुद्दो से भटकाने के लिए ताजमहल से शुरू हुआ सिलसिला कई ऐतिहासिक इमारतों से होता हुआ संविधान बदलने से लेकर AMU के कैंपस तक आ गया है।

हामिद अंसारी को ये उपाधी मिलना भी इस विवाद की वजह हो सकता है…क्योंकि हमेशा से संघ परिवार के लिए हामिद अंसारी खटकते रहे हैं…और इन सब बातों के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ की हिन्दू युवा वाहिनी ने AMU को निशाने पर ले लिया।

AMU के छात्रों से बात की तो पता चला कि हिदूं यूवा वाहिनी, एबीवीपी और विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने आकर हमला किया…छात्रों का आरोप है कि भगवा गुंडो का मक़सद कैंपस का माहौल बिगाड़ने के साथ पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी को क्षति पहुंचाना भी था, युवा वाहिनी के गुंडे पिस्तौल और धारदार हथियारों से लैस थे, और उनका साथ देने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भी पीछे से आई थी. यानी छात्रों का आरोप है कि पुलिस से उन लोगों को संरक्षण मिल रहा था।

वहीं छात्रों ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि इन गुंडों ने कुछ छात्रों से मारपीट की, यूनिवर्सिटी सुरक्षा कर्मियों की वर्दी फाड़ दी, हामिद अंसारी की सुरक्षा में सेंध लगाते हुए उनकी गाड़ी तक पहुंच गये. फिर जब AMU सिक्योरिटी स्टाफ ने इनमें से 6 गुंडों को पकड़ कर ऱखा था, जिनको प्रोक्टर ऑफिस में ले जाना था, जिसके बाद हि वो पुलिस को सौंपा जा सकता था, पर पुलिस गुडागर्दी करते हुए उनको छुड़ाकर ले जाती है। और जब छात्रों ने FIR दर्ज करने की मांग की तो उल्टा छात्रों पर ही लाठी चार्ज कर दिया। ये आरोप छात्रों ने लगाए हैं और साथ में कुछ वीडियों और फोटो भी शेयर किए हैं, जिसमें पुलिस छात्रों पर लाठी चार्ज करती हुई दिख रही है।

इसमें सवाल इस बात का है कि पूर्व उप राष्ट्रपति के होते हुए सुरक्षा में इतनी भारी चूक कैसे होती है कि कोई भी दंगाई कैंपस में घुस जाता है… और उसके बाद भी जब युनिवर्सिटी की सिक्योरिटी उन गुंडो को पकड़ती है तो पुलिस ही उन्हे क्यों छुड़ाती है? यहां तक की जब छात्र यूनियन एफआईआर के लिए जाते हैं तो एफआईआर लिखी नहीं जाती है और उसको लेकर अगर शांति से धरना किया, तो फिर उनपर लाठियां बरसा दी जाती हैं..? ये सब करने के लिए पुलिस को भी तो ओडर मिला ही होगा…तो क्या इस पूरे मामले को देखते हुए ये माना जाए कि ये सब पहले से हि सोची समझी साजिश थी…

इस पूरे मामले में योगी सरकार के लिए बड़ा सवाल ये है कि हमारे देश के पूर्व उप राष्ट्रपति कि सुरक्षा में सैंध कैसे लगा दी जाती है? विचार करने की बात ये है कि इतना सब होने के बाद भी यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ उस तस्वीर पर अपनी बात रख रहे हैं..जिसका आज के भारत से कोई लेना देना नहीं है..वो एक हिस्टोरिकल फेक्ट है उसको हिस्ट्री के हिसाब से देखा जाना चाहिए..और सरकार को ये सोचना चाहिए की उनका लॉ एंड ऑर्डर कहां है, कि चंद गंडो की वजह से पूर्व उप राष्ट्रपति का प्रोग्राम में वाधा आ जाती है, क्या इस तरह के लॉ एंड ऑर्डर की दुहाई योगी सरकार देती है।

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