या देशात पर्याय आहे जसे शक्यता करून हिंदूंच्या आम्ही मुस्लिम या देशात आहेत, पण : हर्ष Mander
नागरिकता संशोधन बिल के पास हो जाने से देश के सभी इलाकों में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहें है। एक ओर जहां सरकार इसके फ़ायदे की दलीले संसद के दोनों सदनों गिना रही है। वहीं इसके खिलाफ लोग सड़क पर पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
इस बिल के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर रोज़ भारी तादाद में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आज ‘नॉट इन माय नेम’ समूह द्वारा आयोजित प्रदर्शन में हज़ारों की संख्या में लोग इक्क्ठा होकर इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया।
वहीं इस प्रदर्शन में आए लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने मोदी सरकार के इस बिल को संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने इस बिल में जिस प्रकार से मुस्लिम समुदाय को अलग रखा गया है उसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब आज़ादी के लिए हम लड़ रहे थे उस वक़्त लड़ाई सिर्फ अंग्रेजों से नहीं थी बल्कि आज़ादी के बाद यह मुल्क कैसा होगा इसकी भी एक जंग थी।
जेव्हा हिंदुस्तान 1947 में आज़ाद हुआ उसके बाद सबसे बड़ी चिंता यह थी की यह देश किन शर्तों और उसूलों पर बनेगा। उस वक़्त इसके खिलाफ दो ख़ेमे सामने खड़े थे। एक मुस्लिम लीग और दूसरा हिन्दू महासभा।
जिन्ना धर्म के आधार पर एक नए मुल्क की मांग कर रहे थे। जिसके आधार पर बाद में बहुत भयानक हिंसक घटनाओं के बाद हिन्दुस्तान का बटवारा हुआ और नया पकिस्तान बना।
उस वक़्त भारत के मुस्लिमों ने इस देश को चुना जहां धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं था। सबको अपनी भाषा धर्म और मान्यताओं को लेकर जीने का सामान अधिकार था। उस वक़्त मुस्लिमों ने धर्म के आधार पर बने पकिस्तान को ना चुनकर हिन्दुस्तान में रहना पसंद किया जो की उनका मुल्क है।
हर्ष मंदिर म्हणाले, ‘हम यानी हिन्दू बाई चांस इस देश में रहे लेकिन मुस्लिमों ने बाई चॉइस इस मुल्क को पसंद किया। यह देश गांधी और आंबेडकर का देश है इसे अब बीजेपी तोड़ना चाहती है जो मुमकिन नहीं है।’
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