बहुजन हो! ज़िंदा रहते सम्मानजनक ज़िंदगी नहीं और मरने के बाद दो गज जमीन के भी लाले हैं…
بہار کے مدھے پورہ ضلع کے کیوتگاما گاؤں میں بہوجن بے زمین مزدور ہری نارائن کی بیوی سہوگیا دیوی کی اسہال سے موت ہوگئی۔ پہلے زندگی بھر اچھا علاج نہ کروا سکا اور بعد میں دو گز زمین بھی نہ مل سکی۔
हरिनारायण जब पत्नी की अंतिम क्रिया करने की तैयारी में लगा तो गाँव के तथाकथित ऊँची जाति के भूमिहार और राजपूत लोगों ने हरिनारायण को उसकी पत्नी का अंतिम संस्कार ऊंची जात वाले श्मशान घाट में करने देने से मना कर दिया। यही नहीं उस पर दबाव बनाया गया कि गांव की बाहरी ज़मीन पर भी वह अपनी पत्नी की अंतिम क्रिया नहीं कर सकता।
ہارنے کے بعد اسے اپنی بیوی کو گھر کے اندر جلانا پڑا۔ ہرینارائن اور اس کے بچے جلنے کے بعد بچ جانے والی راکھ کو جمع کر رہے ہیں اور وہیں آنسو بہاتے ہوئے رہ رہے ہیں۔
نتیش کمار نے غریبوں میں سے غریب ترین، بہوجنوں کو مہادلت طبقے کے زمرے میں رکھا ہے۔ ہرینارائن بھی مہادلیت ہیں۔, पर ये मामला संज्ञान में आने के बाद भी आला अधिकारी से लेकर पंचायत तक किसी ने सुध नहीं ली।
ये सब देखते हुए भी तथाकथित ऊँची जात वाले अमानुषों को लगता है कि एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग हो रहा है। आरक्षण ख़त्म होने चाहिए। औऱ कितनी अमानवीयता देखना चाहते हो, ये विश्वास करने के लिए कि इस दुनिया में जातिवाद से नृशंस कुछ नहीं….. कुछ भी नहीं।
-Deepaly Tayday
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