Home Social सीएम योगी ने विधानसभा में कि धार्मिक त्योहारों की तुलना, विकास का मुद्दा क्यों गायब?

सीएम योगी ने विधानसभा में कि धार्मिक त्योहारों की तुलना, विकास का मुद्दा क्यों गायब?

By- Aqil Raza

यूपी में 2 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, जिसके चलते सभी राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी कमर कसना शुरू कर दी है। जिस पार्टी की जो ताकत है वो ताकत चुनाव से पहले वोटरों को रुझाने के लिए लगा रही हैं।

बीते दिन की खबरों से ये तो आपको पता चल गया होगा कि बीएसपी और एसपी के गठबंधन से बीजेपी के होश पाख्ता हो गए हैं, और बीजेपी नेता ये कभी नहीं चाहते की ये दोनों पार्टीयां युपी की 2 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव में एक साथ उतरें, लेकिन ऐसा अब हो चुका है और एसपी कांग्रेस का दामन छोड़कर बीएसपी से हाथ मिला चुकी है। इस गठबंधन के साथ ही बाजेपी हाइकामान से लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं में बौखलाहट शुरू हो गई हैं और तमाम बड़े नेताओं ने इसपर बयानबाजियां भी की हैं।

जिसमें खुद यूपी के मुखिय़ा योगी आदित्यनाथ का नाम भी शामिल है। इसके अलावा साक्षी माहाराज, रामगोपाल नंदी और दयांशकर ने भी इस गठबंधन पर तीखा हमला बोला है, इतना ही नहीं दयाशंकर और रामगोपाल मंदी ने तो विवादित भाषा का इस्तेमाल भी किया। रामगोपाल नंदी ने ऐसा उस वक्त किया जब योगी अदित्यनाथ खुद वो मंच साजह कर रहे थे जहां से नंदी ने मुलायम सिंह को रावण और मायावती को शूर्पणखा रामायण पढ़े जाने के अंदाज़ में बोल दिया। लेकिन सूबे के मुखिया ने इसका कोई भी विरोध नहीं किया और सीएम के मद्देनज़र सब कुछ होता रहा।

लेकिन समझने वाली बात ये है कि राजनीति के लिए इस तरह की बयानबाजी या भाषा का इस्तेमाल करना कितना ज़रूरी है, अगर आंकड़ो की माने तो सबसे ज्यादा विवादित बयान बीजेपी के नेता देते रहे हैं। तो फिर क्या ये माना जाए कि बीजेपी के लिए विवादित बयानबाजी भी उनकी राजनीति का हिस्सा है।आपको बता दें कि बीजेपी इन सब के बीच हिंदुत्व कार्ड भी खेलती है, जिसका मुजाहिरा यूपी के सीएम जगह जगह पर पेश करते रहते हैं। हालहि में होली और नमाज़ की तुलना कर लोगों की वाहवाही लूटने की कोशिश की थी और होली के दिन जुमे की नमाज़ का वक्त आगे बढ़ाए जाने का श्रेय भी खुद लेने की कोशिश की थी।

जिसके बाद यूपी विधानसभा में भी यीएम योगी अदित्यनाथ ने हिंदू और मुस्लिम के तोहारो का बखान करके अपना हिंदुत्व कार्ड को बरकरार रखने की कोशिश की। यूपी विधानसभा में उन्होंने कहा कि 11 महीने में एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है. होली और जुमा एक ही दिन पड़ा तो हमने जुमे को दो घंटे आगे बढ़ा दिया, और कहा कि पहले होली मनाए.

यूपी सीएम योगी ने कहा कि हमने सभी पुलिस लाइन और थानों में जन्माष्टमी मनाना शुरू किया. उन्होंने कहा कि जब एक पत्रकार ने हमसे पूछा कि आपने दीवाली अयोध्या और होली मथुरा में मनाई तो होली कहां मनाएंगे. योगी बोले कि मैंने साफ कहा कि मैं हिंदू हूं, ईद नहीं मनाता और इसका मुझे गर्व है. लेकिन शांतिपूर्वक ईद मनाने के लिए सरकार सदैव काम करती रहेगी.

समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा कि सपा को अपनी तोड़क नीति अपने पार्टी तक ही सीमित रखनी चाहिए, प्रदेश और देश को तोड़ने का प्रयास किया जाएगा तो दंडकारी नीति से निपटेंगे. समाजवादी पार्टी और बसपा के गठबंधन पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा कि अब इनकी पार्टी ‘बहुजन समाजवादी पार्टी’ बन गई है.

लेकिन सवाल इस बात का है कि एक दूसरे पर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तक तो ठीक है लेकिन कौन व्यक्ति राज्या में क्या त्योहार मनाए और कौनसा त्योहार मनाने पर उसे गर्व होना चाहिए ये बात भी विधानसभा में होना कितनी वाजिब है, अगर विधानसभा में भी अब 2 समुदायों के धार्मिक त्योहारों की वकालत होने लगेगी, तो फिर विकास के मुद्दो को कहां उठाया जाएगा।

सीएम योगी की इन सब बातों से ये साफ ज़ाहिर होता है कि वो उपचुनाव के लिए हुए गठबंधन को भूला नहीं पा रहे है, और साथ ही बीच बीच में हिंदुत्न कार्ड खेल रहे है। लेकिन इन बातों से शायद ही इस गठबंधन को फर्क पढ़ेगा।

अगर हम इस गठबंधन की बात करें तो ये इसलिए बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है, क्योंकि जो वोटर इन दोनों में बट जाते थे वो अब एक जगह आकर वोट करेंगे, जो कि बीजेपी के लिए बड़ा खतरा है। और ऐसे महोल में ये बात कही जा सकती है कि अगर मुस्लिम, आदिवासी और बहुजन एक साथ होते हैं तो बीजेपी का हिदुत्व कार्ड भी फैल होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

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