ब्राह्मणवाद के फेक प्रचार को कैसे दिया बामसेफ की उपाध्यक्ष मनीषा बांगर ने जवाब ? पढ़िए
By: Sushil Kumar
नई दिल्ली। एक तरफ सोशल मीडिया ने इंसान को मजबूती से अपनी बात कहने के लिए प्लेटफॉर्म दिया तो वहीं दूसरी तरफ कुछ शरारती तत्व कमाई करने के लिए फेक न्यूज का निर्माण करके लोगों में भ्रम पैदा करके समाज को तोड़ने में लगे हैं।
धर्म चाहे कोई भी हो लेकिन जब उसमें कट्टरवाद पनपने लगे तो इंसानियत का पतन होने लगता है. आजकल वाट्सएप्प, यूट्यूब, फेसबुक पर तमाम ऐसे लोग हैं जो दूसरे धर्म के खिलाफ भड़काउ वीडियो बनाकर वायरल करते हैं.
यूट्यूब पर राहुल आर्य नाम का एक शख्स जो थैंक भारत नाम से एक चैनल चला रहा है. चैनल पर सिर्फ कट्टरवादी हिंदुत्व का प्रचार और दूसरे धर्मों को गालियां देना ही उसका काम है। फिलहाल ही में उसने एक वीडियो अपलोड किया जिसका टाइटल है ‘मूलनिवासी दलितों का पर्दाफाश’ जिसमें उसने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के बारे में अशोभनीय शब्द इस्तेमाल किए। साथ बामसेफ की उपाध्यक्ष डॉ मनीषा बांगर को लेकर घटिया शब्दों का प्रयोग किया है।
वीडियो में राहुल आर्य ने दावा किया है कि आर्यन का भारत आगमन थ्योरी गलत है. साथ ही उसने कहा कि अपरकास्ट के लोग ही असली मूलनिवासी है। इससे साफ जाहिर होता है कि उसके कहने का मतलब है कि बहुजन समाज के लोग यानी कि एसएसी, एसटी, ओबीसी इस देश के मूलनिवासी नहीं है. इस देश के मूलनिवासी ब्राह्मण, क्षत्रिय और वेश्य है जबकि यह बात पहले कई बार के रिसर्च में साबित हो चुकी है कि इस देश के एसएसी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग ही असली मूलनिवासी है।
बामसेफ की उपाध्यक्ष डॉ मनीषा बांगर ने इसका कड़ा विरोध किया है. उन्होंने अपनी फेसबुक पर खुद के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने ब्राह्मणवाद पर तंज कसते हुए लिखा है कि…
देखिये ब्राह्मण कैसे बौखला रहे है
‘ मूलनिवासी शब्द से ब्राह्मण दहशत में ‘ हमारे इस विडियो पर आज २० से ज़्यादा यूट्यूब चैनल से तरह तरह के रिएक्शन दे रहे ।
हे गधेव ब्राह्मण पुत्र ! आपका कोटी कोटी धन्यवाद हमारे मूलनिवासी बहुजनो के समक्ष यह साबित करने के लिये की मूलनिवासी शब्द से ब्राह्मण वाक़ई दहशत में है ….
…. कि जब जब ब्राह्मण और उसके संस्कृति का विदेशीपन उजागर होता है तब तब वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है।
हे उल्लू के पट्ठेव ब्राह्मण पुत्र !! इस ख़बर को अति शीघ्र वायरल किया जाय….:)
वीडियो में राहुल किसी दूसरे लेखक द्वारा लिखी गई डॉ भीमराव अंबेडकर की किताब का जिक्र करते हुए दावा करता है कि डॉ अंबेडकर ने कभी नहीं माना कि बहुजन लोग इस देश के असली मूलनिवासी है।
वहीं मनीषा बांगर ने एक और कमेंट में लिखा है कि ‘हमें लगता था कि ब्राह्मण को जब जब विदेशी बोलो वह दिमाग़ी संतुलन खो बैठता है…मगर अब यह यकिन है कि इनके पास दिमाग़ ही नही होता…सिर्फ़ कपट होता है’
बेबुनियाद और निराधार तथ्यों का जिक्र करके ऐसे लोग समाज में भ्रांतियां फैलाकर इतिहास को बदल कर सच छुपाने की कोशिश करते हैं।
ऐसे में सवाल इस बात का है कि इस तरह की फेक न्यूज बनाकर समाज में गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ आखिर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्यों ऐसे लोगों में कानून और सिस्टम का कई खौफ नहीं होता? आखिर किसका सरंक्षण मिलता है ऐसे लोगों को ?
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