خدا سے بڑھ کر ہے آئین بدھنما
کی طرف سے: نوال کشور کمار
इस बार लोकसभा को देखके मन हरियर हो गया नवल भाई। एकदम बदला-बदला है इस बार का संसद। आप देखे कि नहीं।
क्या देखना था यार बुधनमा। अच्छा यह बताओ कि आप इतने खुश क्यों हो रहे हो। मुझे तो अफसोस हुआ।
क्या बात करते हैं नवल भाई। देखे नहीं कि जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए बढ़े, पूरा सदन मोदी-मोदी और जय श्री राम के नारे से गूंज रहा था। मेरा तो मन एकदम एक्साइटेड हो गया। लगा कि बाबा साहब का संविधान एक झटका में फेंक के सब मनुस्मृति रख देगा संसद में।
यह अच्छी बात है कि अब तुम भी संसद की कार्यवाही देखने लगे। यह मेरे लिए संतोष का विषय है। कम से कम अब तुम वह सब देख रहे हो जो हर नागरिक को देखना और समझना चाहिए। लेकिन सच बताओ कि क्या तुम्हें मोदी-मोदी और जय श्री राम का नारा अच्छा लगा?
क्या बात करते हैं नवल भाई। आप हमको ऐसा ही समझते हैं। हम भी समझते हैं कि यह संसद धर्मनिरपेक्ष भारत का संसद है। यहां जयश्री राम और अल्लाहू-अकबर का क्या मतलब है। मैं तो यह देख रहा था कि मोदी मां के नाम पर कसम खाते हैं या फिर गोलवलकर के नाम पर। लेकिन उ तो ईश्वर के नाम का कसम खाये। नवल भाई क्या संसद में ईश्वर के नाम पर कसम खाने का प्रावधान है?
यह अच्छा सवाल है बुधनमा भाई। संसद में शपथ या तो संविधान के नाम पर लिया जा सकता है या फिर ईश्वर के नाम पर।
ऐसा काहे? संसद कोई मंदिर-मस्जिद-गिरजाघर-गुरूद्वारा थोड़े है कि कोई ईश्वर के नाम पर कसम खाए।
बात तो तुम ठीक कह रहे हो बुधनमा भाई। लेकिन ऐसा प्रावधान है कि यदि किसी को संविधान के नाम पर एलर्जी है तो वह ईश्वर के नाम पर शपथ ले सकता है। जबकि यह पूर्णतया गलत है। हमारा देश लोकतांत्रिक देश है और इसका अपना संविधान है। यह किसी ईश्वर का बनाया नहीं है। यह संविधान हमारे नेताओं ने बनाया है। संविधान है तो संसद है। ऐसे में संविधान ईश्वर से हर हाल में बड़ा है।
نیول بھائی, कल जिस तरह से ओवैसी को हूट किया गया, उसको आप देखवे किए होंगे। हमको तो लगा सब बीजेपी वाला लफंगा है। संसद में बैठे हैं कि चाय-पान के दुकान पर, सबको बुझैवे नहीं करता है। जय श्री राम और वंदे मातरम का नारा लगाकर क्या कहना चाहता था बेहूदा सब।
हां यार बुधनमा, कल संसद में यह सबसे खराब दृश्य था। किस तरह भारत की धर्मनिरपेक्षता का मजाक उड़ाया जा रहा था। ओवैसी ने भी उसी भाषा में जवाब दिया। लेकिन उसने यह कहकर नहले पर दहला मारा कि जय भीम, अल्लाहू अकबर, जय भीम। वैसे यार यह भी गलत है। ओवैसी को इसका विरोध करना चाहिए था। उन्हें कहना चाहिए था कि भाजपा के सभी सांसद माफी मांगें तब वह शपथ लेंगे। यह गलत था। इसका विरोध किया जाना चाहिए था।
हेमा मालिनी वाला सीन देखे कि नहीं आप?
क्या यार बुधनमा, अब हम हेमा मालिनी को देखें, कैटरीना और दीपिका बुढ़ी हो गयी हैं क्या? छोड़ो, मैं मजाक कर रहा था। हेमा मालिनी का राधे-राधे वाला डायलॉग पहले से तय था। हीरोइन है हेमा मालिनी, हीरोइने रहेगी। नेता थोड़े बन जाएगी।
अच्छा यह बताइए नवल भाई कि कल संसद में सबसे अच्छा दृश्य कौन सा था? हम भी तो समझें कि आपको क्या अच्छा लगता है?
بدھ کو آدمی, तुम्हारा यह अंदाज ठीक नहीं है। हम पत्रकार आदमी हैं। क्या अच्छा क्या बुरा। मोदी और उसके संगी-साथी संसद में लंगटे नाचे तब भी खबर और न नाचे तब भी खबर। हमारा क्या है। हमको न तो कुछ अच्छा लगता है और न खराब। यह तय करना देश की जनता को है और उसी को भुगतना भी है। लेकिन जब तुमने पूछ ही लिया है तो एकदम मन की बात बता रहे हैं। सीपीआई के सांसद के. सुब्बारयन ने जब शपथ लिया तब मजा आ गया। मुझे पूरे सदन में वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति लगे जिन्हें भारत के संविधान और लोकतंत्र में आस्था है।
ऐसा क्या कह दिया उन्होंने नवल भाई?
بدھ کو آدمی, کی. सुब्बारयन ने अपने शपथ का अंत यह कहते हुए किया कि Long live Secularism, Long live India.
मतलब क्या है इसका नवल भाई?
बहुत सुंदर है इसका मतलब। धर्मनिरपेक्षता जिंदाबाद, भारत जिंदाबाद।
एक बात है नवल भाई। इस देश का मोदी हो फोदी कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। यह देश के. सुब्बारयन जैसे सांसदों का भी है। आपका भी है और मेरा भी। मिट जाएंगे भारत के संविधान को मिटाने की बात कहने वाले। हम आपसे कह रहे हैं नवल भाई। याद रखिएगा।
हां यार बुधनमा। यही विश्वास तो लोकतंत्र की बुनियाद है।
مصنف- نیول کشور کمار, سینئر صحافی, فارورڈ پریس, ہندی. نوال کشور جی بھی اپنے مضامین کے ذریعے نیشنل انڈیا نیوز کو مسلسل اپنی خدمات فراہم کر رہے ہیں۔
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مولانا ابوالکلام آزاد, مولانا آزاد کے نام سے بھی جانا جاتا ہے۔, ہندوستان کے نامور اسکالر تھے۔, آزادی…






