گھر رائے وزیر اعظم کو کھلا خط 'مودی نے نہ صرف اپنا بلکہ وزیر اعظم کے عہدے کا بھی مذاق اڑایا ہے۔’
رائے - سماجی - حالت - دسمبر 9, 2017

وزیر اعظم کو کھلا خط 'مودی نے نہ صرف اپنا بلکہ وزیر اعظم کے عہدے کا بھی مذاق اڑایا ہے۔’

پیارے وزیر اعظم,

آپ کو اپنی بات پر کچھ کنٹرول رکھنا چاہیے۔ آپ 19 جیت یا یہ ممکن ہے؟ 24 بھی, لیکن نقصان اس ملک کو ہو رہا ہے۔, उसे आने वाले प्रधानमंत्री भी भर नहीं पायेंगे। राजस्थान में जो आज घटना हुई है, वो किसी इंसान की हत्या मात्र नहीं है, بلکہ یہ سماجی ہم آہنگی کا قتل ہے۔ اس ملک سے آزاد 70 सालों की छोटी-मोटी उपलब्धियों की हत्या की क्रूर शुरुआत है। याद रखिएगा प्रधानमंत्री जी, जो नफ़रत का बीज बोया जा रहा है और आपके भाषणों की उसमें जो भूमिका है; उसका कोई ‘तटस्थइतिहासकार भी बहुत निर्मम मूल्यांकन करेगा, वो ममत्व के कण आख़िर कहां से ला पाएगा!

 

ख़याल रहे, जिस-जिस ने इस देश में आग लगाई है, एकाध अपवाद छोड़कर सबका बड़ा ही दु:खद अंत हुआ है, अटल जी बरसों से मृत्युशय्या पर पड़े हैं और आडवाणी जी की मन:स्थिति से हर कोई वाकिफ़ है। जोशी जी स्थानी मौन में चले गए हैं। सबने इस देश को तोड़ने का बीड़ा उठा रखा था। तो, आप यह भ्रम मत पालिएगा कि आप अपवाद ही हों। सब यहीं रह जाएगा। रहम कीजिए इस देश पर, बख़्श दीजिए इस समाज को। आप चले जाएंगे आग लगाकर, पर बुझाने वाले पानी कहां से लाएंगे? इंसानियत के कुएं में कूड़ा डलवाकर आपने ढंकवा दिया है। अफ़सोस कि आज आपको डांटने के लिए संसद में कोई चंद्रशेखर, कोई भूपेश गुप्त, कोई मधु लिमये नहीं है, जिनकी डपट आपके गुरुदेव द्वय भी सर झुका कर सुन लेते थे, और आंशिक ही सही, अमल में लाने का भरोसा तो दिलाते थे। आपने तो संसद को ही निलंबित अवस्था में डाल दिया है जिसके साथ जनहित के मुद्दे हवा में लटके हुए हैं। अपने ‘मन की बातको आपने संसदसत्र का पर्याय या स्थानापन्न बना दिया है। यह ठीक नहीं कर रहे आप, प्रधानमंत्री जी।

 

एक तरफ आप मौनव्रत साधे रहते हैं, دوسری طرف 'سائیکو پیتھ'’ قاتلوں کا ریاستی تحفظ’ के बल पर तांडव करते रहते हैं। हिंदुस्तान की सारी गायों को आप अपने प्रधानमंत्री आवास में रख लें या गुजरात में अपने मित्र उद्योगपतियों को दे दें, प्रबंधन में माहिर अपने अध्यक्ष से कहें कि अडानी या अंबानी के घर बांध आएं, कुछ तो व्यवस्था करें। नहीं चाहिए हमें गाय-माल। इन गायों ने हमारे जानमाल की बहुत क्षति कर दी है। निरीह, निरपराध लोगों का जीना हराम कर रखा है। अलौली के मेरे गांव स्थित घर में चार गायें हैं, आप बिहार भाजपा के अपने अध्यक्ष नित्यानंद राय से कहें कि वो हमारे खूंटे से खोलकर ले जाएं। कुपोषण का शिकार हमारा परिवार बिना दूध के भी स्वस्थ रह लेगा, पर अपने अक्लियत भाइयों-बहनों का ख़ून होते नहीं देख सकते।

 

दस-दस गाय सरदाना-चौधरी-अंजना-रुबिया-चौरसिया-रजत-गोस्वामी-चौरसिया, आदि के यहाँ बंधवा दीजिए। यही लोग गोभक्त भी हैं और देशभक्त भी, انہی لوگوں کو ملک کی سمجھ ہے۔ جو گائوں میں سکون سے رہنا چاہتے ہیں، ان شور مچانے والے اینکروں کے ایجنڈے سے بے خبر۔; वो सब ‘जाहिलहैं और आपके ‘नेशन फ़र्स्टके प्रोजेक्ट में बाधक हैं। मिटाना चाहें, तो मिटा दें इन्हें अपनी इमेजिनेशन से, पर इतनी बेरहमी से घुटा-घुटा कर इन्हें जीते जी क्यों मार रही है आपका कट्टर समर्थक होने का दावा करने वालों की टोली। क्या आप इतना सब देखने के बाद भी चैन की नींद सो लेते हैं? माफ़ कीजै कि बहुतों को इंसोमनिया हो गया है, पर दूर-दूर तक कोई राहत और हल नज़र नहीं आते।

 

وزیر اعظم, سب سے بڑا نقصان جو اس جمہوریت کو ہوا ہے وہ آپ کی آمد کا ہے۔, वो ये कि पहली बार लोगों ने प्रधानमंत्री को गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। ऐसा तो देवगौड़ा जिन्हें झूठा ही कमज़ोर प्रधानमंत्री के रूप में प्रचारित किया गया; के साथ भी नहीं था। आज लोग चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं, यह कोई अच्छी बात तो नहीं। लोगों ने न्यायपालिका तक की मंशा पर संदेह करना शुरू कर दिया है। ऐसा मत कीजिए प्रधानमंत्री जी।

 

सेक्युलरिज़म का मज़ाक उड़ाते-उड़ाते आपने ख़ुद को ही नहीं, प्रधानमंत्री नामक संस्था को मज़ाक का विषय बना दिया है। यह सब बहुत दु: میں آج یہ بات بغیر کسی غصے کے آپ پر اداس دل سے کہہ رہا ہوں۔ میں اپنے آپ سے ناراض ہوں۔

 

تم اکیلے نہیں ہو جو مجھ سے ناراض ہو۔

मैंने जो संग़ तराशा वो ख़ुदा हो बैठा।

शुक्रिया ऐ मेरे क़ातिल ऐ मसीहा मेरे

ज़हर जो तूने दिया था वो दवा हो बैठा।

 

भवदीय,

जयन्त जिज्ञासु

-यह लेख हमें जेएनयू के छात्र जयन्त जिज्ञासु ने भेजा है जो मीडिया स्टडी कर रहे हैं।

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