घर सामाजिक राजकारण मध्य प्रदेश: 5 शंकराचार्यांनी बाबांना मंत्री बनवणे ही स्वार्थी चाल म्हटले आहे
राजकारण - एप्रिल 5, 2018

मध्य प्रदेश: 5 शंकराचार्यांनी बाबांना मंत्री बनवणे ही स्वार्थी चाल म्हटले आहे

बाबांना राज्यमंत्रिपदाचा दर्जा देणाऱ्या मध्य प्रदेश सरकारवर सर्वत्र टीका होत आहे. आता निषेधाचा आवाज शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती यांच्याकडून आला आहे. याला त्यांनी सरकारचे स्वार्थी पाऊल म्हटले आहे. स्वरूपानंद म्हणाले- सरकार उन लोगों को यह पद देती है जो सम्मानजनक होते हैं और जो लोगों की आध्यात्मिक तौर पर मदद करते हैं। लेकिन सरकार ने अपने स्वार्थी कारणों की वजह से उन लोगों को यह पद दिया है जिन्हें लोग जानते तक नहीं हैं। यह नहीं होना चाहिए।

बता दें कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कंप्यूटर बाबा सहित पांच संतों को मंत्री पद का दर्जा दिया है। कंप्यूटर बाबा के साथ इंदौर के भय्यू महाराज, अमरकंटक के हरिहरानंदजी, दिंडोरीतील नर्मदानंदजी आणि पंडित योगेंद्र महंत यांना राज्यमंत्रिपदाचा दर्जा देणारा आदेश राज्य सरकारने मंगळवारी जारी केला. या निर्णयानंतर सरकार आणि मुख्यमंत्र्यांच्या निर्णयांवर प्रश्न उपस्थित केले जात आहेत.

रामबहादुर शर्मा नाम के एक व्यक्ति की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने राज्य मंत्री की संवैधानिकता को लेकर याचिका लगाई है। सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। इतना ही नहीं फैसले के कारण बाबाओं के रुख में भी अचानक बदलाव आया है। कल तक जिन पांचों संतों ने शिवराज सिंह चौहान द्वारा पिछले साल नर्मदा किनारे लगाए गए पौधों और अन्य विकास कार्यों की ‘पोल’ खोलने के लिए ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया था अब मंत्री पद की हैसियत मिलने के बाद इन्होंने अपनी पूर्व की घोषणा से कदम पीछे खींच लिए हैं। अब ये सभी बाबा जनजागरण करने की बात कर रहे हैं।

 

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