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کی طرف سے- نوال کشور کمار

आज भोरे-भोरे एतना काहे चवनिया मुस्की मार रहे हो बुधनमा भाई। कोई खास बात है का? आउर दिन तो मुंह से ताड़ी के बास आता रहता है।

आप भी न नवल भाई। आप एक नंबर के चालू आदमी हैं। हमको खुश होने का एको गो मौका नहीं देना चाहते हैं। आज का खबर नहीं देखे।

कौन सी खबर बुधनमा भाई। नयका सरकार ने आते ही काम कर दिया। तीन तलाक वाला जो कानून है, उसको कैबिनेट ने पास कर दिया है। अब सब मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की रक्षा हो सकेगी। इ काम तो ठीक किया है ई मोदी। अब तो रामराज आ ही गया।

बुधनमा भाई। आप न एक नंबर के मासूम इंसान हैं। इसमें आपकी कौनो गलती नहीं है। असल में भारत के लोगों को ऐसा ही बनाकर रखा गया है। पहिले तो इ जान लो कि हिंदू विवाह अधिनियम की तुलना में मुस्लिम विवाह अधिनियम अधिक बेहतर रहा है। तुम तो जानते ही हो कि इस्लाम में तलाक के लिए तीन बार तलाक-तलाक बोलना पड़ता है। वह भी सार्वजनिक रूप से और एक नियत अंतराल पर। काजी आता है। गांव समाज के लोग बैठते हैं। दोनों पक्ष अपनी बात रखते हैं। तब जाकर कहीं तलाक होता है। यह तो एक डेमोक्रेटिक प्रोसेस है। वहीं अपने ब्राह्मण धर्म में देख लो। बिना तलाक कहले दशरथ कौशल्या के अलावा सुमित्रा और कैकेयी से बियाह कर लिए थे कि नहीं। दशरथ को छोड़ो। आज की बात करते हैं। अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शादीशुदा हैं। यह तो जानते ही हो और यह भी कि उन्होंने अपनी पत्नी को विधवा की तरह रहने पर मजबूर किया हुआ है। वह महिला तो कुछ कर भी नहीं सकती। तब तुमही बताओ तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं के हकों की रक्षा हुई या उनके लोकतांत्रिक अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है? तुम इसको ऐसे समझो कि राम तक ने अपनी पत्नी सीता के मौलिक अधिकार का हनन किया। बस एगो कोई कुछ बोल दिया कि सीता चरित्रहीन है तब बिना सच जाने राम ने घर से बाहर निकाल दिया था। सोचो यदि ब्राह्मण धर्म में भी तीन तलाक का सिस्टम होता तो क्या राम इतना आसानी से सीता को घर से बाहर निकाल पाता।

बाप रे। आप का दिमाग है। कहां से कहां पहुंच जाते हैं। आप तो रामराज पर सवाल उठाने लगे।

बुधनमा भाई। जरा ध्यान से समझो। रामराज ही जंगलराज है। राम ने जिनको मारा, उन सबको तुम जानते ही हो। फिर चाहे ताड़का जैसी महान दयालु स्त्री की हत्या हो जो प्रकृति पूजक थी। वह पर्यावरण की रक्षा करती थी। जंगली जानवरों तक से उसे प्रेम था। राम ने उस दयालु महिला की जान ली। फिर बालि की हत्या कर राम ने कौन सा पुण्य का काम किया था? आउर उसके पहले शूर्पनखा के नाक-कान काटकर राम ने कौन सा मर्यादा पुरषोत्तम होने का नमूना पेश किया था। हद है यार बुधनमा। एक काम करो। पेरियार की सच्ची रामायण पढ़ो। सब लिखा है उसमें। खाली तुलसीदास जैसा माला फेरते रहते हो रामराज की। शंबूक को तो जानते हो न? उसको राम ने क्यों मार दिया था? उसका कसूर खाली एतना था कि वह शूद्र होकर भी वेद पढ़ता था, तपस्या करता था।

ए नवल भाई। आपकी बात समझ में तो आती है। लेकिन देश और समाज की भावना का ख्याल भी तो रखा जाना चाहिए। जब सबकोई राम का नाम जपता है तब हम काहे न जपें। हमरा तो छोड़िए कबीर और गांधी तक राम का नाम जपते थे।

सही बोल रहे हो बुधनमा भाई। लेकिन कबीर का राम वह राम नहीं था जो हाथ में तीर-धनुष लेके लोगों बिना किसी गुनाह के मार डालता था। कबीर का राम तो निराकार था। गांधी का राम डिप्लोमैटिक था गांधी की तरह। वह वैष्णव था। उसने तो कहा है कि वैष्णव जन तो तेने कहिए, पीड़ पराई जाने रे। भाई मैं तो सबकी पीड़ा समझता हूं और लोगों की सहायता भी करता हूं। लेकिन मैं वैष्णव नहीं हूं। वैष्णव होने का मतलब विष्णु का वंशज होना। अब विष्णु ने क्या-क्या गुल खिलाया है। पढ़े हो कि नहीं।

कौन बात नवल भाई।

अरे यही कि समुद्र मंथन के बाद मिले अमृत कलश को अनार्यों से छीनने के लिए विष्णु ने छलपूर्वक मोहिनी का रूप धरा था।

हे भगवान। आप को श्राप लगेगा। कोई देवी-देवता के ऐसे बोलता है जी। राम-राम

بدھ کو آدمی, तुमको लगता होगा कि तुमको मैं क्यों समझाता हूं।

हां लगता तो है। लेकिन इतना जानते हैं हम कि आप कोई बात गलत नहीं बोलते हैं। आप हमको ही रोज काहे सुनाते हैं। काहे नही नरेंद्र मोदी को समझाते हैं। उ समझ जाएंगे तो देश का कल्याण हो जाएगा।

तुम भी न गजब बात करते हो यार बुधनमा। नरेंद्र मोदी बुढ़ सुग्गा है। आरएसएस के सिखावल-पढ़ावल है। अब का समझेगा। एगो खबर आउर जान लो। कोई मीडिया वाला नहीं लिखेगा कि पाकिस्तान ने नरेंद्र मोदी को अपनी वायु सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी।

क्या बात कर रहे हैं आप? पाकिस्तान की इतनी हिम्मत कि वह हमारे पीएम को जाने न दे।

सच कह रहे हैं। पहले पीएमओ ने पाकिस्तान सरकार से अनुरोध किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कजाकिस्तान जाना है एक सम्मेलन में जहां उनकी मुलाकात पुतिन से लेकर इरान और चीन के राष्ट्रपति तक से होगी। नरेंद्र मोदी जी को पाकिस्तान की वायु सीमा से होते हुए जाने दिया जाए।

फिर क्या हुआ नवल भाई?

होना क्या था। पाकिस्तान ने साफ मना कर दिया।

जाए दिजीए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर कोई हमला करके बदला ले लेंगे। लौटकर आने दें। हम तो आपके जैसा नहीं हैं। सच-झूठ का अंतर नहीं जानते हैं। जैसा मीडिया वाला सब लिखेगा, वैसे ही समझेंगे। इसमें आपका कोई दोष नहीं है।

छोड़ो बुधनमा भाई। आउर सब घर परिवार में ठीक है न?

कहां ठीक है। मेहरारू कह रही है दिल्ली में रहेला। उ का है कि वहां अरविन्द केजरीवाल सब स्कूल ठीक-ठाक कर दिहिन हैं और अब मेट्रो में सब जनाना बिना टिकट सफर सकेंगी। रामराज तो इ है न नवल भाई?

हां यार बुधनमा। लेकिन दिल्ली जाना समस्या का समाधान नहीं है। समाधान यह है कि देश का हर शहर दिल्ली जैसा हो। स्वास्थ्य, تعلیم,रोजी-रोजगार और परिवहन की व्यवस्था एक जैसी हो। मैं इसको रामराज तो नहीं लेकिन आदर्श राज जरूर कहूंगा।

مصنف- نیول کشور کمار, سینئر صحافی, فارورڈ پریس, ہندی. نوال کشور جی بھی اپنے مضامین کے ذریعے نیشنل انڈیا نیوز کو مسلسل اپنی خدمات فراہم کر رہے ہیں۔

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