राज्यसभा पहुँचकर जनता की आवाज क्यों नहीं बन पाए क्रिकेट में नाम कमाने वाले सचिन?
द्वारा: Ankur Sethi
विमर्श: सचिन तेंदुलकर आप क्रिकेट के कथित भगवान हो सकते हो, लाखों-करोड़ों क्रिकेट फैंस की जान हो सकते हो। पर मैं यह जरूर जानना चाहूँगा की क्रिकेट में बेसुमार नाम, दौलत, शोहरत के बाद जब जनता का प्रतिनिधि/राज्यसभा सांसद बनकर संसद भवन गए तो आपने अपने देशवासियों के लिए कितने मुद्दे उठाए?
140 करोड़ जनंसख्या वाले विशाल भारत में गरीबी, भुखमरी, रोजगार, स्वास्थ्य ,जनसंख्या वृद्धि की समस्या, महँगाई और भ्रष्टाचार की समस्या, असाक्षरता/अशिक्षा, बाल-विवाह, बाल श्रम, जातिवाद की समस्याएं गाँवों, कस्बों से लेकर शहरों तक जड़ के भीतर आज भी घुसी हैं।
इन समस्याओं से सचिन तेंदुलकर आप अनभिज्ञ नहीं हो सब जानते हो! आपकी आवाज उठती तो करोड़ों-अरबों तक सुनी जाती आप कोई मिशन, जनआंदोलन करते छात्रों, किसानों, बेरोजगारों के हित में तो लाखों का रैला आपके पीछे होता पर आपने कुछेक सवालों को छोड़कर कुछ ऐसा नहीं किया जिससे भारत वर्ष समाज के लिए आपके दिए को याद रख सके, जैसे अन्य नेताओं ने उम्मीदों को गड्ढे में दबा दिया वैसे ही आपने किया है सचिन तेंदुलकर।
आप अच्छे क्रिकेटर माने जाएंगे पर जनता की आवाज न उठाकर अच्छे जननेता कभी नहीं, आपने 140 करोड़ देशवासियों के दर्द की आवाज कभी संसद में नहीं सुनाई और यह टीस मुझे हमेशा सालती रहेगी भारत रत्न सचिन तेंदुलकर…..
मौलाना आज़ाद और उनकी पुण्यतिथि को याद करते हुए
मौलाना अबुल कलाम आजाद, मौलाना आजाद के नाम से भी जाने जाते हैं, एक प्रसिद्ध भारतीय विद्वान थे, freedo…






