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International - Opinions - Social - March 24, 2018

भगत सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाई पर आज के वॉइस राय के खिलाफ कोई भगत सिंह क्यों पैदा नहीं हो रहा?

By: Kaushar Ali Sayyed

विमर्श। खास करके गुजरात के जो एक्टिविस्ट, एनजीओज, सोशल वर्कर और सिविल सोसायटी के लोग हैं उन्हें कोई हक नहीं है कि कुछ बोलें। उनको क्या लेना-देना है भगत सिंह से भगत सिंह की लेगेसी को किस तरह से ओनर किया गया हम लोगों ने, चाहे सेकुलरिज्म के लेवल पर हो या स्ट्रगल के लेवल पर हो। भगत सिंह के दौर में उन्होंने क्या-क्या कर दिखाया किस तरह की हिम्मत दिखाई, एसेंबली से लेकर साइमन कमीशन के विरोध से लेकर जनरल डायर से लेकर सिक्योरिटी बिल और मजदूरों के कानून को लेकर उसे याद करके वैसा ही आंदोलन आज इसकी जरूरत बन चुकी है।

यहां के एक्टिविस्ट सिविल सोसाइटी वाले और एससी-एसटी, मुस्लिम क्या कर रहे हैं। बहुजनों में तो थोड़ी जान आई है बहुजन आंदोलन के चलते बाकी सारे रस्मअदायगी कर रहे हैं कर्मकांड कर रहे हैं एक तरह का रिचुअल कर रहे हैं। उनको और हम सब को सेल्फ इंट्रोस्पक्शन करना चाहिए अपने गुनाहों का प्रायश्चित करना चाहिए। ऐसे हालात क्यों हो गए? भगतसिंह की तरह कोई और आइकॉन क्यों नहीं ढूंढ पाए? या क्यों पैदा ना कर पाए?

भगतसिंह ने अंग्रेजों के बनाए काले कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी मगर आज के सियासत में बैठे वॉइस रॉय के कानून के खिलाफ कोई भगतसिंह पैदा क्यों नहीं हो रहा? आज के दौर में भी वॉइस रॉय की तरह जनता को लूटने के लिए नोटबंदी, जीएसटी, एजुकेशन बिल और जमीन अधिकरण जैसे जनता को लूटने वाले बिल, कानून और एमेंडमेंट किए जा रहे हैं और सारे जनता और आंदोलन के झंडाबरदार मुर्दा शांति से चुप्पी साधे हुए हैं। यहां के लोगों को ट्रिपल तलाक, बाबरी और राम जन्मभूमि, पीआईएल, एट्रोसिटी, जाति और धर्म से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

आजकल एक नया ट्रेंड शुरू हो रहा है देश के आइडलॉग के खिलाफ एक कैंपेन चलाया जा रहा है RSS और उनकी साथी मंडलियों के द्वारा और उसमें एससी,एसटी, मुस्लिम और पिछड़े भी उनकी बातों में आकर भगतसिंह, चंद्रशेखर, बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों को आतंकवादी बताने पर पिल पड़े हैं। साथियों हम भगतसिंह को क्यों याद कर रहे हैं? कर्मकांड करने या बात करने के लिए? अगर हम सही में उनसे प्रेरणा लेना चाहते हैं तो ऐसे निकम्मे लोगों को चुप कराना चाहिए।

आज के दौर में इतनी ज्यादा अपॉर्चुनिटी है इतना सारा वैक्यूम बन गया है नई लीडरशिप के लिए और हम सेल्फ गोल कर रहे हैं। गुजरात के लोग भगत सिंह को याद करें यह बात हजम नहीं होती। जो लोग लड़ नहीं सकते, हमने 2002 में भी देखा था जो लड़ रहे थे वह ज्यादातर गुजरात के बाहर के लोग थे। जिसमें मुख्यत्वे मुकुल सिन्हाजी शबनम हाशमीजी तीस्ता सीतलवाड़ वगेरा। बाद में जाकर रिहैबिलिटेशन मैं गुजरात के लोगों ने बहुत काम किया लेकिन लड़ाई के मैदान में लीगल लड़ाई में भाजपा और उसकी पिछलग्गू संस्थाओं के सामने मुखर होकर नहीं लड़ पाए।

एससी-एसटी वर्ग के लोगों पर जब लाठियां भांजी गई और मास बाहर निकल कर आया उसमें जिग्नेश जैसा नेता पैदा हुआ। मगर 2002 में इतने सारे लोग मारे गए और लड़ने की क्षमता नहीं तो कहां से इंकलाब आएगा। सब लोगों ने धर्म के नाम पर लोगों को उल्लू बनाने के अलावा कुछ नहीं किया। ठीक उसी तरह जब खिलाफते अब्बासी का आखरी दौर था तब बगदाद में सारे लोग आपस में बहस मुनाजरा करते थे डिबेट करते थे कि सुई की नोक पर कितने फरिश्ते होते हैं मिस्वाक 1 बिल्लस की होनी चाहिए? क्या कौवा हमारे लिए हलाल है या हराम है? पजामे की लंबाई टखने के नीचे होनी चाहिए कि ऊपर होनी चाहिए? दाढ़ी कितनी लंबी होनी चाहिए? इस पर चारों तरफ बहस हो रही थी तभी हलाकू खान की तातारी की फौज ने बगदाद पर धावा बोल दिया और सारे मुसलमानों का कत्लेआम कर दिया। मिस्वाक की हुरमत बचाने वालों की बोटी-बोटी हो गई। सुई की नोक पर फरिश्तों की गिनती गिनने वालों की खोपड़ी आंखों की मीनारें बन गए। कौवे की गोश्त पर बहस करने वालों के जिस्म की रोटियां कौवे नोच रहे थे। आज के दौर के हलाकू खान एक-एक करके मुस्लिम मुल्कों को नेस्तनाबूद कर रहे हैं। अफगानिस्तान से लेकर इराक से लेकर लीबिया से लेकर सीरिया तक बच्चे और बुजुर्गों की लाशों की गिनती करने वाला कोई नहीं है। और तो और बेटियों की अजमत बचाने के लिए उम्मत की चादर का कोना तलाश रही है। और हम ख़ामोशी से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

भगतसिंह को याद करने का मतलब है अपने अधिकार के बारे में सीधे सीधे बात करना भगतसिंह की अंग्रेजों को खदेड़ने की बात करते थे और आज की सरकार है हमारे आपके रिसोर्सेज को लूट रही है उनके सामने मोर्चा खोलने और आंदोलन की जरूरत है। पता करने की जरूरत है कितने सियासतदानों के तार जुड़े हैं अडानी और अंबानी के साथ हिंदुस्तान के सारे MLA और MP के तार इन्हीं सामंतवादी लोगों के साथ जुड़े हैं जब तक यह तार गरीब शोषित और वंचित के साथ नहीं जुड़ेंगे तब तक क्रोनी कैपिटलिज्म के चलते जनता को लूटा जाता रहेगा। हम यह नहीं कहते के एंटरप्रेन्योरशिप नहीं होनी चाहिए होनी चाहिए लेकिन इमानदारी से भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए तभी देश का भला हो सकता है।

हम गांधी और नेहरू की कांग्रेस का क्रिटिसिज्म नहीं करते क्योंकि उनके ही बदौलत इस देश में सेकुलरिज्म बचा हुआ है। और मुसलमान ने इन्हीं को देख कर हिंदुस्तान में रहने का फैसला किया था लेकिन इसका मतलब कतई यह नहीं है कि आज की कांग्रेस सेकुलरिज्म पर चल रही है। उनके खिलाफ भी कोई न कोई किसी न किसी को बोलना पड़ेगा क्योंकि भाजपा और कांग्रेस में ज्यादा फर्क नहीं है। वैसे भी भगत सिंह को कांग्रेस पर यकीन नहीं था कि कांग्रेस के चलते हिंदुस्तान को पूर्ण स्वराज मिल पाएगा तभी तो भगत सिंह लाला लाजपत राय के साथ में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ज्वाइन की थी। गुजरात में राज्य सभा के इलेक्शन के वक्त कांग्रेस के 16 MLA बीजेपी के खेमे में चले जाते हैं। MLA तो MLA इनका सीएलपी लीडर भी भाजपा के साथ में जा मिलता है। वैसे भी कांग्रेस के कंपोस खाद के कचरे में तो कमल खिला है। कांग्रेस के गंदे गर्भ में से BJP का जन्म हुआ है। कम्युनिटी में इतने अनपढ़, जाहिल, भड़वे और दलालों की फौज है कि कुछ करने की जरूरत ही नहीं है। अब तो ग्राउंड पर लड़ने की जरूरत है स्ट्रगल करने की संघर्ष करने की जरूरत है जनता को अब भाषण की जरूरत नहीं है, सीधे – सीधे संघर्ष के मैदान में उतरने की जरूरत है तब ही आप को कोई रोक नहीं पायेगा। यही सबसे आसान तरीका है। भाषणों की दुकान विधानसभा और लोकसभा में रहने दो अब आधे घंटे का धरना और ढाई घंटे की क्रांति से काम नहीं चलने वाला लंबी और ठोस लड़ाई लड़नी होगी भगतसिंह जैसे क्रांतिकारियों की तरह।

दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फ़त

मेरी मिट्टी से भी खुशबू – ए – वतन आएगी।

 

-कौशरअली सैयद

हमारी आवाज

दलित मुस्लिम एकता मंच

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