घर आंतरराष्ट्रीय राजकीय उन्नाव:शूर मुलगी मृत्यू झाला,सरकार कायदा भीती वाटते, ती एम्बेड सांगितले
राजकीय - सामाजिक - डिसेंबर 7, 2019

उन्नाव:शूर मुलगी मृत्यू झाला,सरकार कायदा भीती वाटते, ती एम्बेड सांगितले

उन्नाव बलात्कार शुक्रवारी रात्री बळी 11.40 AM मृत्यू झाला. बळी 95 प्रति charred अट गुरुवारी रात्री प्राप्त गेला आणि दिल्ली येथे सफदरजंग हॉस्पिटलमध्ये उपचार सुरू होते. उन्नाव मध्ये गुरुवारी सकाळी 5 त्यावर पेट्रोल ओतून नंतर जाळला आरोपी. मुख्य एका महिलेच्या सामूहिक बलात्कार आरोपी त्याची हल्लेखोरांना पोहोच गळफास फाशी पाहण्यासाठी त्याच्या इच्छा पूर्ण होत गेला आरोपी. काहीही म्हणू किंवा अट सांगू त्यामुळे नंतर वाईट रीतीने साधारणपणे कोणतीही व्यक्ती संपते जळत. लेकिन ये बहादुर बेटी अपने गहरे जख्मों से लड़ रही थी. क्योंकि उसे अस्पताल से निकल इंसाफ की बड़ी से बड़ी लड़ाई लड़नी थी.

उन्नाव की बेटी इन्हीं आखिरी अल्फाज के साथ हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो गई. 24 घंटे तक मौत से जूझते-जूझते उसकी सांसें बोझिल हो गई थीं. आखिरकार शनिवार रात 11 वाजत आहे 40 मिनट पर इंसाफ की अधूरी चाहत के साथ ही वो दुनिया छोड़ कर चली गई. सफदरजंग अस्पताल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. शलभ कुमार बताते हैं. कि हमारे इतने प्रयासों के बावजूद भी पीड़िता को बचाया नहीं जा सका और शाम में ही उसकी हालत खराब होनी शुरू हो गई थी. रात 11.10 बजे उसे कार्डियक अरेस्‍ट आया. हमने इलाज शुरू किया और उसे बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन रात को 11.40 बजे उसकी मौत हो गई.

डॉ. शलभ ने बताया कि फिलहाल पीड़िता के शव को मोर्चरी में भेज दिया गया है. अस्पताल में मौजूद पीड़िता की मां बहन और भाई को इसके बारे में बता दिया गया है. पीड़िता ने मरने से पहले अपने भाई से कहा था कि मैं जीना चाहती हूं. पीड़िता ने यह भी कहा था कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए. पीड़िता के भाई ने बताया कि वो जीना चाहती थी लड़ना चाहती थी, इंसाफ की जंग जीतना चाहती थी. इसलिए बार-बार पूछ रही थी कि मैं बच जाऊंगी ना, मैं मर तो नहीं जाऊंगी.बहन की बातें मीडिया के सामने बयां करते हुए भाई का मन भर आया था.

गुरुवार को जब हैवानों ने रेप पीड़िता को जिंदा जला डाला तो परिवार को लगा कि इंसाफ की लड़ाई अब कभी पूरी नहीं हो पाएगी. लेकिन अस्पताल में बेटी की हिम्मत और डॉक्टरों की मेहनत देखकर उम्मीद की एक महीन डोर उनका सहारा बनी लेकिन शुक्रवार रात सबकुछ चकनाचूर हो गया. गैंगरेप के गुनाह पर पर्दा डालने के लिए आरोपियों ने पीड़ित को जलाकर खाक करने की जो साजिश रची थी वो तो कामयाब हो गई. देश की एक और बेटी दरिंदगी के आगे हार गई. अब सवाल हमारी पुलिस, अदालत और सरकार के सामने है कि हैवानियत के बाद बच निकलने की ऐसी साजिश आगे भी कामयाब होती रहेंगी या मौत के बाद ही सही उन्नाव की बेटी की इंसाफ की चाहत पूरी होगी.

वही दूसरी तरफ मायावती ने ट्वीट कर में कहा कि इस किस्म की दर्दनाक घटनाओं को यूपी सहित पूरे देशभर में रोकने के लिए राज्य सरकारों को चाहिए कि वो लोगों में कानून का खौफ पैदा करें और केंद्र भी ऐसी घटनाओं को मद्देनजर रखते हुए दोषियों को निर्धारित समय के भीतर ही फांसी की सख्त सजा दिलाने का कानून जरूर बनाए.

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