Home Social Politics SP और BSP का गठबंधन, बीजेपी के गले की हड्डी !

SP और BSP का गठबंधन, बीजेपी के गले की हड्डी !

By- Aqil Raza

यूपी में फूलपुर और गोरखपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। एसपी से बीएसपी के हाथ मिलाने की खबर के बाद बीजेपी नेता बोखलाए हुए नजर आ रहा हैं। हालंकि मायावती का ये साफ कहना है कि गोरखपुर और फूलपुर विधानसभा सीटों पर वो उस पार्टी के साथ हैं जो बीजेपी को हराने में सक्षम दिखेगी। यानी ये बात तो साफ है कि वो समर्थन करने वाली है।

जिससे यूपी की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है, क्योंकि बीएसपी और एसपी की अगर हम बात करें तो पिछले चुनावों से ये साफ पता चलता है कि दोनों ही पार्टियां पिछड़े, बहुजन और मुस्लिम को साथ रखने के एजेंड़े पर चुनाव लड़ती आई हैं, जिससे कहीं न कहीं दोनों के वोट आपस में बंट जाते थे। अगर एसपी और बीएसपी एक साथ अपने लिए वोट मांगती है तो ये बीजेपी के लिए बड़ी खतरे की घंटी साबित होगी, क्योंकि 70 फीसदी अबादी पिछड़े मुस्लिम और बहजुन समाज की है। और शायद यही वजह है जो बीजेपी के लिए ये बात गले से नहीं उतर रही है।

वहीं बीजेपी ने भी अपना हिंदुत्व कार्ड खेलना शुरू कर दिया है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद के फूलपुर लोकसभा क्षेत्र की दो चुनावी सभाओं में होली के मौके पर जाकर अपना हिंदुत्व कार्ड खेला, जुमे की नमाज का वक्त बदले जाने का श्रेय अपनी सरकार को दिया. उन्होंने दोनों ही सभाओं में ये बात जोर देकर कही कि साल में एक बार पड़ने वाले होली के त्यौहार का सभी को सम्मान तो हर हाल में करना पड़ेगा. कहने के ढंग से ये झलक रहा था कि वो अपने किस अजेंडे को दर्शाना चाह रहे थे।

इतना ही नहीं सीएम योगी ने दोनों ही सभाओं में होली के त्यौहार और जुमे की नमाज़ की आपस में तुलना करते हुए कहा कि होली का महत्व इसलिए ज़्यादा है क्योंकि वो साल में एक बार पड़ती है. लेकिन जुमे का दिन तो साल में 52 बार आता है. उन्होंने इस बात का श्रेय लेने की भी कोशिश की कि उनके दबाव की वजह से ही इस बार होली का रंग खेलने का वक्त कम नहीं किया गया.

जबकि उनके इस बयान से पहले ही मुस्लिम हिंदू भाई चारे को बढ़ाने के लिए नमाज़ का वक्त पहले ही बढ़ाया जा चुका था, ताकि इसपर सियासत न हो सके लेकिन इसके बावजूद भी यूपी के सीएम ने उस एकता को भुलाते हुए, होली और जुमे की नमाज़ की तुलना करते हुए वाहवाही लूटकर लोगों को लुभाने की पूरी कोशिश की.

वहीं मायावती और अखिलेश के मिलाव को देखते हुए यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मायावती पर जोरदार निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मायावती अगर उपचुनावों में समाजवादी पार्टी को समर्थन करती है तो यह उनकी पार्टी का सपा में विलय की तरह होगा और विपक्षियों में नरेन्द्र मोदी हराओ प्रतियोगिता चल रही है।

इसके बाद बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने भी इस गठबंधन को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि कितने ही गठबंधन हो जाएं लेकिन भारतीय जनता पार्टी को कोई नहीं हरा सकता. बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के इकट्ठे होने पर बीजेपी को लाभ हो रहा है.

इसके बाद यूपी में बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने एक बार फिर मायावती पर जुबानी हमला बोला है. दयाशंकर ने इस बार मायावती को ‘हठी महिला’ करार दिया है. हाल ही में दोबारा प्रदेश बीजेपी उपाध्यक्ष बनने के बाद अपने गृह जिले बलिया में दयाशकंर ने कहा, ‘‘बीएसपी कोई दल नहीं, बल्कि ‘परचून की दुकान‘ है.” बीएसपी प्रमुख मायावती के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने पर साल 2016 में दयाशंकर को बीजेपी ने उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष के पद से हटा दिया गया था और पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था.

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. और अब फिर से वापस आने के बाद उन्होंने विवादित बयानबाजी शुरू कर दी है। अब ऐसे में क्या ये माना जाए की इन नेताओं को बीजेपी पार्टी सिर्फ इस तरह की विवादित भाषा का प्रयोग करने के लिए रखती है।

लेकिन ऐसे में देखने वाली बात ये है कि मायावती का सपा को समर्थन मिलने से बिजेपी के दांत खट्टे क्यों हो रहे हैं। इस गठबंदन की खबर आने के बाद से ही एक के बाद एक बीजेपी नेताओं के बयान आ रहे हैं, जिससे ये साफ ज़ाहिर होता है कि एसपी और बीएसपी का गठबंधन बीजेपी पचा नहीं पा रही है। इसमें सबसे ज़रूरी बात ये भी है कि इस गठबंधन के सामने बीजेपी का हिंदू कार्ड भी कही न कहीं फीका पड़ता दिखाई दे रहा है।

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