Home International मोहब्बत का महीना और नफरतों का दौर! वेलेंटाइन डे पर पढ़िए शानदार विमर्श
International - Opinions - Social - State - February 14, 2018

मोहब्बत का महीना और नफरतों का दौर! वेलेंटाइन डे पर पढ़िए शानदार विमर्श

By: Sushil Kumar

मोहब्बत का महीना चल रहा है और नफरतों का दौर चरम पर है। 14 फरवरी यानी कि वेलेंटाइन डे देश-दुनिया में आज प्रेम को बेहद खास तरीके से सेलिब्रेट करने का दस्तूर माना जाता है। भारत में कुछ लोग इसे पश्चिमी सभ्यता का नाम देकर विरोध करते हैं लेकिन तमाम सवाल हैं इस मोहब्बत और नफरत के बीच…कुछ ही दिन पहले दिल्ली में दूसरे मजहब की लड़की से प्यार करने की वजह से अंकित सक्सेना नाम के युवक का सरेआम गला काटकर कत्ल कर दिया गया।

28 अप्रैल 2014 में महाराष्ट्र के अहमदनगर में नितिन आगे नाम के युवक की प्रेम संबंधों के चलते हत्या कर दी गई। तमिलनाडू में अंतरजातिय विवाह करने की वजह से कौशाल्य नाम की बहुजन युवती और उसके पति शंकर को दिनदहाड़े हमला करके मौत के घाट उतार दिया गया था। हरियाणा में भी मनोज और बबली नाम के एक प्रेमी जोड़े की हत्या कर दी गई थी। बिहार में मुकेश और नूर जहां नाम के दो नाबालिगों को एक दूसरे को पसंद करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी। इसके अलावा और भी तमाम केस हैं जिनमें प्यार करने पर हत्याएं कर दी गई हैं।

क्यों प्यार को सिर्फ एक लड़का-लड़की के बीच का संबंध माना जाता है। जब किसी के प्यार का कत्ल होता है तो सिर्फ उस इंसान का नहीं बल्कि पूरी इंसानियत का कत्ल होता है। कभी कोई शंभू रैगर लव जिहाद का नाम देकर किसी अफऱाजुल को जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार देता है कभी इलाहाबाद में कानून की पढ़ाई कर रहे दिलीप कुमार की सिर्फ पैर छू जाने की वजह से हत्या कर दी जाती है तो कभी किसी अखलाक की बीफ के शक में पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है। कभी किसी जुनैद का मामूली सी बात पर ट्रैन में कत्ल कर दिया जाता है।

वेलेंटाइन-डे के मौके पर प्रेमी जोड़े चाहते हैं कि वो कहीं महफूज जगाह बैठकर अपने प्यार का इजहार करें, रिश्ते में विश्वास बढ़ाएं, किसी को एहसास दिलाएं कि कोई उसे इस नफरत की दुनिया में अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता है। लेकिन तथाकतिथ भगवाधारी धर्म का चोला पहन कर अपनी गुंडागर्दी की नुमाइश, करते हैं प्यार को संस्कृति पर हमला बताकर अपना खौफ पैदा करते हैं. आखिर कौन से समाज में जी रहे हैं हम जहां प्यार, मोहब्बत करना किसी गुनाह से कम नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि प्यार के दुश्मन ये नए है, प्यार का दुश्मन जमाना रहा है लेकिन फिलहाल के वक्त में कहीं न कहीं इन दुश्मनों को सत्ता का संरक्षण मिलता दिख रहा है। छेड़खानी से बचाने के लिए सरकार एंटी रोमियों टीम का गठन करती है लेकिन जो युवा उनसे सुरक्षा की उम्मीद करते हैं पता लगता है कि उसी पुलिस के खौफ से वो घर से बाहर निकलने से भी डरते हैं।

आखिर क्यों हैं इतनी प्यार पर पांबदियां, क्या एक बालिग लड़का-लड़की को प्यार करने का अधिकार नहीं? कानून तो ऐसा नहीं कहता कुछ ही दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि अगर लड़का-लड़की बालिग है और वो अपनी मर्जी से अपना जीवन साथ चुनना चाहते हैं तो इसमें कोई भी दखलअंदाजी नहीं कर सकता। लेकिन फिर यह गुंडागर्दी का माहौल बनाकर क्यों किसी की आजादी और अधिकारों पर पांबदी लगाने की कोशिश की जाती है?

बहराल नफरतें चाहे जहां जाए लेकिन मोहब्बतें कभी कम नहीं होंगी. मोहब्बत के दुश्मन चाहे जितना जोर लगा लें। मजहब और जाति की खड़ी दीवारों ने इस इंसानियत के बीच एक बहुत बड़ा फासला पैदा कर दिया है लेकिन मोहब्बत इंसानियत में बसती है और जिसके अंदर यह नहीं वो जानवर से भी बदत्तर है। लेकिन हमें सोचना चाहिए कि हम इस नफरत की आग में जलकर किसका कत्ल कर रहे हैं अपने भाई-दोस्त- और इंसानियत का खून बहा रहे हैं।

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