Home Social फूले से लेकर फूलन तक
Social - Social Issues - November 28, 2019

फूले से लेकर फूलन तक

मैं जब भी कभी महिलाओं के बारे में सोचती हूँ तो एक तरफ मुझे फूले दम्पत्ति-फातिमा शेख़ दिखते हैं और दूसरी तरफ फूलन दिखती हैं. ज्योतिबा फूले साहब- सावित्री बाई- फातिमा शेख ने महिलाओं के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया और उन्होंने महिलाओं को पढ़ाकर समाज को बेहतरी की तरफ ले जाने की कोशिश की.

जहाँ पिछड़े वर्ग के माली समाज से आने वाले फूले साहब लड़कियों को अपने हिस्से का दावा करने के लिए एक उम्मीद प्रेरणा और हाथ में किताब देते हैं. वहीं पर जब हम लड़कियाँ फूलन को पढ़ती हैं तो मन में सवाल उठता है कि आखिर वो किस जाति किस समाज के जातिगत गुंडे हैं जो लड़कियों को दमन अपमान शारीरिक-मानसिक-सामाजिक-जातिगत शोष का संदेश देना चाहते हैं.

पिछड़ी जाति के मल्लाह जाति से आने वाली फूलन लडीं और आने वाली दम्पति-फातिमा शेख और फूलन दोनों को पढ़ना समझना सकती है और फूलन ने यह भी एक संदेश दिया कि कोई भी गलत संदेश लड़कियों का भविष्य नहीं खराब करेगा चाहे वो संदेश किसी भी जाति-समाज से आता हो लड़कियां लड़ेंगी और जीतेंगी.

प्रत्येक जाति-धर्म की महिलाओं को फूले दम्पति-फातिमा शेख और फूलन दोनों को पढ़ना समझना होगा ताकि हम लड़कियाँ और ज्यादा मजबूत बन सकें. खासकर जब मैं अभी जेएनयू की हम लड़कियों के बारे में ये सब बकवास देख रही हूँ तो आज मुझे फूले और फूलन दोनों बराबर याद आते हैं और दोनों की ही जरूरत बराबर है.

जिये फूले, जिये फूलन
-कनकलता यादव

(अब आप नेशनल इंडिया न्यूज़ के साथ फेसबुकट्विटर और यू-ट्यूब पर जुड़ सकते हैं.)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also

The Rampant Cases of Untouchability and Caste Discrimination

The murder of a child belonging to the scheduled caste community in Saraswati Vidya Mandir…