Home Social महिला दिवस पर इन्हें भी याद कर लीजिए ….
Social - State - March 9, 2019

महिला दिवस पर इन्हें भी याद कर लीजिए ….

Published By- Aqil Raza
By- Manish Ranjan

केरल के त्रावणकोर के ब्राह्मण राज्य में गैरब्राह्मण महिलाओं को स्तन ढकने की मनाही थी साथ ही महिलाओं पर स्तन टैक्स लगाया जाता था. वे बिना टैक्स चुकाए अपने नवजात शिशु को अपने ही स्तन से दूध नही पिला सकतीं थीं. केरल के चेर्थाला की गरीब महिला नांगेली के पास टैक्स चुकाने के लिए पैसे नही थे और जब वे माँ बनीं तो अपने ही नवजात शिशु से दूर कर दी गईं . तो विरोध स्वरुप उनने अपने स्तन काटकर टैक्स अधिकारियों को दे दिये.

इसके बाद उनकी मौत हो गई. उनका पति चिरुकंडन जब घर लौटकर आये तो उनने भी आत्महत्या कर ली. इसके बाद इस कुप्रथा के खिलाफ तीव्र आंदोलन हुआ. 1812 में ब्राह्मण राजा को टैक्स की यह कुप्रथा बंद करने के लिए बाध्य होना पड़ा. हालांकि इसके बाद भी गैरब्राहमण महिलाओं को स्तन ढंकने के अधिकार से वंचित रखा गया. स्तन ढकने के लिए अंग वस्त्र पहनने के अधिकार के लिए अय्यंकाली के नेतृत्व में लंबी लड़ाई चली, अगले चार दशकों तक यह लड़ाई चली. तब जाकर ब्राह्मण राजा से यह अधिकार पाया जा सका।

केरल में उस समय न सिर्फ अवर्ण बल्कि नंबूदिरी ब्राहमण और क्षत्रिय नायर जैसी जातियों की औरतों पर भी शरीर का ऊपरी हिस्सा ढकने से रोकने के कई नियम थे। नंबूदिरी औरतों को घर के भीतर ऊपरी शरीर को खुला रखना पड़ता था। वे घर से बाहर निकलते समय ही अपना सीना ढक सकती थीं। लेकिन मंदिर में उन्हें ऊपरी वस्त्र खोलकर ही जाना होता था।नायर औरतों को ब्राह्मण पुरुषों के सामने अपना वक्ष खुला रखना होता था। सबसे बुरी स्थिति दलित औरतों की थी जिन्हें कहीं भी अंगवस्त्र पहनने की मनाही थी। पहनने पर उन्हें सजा भी हो जाती थी।
एक घटना बताई जाती है जिसमें एक कथित निम्न जाति की महिला अपना सीना ढक कर महल में आई तो रानी अत्तिंगल ने उसके स्तन कटवा देने का आदेश दे डाला।इस अपमानजनक रिवाज के खिलाफ 19 वीं सदी के शुरू में आवाजें उठनी शुरू हुईं।
इस तरह महिलाएं अक्सर इस सामाजिक प्रतिबंध को अनदेखा कर सम्मानजनक जीवन पाने की कोशिश करती रहीं। यह कुलीन मर्दों को बर्दाश्त नहीं हुआ। ऐसी महिलाओं पर हिंसक हमले होने लगे। जो भी इस नियम की अवहेलना करती उसे सरे बाजार अपने ऊपरी वस्त्र उतारने को मजबूर किया जाता। अवर्ण औरतों को छूना न पड़े इसके लिए सवर्ण पुरुष लंबे डंडे के सिरे पर छुरी बांध लेते और किसी महिला को ब्लाउज या कंचुकी पहना देखते तो उसे दूर से ही छुरी से फाड़ देते। यहां तक कि वे औरतों को इस हाल में रस्सी से बांध कर सरे आम पेड़ पर लटका देते ताकि दूसरी औरतें ऐसा करते डरें।

Manish Ranjan
High Court Lawyer and Social analyst
Patna
Bihar

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also

बाबा साहेब को पढ़कर मिली प्रेरणा, और बन गईं पूजा आह्लयाण मिसेज हरियाणा

हांसी, हिसार: कोई पहाड़ कोई पर्वत अब आड़े आ सकता नहीं, घरेलू हिंसा हो या शोषण, अब रास्ता र…