وشچكپ میں پنڈت کا فلسفہ شدہ بدھنما?
کی طرف سے: نوال کشور کمار
ब्राह्मण भारतीय समाज का कोढ़ है। दुर्भाग्य यह है कि आज भी यह बना हुआ है। कल विश्वकप के मैच में भी यह देखने को मिला। तुमने देखा था बुधनमा भाई?
ہاں, मैच तो देखे थे थोड़ा देर। लेकिन आपको वहां कौन ब्राह्मण मिल गया। वहां तो सब जाति-धर्म के लोग थे। आपकी नजर भी कमाल की है। हजारों की भीड़ में ब्राह्मण मिल ही जाता है। इ तो बताइए कि क्या हुआ।
मुझे क्या होगा। मैं तो मैच ही देख रहा था। एक आदमी नंगे बदन दिख गया। पूरे बदन पर उसने इंडिया पोत रखा था। फिर तेंदुलकर भी था उसके शरीर पर। बेचारा कमेंटेटर कुछ बोल रहा था। उसके जुनून के बारे में।
ہاں, देखे तो हम भी थे। लेकिन कौन है इ आदमी भाई जी। एगो मुल्ला भी ऐसा ही है। जहां पाकिस्तान का मैच होता है नजर आ जाता है। जाने इ दोनों के पास केतना पैसा है। एको गो मैच नहीं छोड़ता है। लंदन जाए में पैसा तो लगता ही होगा न।
بدھ کو آدمی, यही ब्राह्मणवाद है। यह सब जगह है। अपने-अपने रूप में। जैसे हमलोग के देश में पंडित सब राज करता है। वैसे ही पाकिस्तान में मुल्ला सब। इन सबको कमाने की जरूरत नहीं पड़ती है। अब देखो न उ आदमी को जो भारत का चलता-फिरता पोस्टर बन जाता है हर मैच में।
आप जानते हैं क्या उसको?
हां जानते तो हैं। लेकिन यह नहीं जानते थे कि वह ब्राह्मण है। चुटिया धारी ब्राह्मण। हो सकता है कि वह ब्राह्मण न होकर भूमिहार हो मुजफ्फरपुर का। सुधीर नाम है उसका। पटना में एकाध बार उससे मुलाकात हुई थी।
सच्चो में नवल भाई, उ आदमी अपने मुजफ्फरपुर का है?
بدھ کو آدمی, सच यही है कि वह सचिन तेंदुलकर नामक एक ब्राह्मण क्रिकेटर का प्रशंसक है। ठीक वैसे ही जैसे इस देश में प्रभाष जोशी नामक एक ब्राह्मण संपादक हुआ करते थे। वह भी क्रिकेट से अधिक ब्राह्मणों के क्रिकेट के अधिक प्रशंसक थे।
कौन थे इ नवल भाई? नहीं जानते हैं हम? मर-खप गए क्या?
ہاں, चल बसे प्रभाष जोशी। एक दिन क्रिकेट मैच को देखते-देखते। खैर छोड़िए जो इस धरती पर जिंदा ही नहीं है, उसकी बात क्या करें। आपको सुधीर के बारे में बताते हैं। सुनेंगे तो आप यकीन नहीं करेंगे। उसका परिवार कोई और नहीं सचिन तेंदुलकर चलाता है। पूरे विश्व में जहां कहीं भी मैच हो, उसके आने-जाने से लेकर रहने-खाने-धूमने का इंतजाम भी तेंदुलकर ही करता है।
अरे बाप रे। एतना बड़का क्रिकेटर और इतना जातिवादी। अच्छा नवल भाई। इससे तेंदुलकर को क्या फायदा?
ब्राह्मण क्षणिक फायदा के लिए थोड़े काम करता है। वह युग को ध्यान में रखकर काम करता है। असल में तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान प्रभाष जोशी ने बनाया। इसके पहले वह एक क्रिकेटर था। एक अच्छा क्रिकेटर। लेकिन बाद में उसको भगवान बनने का सुर चढ़ा। इसी बीच पटना में एक आदमी था। क्रिकेट की रिपोर्टिंग करता था। उसने सुधीर के कान में गुरूमंत्र डाल दिया। शुरू-शुरू में तो सुधीर ने अपने घर का आटा गीला किया। लेकिन पहचान बनने लगी। ऐसे भी यदि कोई व्यक्ति पूरे स्टेडियम में अकेला नंग-धड़ंग खड़ा हो और भारत-भारत चीखे तो उसको तो सब नोटिस में लेगा ही। फिर क्या सुधीर फेमस हो गया। अब तो वह इतना फेमस है कि पूछो ही मत।
अपना बिहार भी गजबे है न नवल भाई। एको गो काबिल क्रिकेटर तो नहीं हुआ चमचा एक नंबर का पैदा किया।
छोड़ दें बुधनमा भाई बिहार की बात। बिहार की तुलना किसी से नहीं हो सकती है। जिस राज्य में हर साल पांच सौ से अधिक बच्चे इंसेफालइटिस से बिना इलाज के मर जाते हों, उसकी बात क्या करना। आजतक बिहार में ऐसा कोई प्रयोगशाला तक नहीं है जहां इसकी जांच भी हो सके।
بدھ کو آدمی, बिहार की बात न किया करें। सबसे अभागा राज्य है वह। सबसे बड़का अधकपाड़ी है वहां का मुख्यमंत्री। कल उसने कह दिया कि इंसेफलाइटिस से मरने वाले सभी बच्चों के मां-बाप को चार-चार लाख रूपए देगा।
बाप रे, इ नीतीश कुमार भी खूब है स्सा…। इलाज करावे, बच्चों की जान बचावे। इसका का मतलब कि बच्चों की कीमत लगाए।
بدھ کو آدمی, आज एगो बात सुन लो। मेरे साथ बातचीत में कोई महिला विरोधी गाली-गलौज नहीं करेंगे। खराब नीतीश कुमार है, उसको बोलिए। उसको वोट मत दिजीए। यदि हिम्मत है तो सड़क पर जाइए। विधानसभा के अंदर घुसिए और झोंटा पकड़कर उसको कुर्सी से उठा के पटक दिजीए। लेकिन गाली-गलौज नहीं।
ठीक है नवल भाई। अब ऐसन गलती नहीं होवेगा। चलिए आपको भोरहरिया वाला ताड़ी पिलाते हैं।
مصنف- نیول کشور کمار, سینئر صحافی, فارورڈ پریس, ہندی. نوال کشور جی بھی اپنے مضامین کے ذریعے نیشنل انڈیا نیوز کو مسلسل اپنی خدمات فراہم کر رہے ہیں۔
مولانا آزاد اور ان کی برسی کو یاد کرتے ہوئے۔
مولانا ابوالکلام آزاد, مولانا آزاد کے نام سے بھی جانا جاتا ہے۔, ہندوستان کے نامور اسکالر تھے۔, آزادی…






