Home State Delhi-NCR दिल्ली हिंसा पर शाह का झूठ, विपक्ष ने उठाए सवाल!
Delhi-NCR - Hindi - Political - Politics - March 12, 2020

दिल्ली हिंसा पर शाह का झूठ, विपक्ष ने उठाए सवाल!

दिल्ली हिंसा मामले पर लोकसभा में चर्चा हुई जहां सांसदों में मुद्दों को लेकर बहस की जंग छिड़ी रही. सदन में दिल्ली हिंसे के कई पहलुओं पर पक्ष और विपक्षों में जमकर तीखी बहस हुई. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे.

सदन में चर्चा के समय अधीर रंजन चौधरी ने सरकार पर जमकर हमला बोला उन्होंने कहा कि दिल्ली हिंसा पर लंबे समय से चर्चा की मांग की जा रही थी, फिर भी सरकार इस विषय पर चर्चा करने को राजी नही हुई. उन्होंने आगे कहा कि सरकार अब ऐसे कौन से कदम उठा रही है कि ऐसी घटना फिर ना घटे. अगर सरकार कोशिश करती तो दिल्ली हिंसा रोकी जा सकती थी, फिर ये घटना तीन दिन तक लगातार क्यों घटी. गृहमंत्री तीन दिन तक कहां थे सरकार को जवाब देना होगा, आखिर दिल्ली के प्रशासन की जिम्मेदारी उनके अंतर्गत आती है.

इसके साथ ही एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरकार पर तीखे हमले बोले. उन्होंने सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि दिल्ली हिंसा कोई सांप्रदायिक दंगा नही, यह एक इस सरकार का एक प्रोग्राम है. उन्होंने आगे कहा कि अपना कर्तव्य निभाने में मोदी सरकार दूसरी बार नाकाम हुई है. वे उनकी जान नही बचा पाएं जो लोग दंगों के समय अपनी जान की भीख मांग रहे थे. उन लोगों की मौत का इन्हें कोई दुख नही है.

वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने भी सरकार को घेरा और कहा कि दिल्ली दंगे को लेकर बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे के कार्यकाल में हुए दंगे क्यों गिनवा रही है. कोई कह रहा है ये सांप्रदायिक दंगा है कोई कह रहा है ये सुनियोजित दंगा है. सच तो ये है कि इस दंगे में ना ही कोई पार्टी वाला मरा और ना ही कोई हिंदु-मुसलमान, अगर कोई मरा है तो वो है इंसान.

साथ ही अमित शाह ने दिल्ली हिंसा पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दंगे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है. जबकि 25 फरवरी के बाद कोई हिंसा नही हुई. दंगे पर काबू पा लिया गया था. उन्होंने कहा कि इस बात पर मुझे दिल्ली पुलिस पर गर्व है. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बल्कि विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में हिंसा को उकसाने का काम किया. घर से निकलने का समय है ये आर-पार की लड़ाई है, क्या यह दंगे उकसाने के लिए भड़काऊ भाषण नही है. शाह ने आगे कहा कि शुरुआती दौर में दंगा सुनियोजित थी और दंगा करने वालो को बख्शा नही जाएगा.

गौरतलब है कि बीते महीने दिल्ली हिंसा में कुल 45 लोगों की जानें चली गई और 250 से अधिक लोग गंभीर रुप से घायल हो गए. राजधानी दिल्ली में हिंसा के दौरान आगजनी समेत तोड़-फोड़ हुई. जिसके बाद इस मामले को लेकर सदन में चर्चा की मांग उठी थी. इतना सबकुछ घटने के बाद भी सदन में गृहमंत्री ने कहा कि दिल्ली पुलिस पर उन्हें गर्व है क्योंकि स्थिती पर पहले ही काबू पा लिया गया था. लिहाजा ये तो सही मायने में वही दंगे पीड़ित बता सकते है जिन्होंने उस दौरान वह भयावह मंजर देखा होगा और इसके चलते कैसे उन्हें डर-डर कर राते गुजारनी पड़ी होगी. सदन में खड़े होकर सफाई देना बहुत ही आसान है लेकिन जिन लोगों ने अपने परिजनों को उन दंगों में खोया उनके दर्द की आग शायद ही कभी ठंडी होगी जिसका अंदाजा आप तो क्या कोई भी नही लगा सकता.

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