Home State Uttar Pradesh & Uttarakhand हमे भेंड़ बकरियों के जैसे काटा : पीड़ित सहारनपुर हिंसा

हमे भेंड़ बकरियों के जैसे काटा : पीड़ित सहारनपुर हिंसा

यूपी का सहारनपुर जातीय हिंसा की आंच से झुलस रहा है। जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल हुए 80 साल के फूल सिंह अभी भी उस खौफनाक मंजर को याद करके सिहर उठते हैं। फूल सिंह उन पीड़ितों में से एक हैं, जो अस्पताल में अपने गंभीर घावों का इलाज करा रहे हैं। अस्पताल के बेड पर लेटे सिंह ने अपने साथ हुई वारदात को याद करते हुए बताया, ‘उन्होंने हमारी कार रुकवाई। वे अंदर आए और तलवार से मेरी गर्दन काटने की कोशिश की। मैंने अपना सिर बचाने के लिए हाथ ऊपर कर लिए। मेरा हाथ करीब-करीब कट गया। इसके बाद उन्होंने तलवार से मेरे पैर पर वार किए। मांस और हड्डियों को काटती तलवार को मैं महसूस कर सकता था। उन्होंने हमें भेड़-बकरियों की तरह काटने की कोशिश की।’
32 साल के राजेश कुमार लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। उनके कुर्ते पर अभी भी खून के निशान हैं। राजेश के अलावा मोहम्मद अकबर, सचिन कुमार, मोसी राम, नितिन प्रजापति और फूल सिंह को गंभीर चोटों की वजह से मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। घायलों पर अज्ञात लोगों ने तलवारों, चाकुओं, भालों से हमला किया था। हमलावरों के चेहरे ढके हुए थे। यह हमला मंगलवार शाम उस वक्त हुआ, जब वे लोग बीएसपी प्रमुख मायावती की जनसभा में शामिल होने के बाद वापस लौट रहे थे। मायावती का यह कार्यक्रम हिंसाग्रस्त शब्बीरपुर गांव में था।
राजेश कुमार ने आगे बताया, ‘हमलावरों ने कुछ भी नहीं कहा। उन्होंने बस हमला कर दिया। मुझपर दो लोगों ने हमला किया। एक ने मेरा हाथ पकड़ा जबकि दूसरे ने तलवार से उसे काटने की कोशिश की। मैंने किसी तरह हाथ छुड़ाया, जिससे तलवार के वार का पूरा असर नहीं हुआ। हालांकि, मेरा हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मेरी हड्डियां नजर आने लगीं क्योंकि मांस कटकर हट चुका था।’ राजेश ने आगे बताया, ‘बीते महीने सहारनपुर में जो हुआ, वह बेहद गलत था। घरों को जलाया गया है और लोगों पर हमले किए गए हैं। मैंने किसी पर हमला नहीं किया और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता।’
हमले में 20 साल के सचिन कुमार को सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। उनपर भाले और बांसों से हमला किया गया। उनकी मां कुसुम देवी अस्पताल में उनके बेड के नजदीक ही बैठी हुई थीं। उन्होंने कहा, ‘मेरा बेटा बेहोश है और कल से इसने एक शब्द भी बात नहीं की। वह तो बच्चा है। लोगों ने उस पर इतनी क्रूरता क्यों दिखाई?’ वहीं, 45 साल के मोसीराम पर तलवार से हमला हुआ था। उन्हें इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लाने वाले सुशील गौतम ने बताया, ‘तलवार सीधे उनके आरपार हो गया। जब हम उन्हें लेकर यहां आए, उस वक्त उनकी आंतें बाहर झूल रही थीं।’ मेडिकल वॉर्ड के डॉ अजीत चौधरी ने बताया कि मोसीराम की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन अगले 48 घंटे तक उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा। इसके अलावा, बाकियों को भी गंभीर चोटें आई हैं। वहीं, 29 साल के मोहम्मद अकबर को उस वक्त गोली मारी गई, जब वह मायावती के कार्यक्रम से वापस लौट रहे थे। गोली उनके गर्दन को चीरती हुई बाहर निकल गई। वह मायावती के कार्यक्रम में इसलिए गए क्योंकि उन्हें लगता था कि ‘दलितों और मुसलमानों का एक साथ आना बेहद जरूरी है।’

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