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JNU में कैसे हुई हिंसा? छात्रों और रिपोर्टर ने बताई ‘आंखों देखी’

हम लगभग 8.30 बजे जेएनयू मुख्य द्वार पर पहुँचे। जेएनयू मेन गेट तक जाने वाली बेर सराय चिल्ड्रन पार्क (यानी बाबा गंगनाथ मार्ग) की सड़क पूरी तरह से अंधेरी थी। हमने देखा कि उस सड़क पर सभी स्ट्रीट लाइट को बंद कर दिया गया था। मुख्य गेट के पास पुलिस बल की भारी तैनाती थी। साथ ही पुलिस कम से कम सौ गुंडों के साथ खड़ी थी, जिनमें से कई ने लाठियां बरसाईं। उन्होंने मुख्य द्वार को अवरुद्ध कर दिया था, जेएनयू को नक्सल विश्वविद्यालय कहने के नारे लगा रहे थे, भारत माता की जय का नारा लगा रहे थे। गोल्लि मारों सौलन को। नारे लगाए जा रहे थे जिससे

The legacy of Rohit Vemula empowers not only to question establish Brahminical order but also it’s oppressive seeds in liberal left…

The fact is true, the perpetrators have now become more active and functioning through the establishing setup of democracy. Perpetrators who took away the precious life of Rohit are now everywhere. They are in colleges, universities, Parliament, and in the judiciary. The media houses and bureaucracy is filled with such perpetrators. They are now on the streets and everywhere one imagines.