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डॉ.अंबेडकर और भारत का भविष्य

By- संजय श्रमण जोठे ~ डॉ. अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर भारत के दलित बहुजनों को अब कुछ गंभीर होकर विचार करना चाहिए. बीते कुछ वर्षों मे भारत की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक पतन से जन्मी दुर्दशा की सघन प्रष्ठभूमि मे हमें अंबेडकर की वैचारिक विरासत और उनके दिखलाये मार्ग की सम्मिलित संभावनाओं को ठीक से समझना होगा. जिस गंभीरता से अंबेडकर ने भारत के भविष्य के विषय मे या भारत मे बहुजनों के भविष्य के विषय मे अपनी चिंतन धारा को आकार दिया था उसे भी हमें एक विशेष ढंग से देखना और समझना होगा. अंबेडकर की दृष्टि मे बहुजनों के भारत मे

महाराष्ट्र हा फुले-शाहू-आंबेडकरांचा पुरोगामी महाराष्ट्र म्हणून ओळखला जातो

By- मिलिंद धुमाळे ~ कारण महाराष्ट्राला या तीन थोर समाज सुधारकांचा वैचारिक वारसा लाभला आहे.विषमतेत बरबटलेल्या महाराष्ट्राची विस्कटलेली सामाजिक घडी बसवली ती या तिघांनी. क्रांतिसूर्य महात्मा जोतीबा फुले आणि भारतीय घटनेचे शिल्पकार डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर यांचं नातं हे गुरु-शिष्याचं नातं आहे.बाबासाहेबांनी तीन गुरु केले तथागत भगवान गौतम बुद्ध संत कबीर आणि महात्मा जोतीबा फुले.या तिघांचे वैशिष्ट्य हे कि तिघांनीही दैवावाद नाकारला.ब्राह्मणवादाचा कडाडून विरोध केला. डॉक्टर बाबासाहेबांनी त्यांचा वैचारिक वारसा पुढे चालविला.

The Indian Renaissance was lighted up by Jyotirao Phule

~ Milind Patil He was the Executive Director of 'Pune Commercial & Contracting Company'. Jotiba was a successful businessman. His company made magnificent and costly constructions of canals, tunnels, bridges, buildings, textiles, palaces and roads. The important work done by Jotiba's company is the Katraj tunnel, the Yerwada Bridge and the canal of the Khadakwasla Dam. In the report of the British Government's Education Department, it was found that during 1850, he had arranged to provide industrial and agricultural

पतंजलि के प्रोडक्ट्स का बायकॉट ही कारगर उपाय है !

रामदेव ने आंबेडकर, पेरियार के विचारों को पढ़ने-गुनने वालों के खिलाफ जो जहर टीवी चैनल पर उल्टी किया था. अब वह हजारों लोगों के बीच भी प्रवचन देते हुए उसी नफरत के जहर की उल्टी कर रहा है. सरेआम! उसकी जुबान से निकली जहर का असर यह भी हो सकता है कि उसे सही मानने वालों की भीड़ आंबेडकर या पेरियार का नाम लेने वालों की हत्या कर दे और दंगा फैल जाए कत्लेआम मच जाए गृहयुद्ध छिड़ जाए. कायदे से एक ईमानदार लोकतांत्रिक शासन होता तो हिंसा भड़काने की कोशिश के लिए रामदेव को गिरफ्तार कर तुरंत जेल में बंद कर देता. नफरत और दंगा भड़काने के जुर्म

मोदी जी बुद्ध से आपका नाता क्या है? आप बुद्ध के साथ हैं या बुद्ध के विरूद्ध?

By–डॉ सिद्धार्थ रामू~ प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध दिया। ऐसे में यह सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री मोदी जी का बुद्ध से नाता क्या है? क्या बुद्ध के जीवन, दर्शन, धम्म और विचारधारा का कोई भी ऐसा तत्व है, जिस वे स्वीकार करते हों? आइए सबसे पहले करूणा और अहिंसा को लेते हैं, जिसके लिए दुनिया बुद्ध को जानती है। प्रधानमंत्री जी क्या यह याद दिलाने की जरूरत है, आपके नेतृत्व में 2002 में इस देश में गुजरात जैसा नरसंहार हुआ, जिसमें करीब 2000 से अधिक लोग नृशंस और

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में डॉ. आंबेडकर की क्या राय…

आजादी से 1 वर्ष पहले 1946 में डॉ. आंबेडकर ने लिखा कि “ हिंदुओं और मुसलामनों की लालसा स्वाधीनता की आकांक्षा नहीं हैं. यह सत्ता संघर्ष है,जिसे स्वतंत्रता बताया जा रहा है.. कांग्रेस मध्यवर्गीय हिंदुओं की संस्था है, जिसकों हिदू पूंजीपतियों की समर्थन प्राप्त है, जिसका लक्ष्य भारतीयों की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि ब्रिटेन के नियंत्रण से मुक्त होना और सत्ता प्राप्त कर लेना है, जो इस समय अंग्रेजों की मुट्ठी में हैं.” ( डॉ, आंबेडकर, संपूर्ण वाग्यमय, खंड-17, पृ.3 ). मुसलमान... मध्यवर्गीय हिंदुओं के वर्चस्व से मुक्ति के लिए अलग…

Revisiting Hindu Code Bill; Dr. Ambedkar, a Crusader for Women’s rights

Not in very past, Indian women, wives were considered as property of men (the notion still exists). The main narrative womanhood was related to faithful wives and pativrata women who are being valorized. During Ancient time Streesvabhava- women’s innate nature which was considered to be always wicked, their ‘insatiable’ lust. Through defining Streedharma (woman’s code) her womanly character is being tamed into a socially and culturally established individual.

9 अगस्त को विश्व मूलनिवसी दिवस, समझिए पूरा इतिहास

By: NIN Bureau क्यों मनाया जाता है विश्व मूलनिवासी दिवस ? मूलनिवासियों के मानवाधिकारों को लागू करने और उनके संरक्षण के लिए 1982 में UNO (संयुक्त राष्ट्र संघ) ने एक कार्यदल UNWGIP (United Nations Working Group on Indigenous Populations) के उपआयोग का गठन किया। जिसकी पहली बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई थी। इसलिए, हर वर्ष 9 अगस्त को "विश्व मूलनिवासी दिवस" UNO द्वारा अपने कार्यालय में एवं अपने सदस्य देशों को मनाने का निर्देश है। UNO ने यह महसूस किया कि 21वीं सदी में भी विश्व के विभिन्न देशों में निवासरत मूलनिवासी…