ब्राउजिंग टैग

BAHUJAN’S

राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म की आड़ में अपने वर्चस्व को बचाने, सवर्णों की खतरनाक राजनीति

BY: SHYAM MEERA SINGH सबसे पहले जेएनयू पर आतंकवादी हमले का जश्न मनाने वालों के उपनामों को पढ़ें, "शुक्ला, दुबे, चतुर्वेदी, जादौन, तोमर, चौधरी, राजपूत, गुर्जर, पांडे, त्रिवेदी, त्रिपाठी, सिंह, मिश्रा, शर्मा" आदि वे क्यों हैं? आपने सोचा अहीर क्यों नहीं है? जाटव क्यों नहीं? कुमार क्यों नहीं? वाल्मीकि क्यों नहीं? नाई क्यों नहीं है? धोबी क्यों नहीं? मीना क्यों नहीं है? वास्तव में, इस देश का सड़ा हुआ "अपरकेस" हिंदू धर्म की आड़ में आपके घरों, विश्वविद्यालयों तक पहुंच गया है। राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म की आड़ में ये लड़ाई

अगर कोई CAA के खिलाफ प्रदर्शन करता है तो उसे बहुजन विरोधी घोषित कर देना चाहिए: नित्यानंद राय

केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा है कि संशोधित नागरिकता कानून का विरोध करने वालों को ओबीसी और बहुजन विरोधी घोषित कर देना चाहिए। गृह राज्य मंत्री राय ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में उत्पीड़न के कारण वहां से आने वाले लोगों में ज्यादातर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और बहुजन वर्ग से हैं। उन्हें सम्मान देने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सीएए लेकर आए हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा है कि संशोधित नागरिकता कानून का विरोध करने वालों को ओबीसी और बहुजन विरोधी घोषित कर देना चाहिए। गृह राज्य मंत्री

CAA: संविधान और आगे आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए BJP और RSS के एजेंडे को रोकना होगा

By: Shahnawaz Ansari सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट(CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) का नाम तो आपने ज़रूर सुना होगा। मीडिया लगातार बता रही है कि ये मुसलमान विरोधी है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तो खुद यह कह चुके हैं कि इसके विरोधियों को उनके कपड़े के आधार पर पहचान की जा सकती है। यदि आप भी ऐसा ही समझते हैं, तो थोड़ा सा समय निकाल कर इस पर्चे को ज़रूर पढ़ें। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार अब असम में NRC लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख से ज्यादा लोगों के पास अब वोट देने का अधिकार नहीं होगा। असम NRC लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख

बिरसा मुंडा को भारत रत्न, सब तरफ़ से बहुजनों की एक ही अवाज!

सुगना मुंडा और करमी हातू के बेटे बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड में राँची के उलीहातू गाँव में हुआ था. साल्गा गाँव में प्रारम्भिक पढ़ाई के बाद वे चाईबासा इंग्लिश मिडिल स्कूल में पढ़े. एक अक्टूबर 1894 को नौजवान नेता बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को एकत्र कर अंग्रेजों के खिलाफ लगान माफी का आन्दोलन किया. 1895 में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में 2 साल के कारावास की सजा दी गयी. 1898 में तांगा नदी के किनारे बिरसा मुंडा की अगुआई में आदिवासियों ने अंग्रेज सेना को मात दी. गुस्साए अंग्रेजों ने