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आखिर 40 साल में पहली बार उपभोक्ताओं के खर्च में गिरावट क्यों आई!

सरकारी सर्वे में ये एक नई बात सामने आई है. कि पिछले 40 सालों में पहली बार साल 2017-18 में उपभोक्ताओं की खर्च सीमा में गिरावट देखन को मिली है और इसका प्रमुख कारण ग्रामीण इलाकों में मांग में आई कमी है. बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार भारत में घरेलू उपभोक्ता व्यय नामक राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय एनएसओ की लीक को सर्वे में कथित तौर पर दिखाया गया है. कि किसी भारतीय द्वारा एक महीने में खर्च की जाने वाली औसत राशि साल 2017-18 में 3.7 फीसदी कम होकर 1446 रुपये रह गई है. जो कि साल 2011-12 में 1501 रुपये थी. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार

क्या जेएनयू की फीस बढाने के समर्थक सार्वजनिक धन की इस लूट पर भी खामोश बने रहेंगे?

आम खाताधारकों पर मिनिमम बैलेंस के लिए पेनाल्टी और ज्यादा ट्रांजेक्शन करने पर तुरंत चार्ज लगाने वाले एसबीआई ने पिछले पांच साल मे कुल 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का लोन राइट-ऑफ किया है. कि आम आदमी को लूटने ओर कारपोरेट को बांटने की नीति मोदी सरकार में खूब परवान चढ़ रही है. और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा पिछले दो साल में राइट-ऑफ किया गया है. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 2016-17 में 20 हजार,339 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टा खाते डाल दिया था उस वक्त भी यह

दिल्ली के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा वह आपातकालीन इस आपातकालीन से अच्छी थी

राजधानी दिल्ली में लोगों का प्रदूषण से बुरा हाल हो रखा है और हवा में कोई सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा है.आज भी दिल्ली के कई शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरे के निशान से उपर है. दरअसल पिछले सप्ताह कुछ दिन हवा की स्थिति ठीक रहने से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से थोड़ी राहत जरूर मिली थी. लेकिन रविवार के बाद से दिल्ली की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और इसी जहरीली हवा के चलते लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. अगर हम अब की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर में नोएडा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. जहां AQI 482

भारत की भुखमरी में मोदी सरकार ने तोड़ा दुनिया का रिकाॅर्ड

किसी भी देश में स्वास्थ्य का अधिकार जनता का सबसे पहला बुनियादी अधिकार होता है. लेकिन भारत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में रोज़ाना हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. पृथ्वी पर हर एक इंसान का पेट भरने लायक पर्याप्त भोजन का उत्पादन हो रहा है. लेकिन फिर भी विश्व के कुछ हिस्सों में भुखमरी बढ़ती जा रही है और 82 करोड़ से ज़्यादा लोग "लगातार कुपोषण का शिकार" बने हुए हैं. दुनिया में हर इंसान को पर्याप्त भोजन मिले ये सुनिश्चित करने के लिए आख़िर क्या क़दम उठाए जा रहे हैं. 2019 के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत दुनिया के उन 45

काले कोर्ट और खाकी की लड़ाई SC का किसके पक्ष में फैसला?

दिल्ली में बुलंद कुछ नहीं बचा ना इंसानियत ना इमान ना भाईचारे का पैगाम पुलिस और वकिल की लड़ाई से बढ़ते हुए बवाल ने सब कुछ खाक कर दिया. एक तरफ दंगाई के मनसूबे ने पुलिस को पिट पिटकर अधमरा कर दिया. इसलिए पुलिस पूछ रही है गम हम इंतजार में इंसाफ की तारिख भी मुकर्रर होनी चाहिए. बीते कल हुआ क्या. दिल्ली पुलिस सड़को पर उतर आएं. जो पुलिस लोगों के सुरक्षा के लिए आधी रात तक ड्यूटी पर तैनात रहती है. बीबी बच्चों को छोड़कर चौकी पर तैनात रहती है. लोगों का सुरक्षा का इंतजाम करती है. हो रहे आपस में लड़ाई को सुलझाती है. लेकिन वहीं पुलिस कल