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2019 में भाजपा का हारना तय है!

2019 में भाजपा का हारना तय है. जनता भाजपा के फरेब से परिचित हो चुकी है. भाजपा को भी पता है कि लोग अब पहले की तरह बेवकूफ बनने वाले नहीं हैं. इसीलिए वह विकास का मुद्दा छोड़कर अपने मूल हथियार यानी साम्प्रदायिक राजनीति का प्रयोग करने के लिए माहौल बनाने लगी है. इसके लिए लगभग सभी न्यूज चैनल , ट्विटर , व्हाट्सएप और फेसबुक का प्रयोग शुरू हो चुका है. फेक न्यूज और प्लांटेड न्यूज से जनता को साम्प्रदायिक होने के लिए उकसाया जा रहा है. लेकिन इसका भी कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है. प्रो-बीजेपी तमाम न्यूज चैनल्स और शोसल मीडिया ग्रुप्स/पेज…

अम्बेडकर जयंती पर देहरादून में पहली बार भीम महोत्सव, एक सप्ताह तक रहेगा जारी

By: Ankur sethi बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर और भगवान बुद्ध की विचारधारा पर काम करने वाली संस्था दून बुद्धिस्ट सोसायटी इस साल देहरादून में बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है. जिसका नाम है भीम महोत्सव.. जी हाँ, देहरादून के परेड ग्राऊंड में 7 से 15 अप्रैल तक भीम महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सांस्कृतिक एवं बौद्धिक मेला’ भी इस खूबसूरत कार्यक्रम की शोभा बढ़ायेगा. आयोजकों द्वारा इस मेले को बहुत शानदार रूप दिया जा रहा है. परेड ग्राऊंड में होने वाले मेले के दौरान रोज शाम को 5 बजे से रात 9 बजे तक प्रदेशभर के प्रसिद्ध…

जानिए नीला रंग क्यों बन गया ‘बहुजन संघर्ष’ की पहचान?

ये उत्सुकता का विषय है कि बहुजनों के संघर्ष का रंग नीला क्यों है? जब पूरे देश में बहुजनों ने एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संघर्ष किया तो रैलियां नीले रंग के झंडों और टोपियों से पटी पड़ी थीं. हाल के बरसों में जब भी बहुजनों का कोई मार्च या रैली निकलती है, तो उसमें एक रंग लहराता है और वो है नीला. आखिर ऐसा क्यों है कि नीला रंग बहुजनों के प्रतिरोध, संघर्ष और अस्मिता का रंग बनकर उभरा है. नीले रंग के पीछे अवधारणा क्या है नीला रंग आसमान का रंग है, ऐसा रंग जो भेदभाव से रहित दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है. जो ये…

ऐसे हालातों में बहुजन सड़क पर नहीं उतरता तो आखिर क्या करता?

BY: दीपक के मंडल जिन लोगों को 2 अप्रैल को बहुजनों का सड़कों पर उतरना नागवार गुजरा है, उन्हें शायद यह जानने की फुर्सत नहीं होगी कि इस देश में एससी-एसटी समुदाय के लोग किन हालातों में जी रहे हैं. आंदोलन के दौरान बहुजनों पर गोलियां दागी गईं, सोशल मीडिया पर गालियां मिलीं. अदालत ने भी कह दिया कि वह एससी-एसटी एक्ट पर संशोधन के फैसले पर स्टे नहीं देगी. अदालत का कहना था कि जो लोग आंदोलन कर रहे हैं उन्होंने फैसले को ठीक से नहीं पढ़ा है. लेकिन क्या बहुजनों के भारत बंद से खफा लोगों ने नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट पढ़ी है.…

बहुजन दूल्हे का दर्द- क्या मैं हिंदू नहीं हूं, मेरे लिए संविधान अलग है क्या ?

कासगंजः उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बसई बाबस गांव के रहने वाले बहुजन युवक संजय कुमार का दर्द बेहद गहरा है. शादी में हर युवक का सपना होता है कि उसकी बारात गाजे- बाजे से चढ़े लेकिन संजय के साथ ऐसा संभव नहीं है. उनकी शादी में करीब 20 दिन बचे हैं लेकि शादी विवाद में फंसती जा रही है. दरअसल संजय की होने वाली पत्नी कासगंज के निजामाबाद की रहने वाली हैं, जोकि एक ठाकुर बहुल गांव में रहतीं है. संजय चाहते हैं कि उनकी बारात गांव से होकर बैंड बाजे के साथ निकले लेकिन जातीय गर्व में झूम रहे ठाकुर इसका विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब…

बहुजन समुदाय के आंदोलन के बाद बैकफुट पर सरकार, अमित शाह की सफाई

SC/ST एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कल पूरे देश में भारत बंद रहा जिसका हर राज्य में असर दिखा। भाजपा पार्टी मुख्यालय में अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को पार्टी के नेताओं के साथ लंबी मीटिंग की। जिसके दौरान 2019 के चुनाव के मद्देनजर संगठन को मजबूत बनाने तथा भविष्य की अन्य रणनीति पर चर्चा हुई। केंद्र में दोबारा वापसी के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत टीम बनाने की रणनीति बनाई है। राहुल गांधी की ओर से आरएसएस और बीजेपी के डीएनए पर सवाल उठाने वाले ट्वीट के जवाब में शाह ने लिखा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी के डीएनए पर सवाल…

‘2 अप्रैल को भारत बंद’ क्या बहुजन क्रांति को धार देगा यह आंदोलन?

By: बी एल बौद्ध विमर्श। कल तक हमारे युवाओं का यह कहकर मजाक उड़ाया जाता था कि ये सोशल मीडिया के शेर हैं.इनकी दुनिया व्हाट्सएप्प और फेसबुक तक ही सीमित है, लेकिन आज पूरा बहुजन समाज हमारे इन सोशल मीडिया के शेरों को सैल्यूट कर रहा है कि इन्होंने वो कार्य करके दिखा दिया जिसके लिए बाबा साहेब अंबेडकर ने सपना देखा था एवं सपना ही नहीं देखा था बल्कि बाबा साहेब का सच्चा सन्देश था कि समाज को संगठित करो और संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करो। आज हमारे इन योद्धाओं ने पूरे समाज को एक जाजम पर लाकर बैठा दिया है यह कोई छोटा काम नहीं है…

बहुजन बस्ती में लगी आग, चार परिवार के घर बने राख

उत्तर प्रदेश। प्रतापगढ़ के शिवसत गांव की बहुजन बस्ती में आग लगने के कारण चार परिवारों के घर पल भर में राख का ढेर हो गये। उनकी गृहस्थी उनकी आंखों के सामने जलकर राख हो गई। आग पर काबू पाने के लिए ग्रामीणों को बहुत मशक्कत का सामना करना पड़ा जिसका कारण समय पर फायरब्रिगेड नहीं पहुंचना भी रहा। मिली जानकारी के अनुसार कंधई थाना क्षेत्र के शिवसत में बहुजन बस्ती के रहने वाले चंद्रिका प्रसाद, बद्री प्रसाद, पन्नालाल और संतलाल सगे भाई है। घर के बाहर छप्पर बना रखा है। जिसमे परिवार के सदस्यों के साथ ही खाना बनता है। मंगलवार दोपहर अचानक मकान…

कासगंज: बहुजन की बारात से ‘शांति में ख़तरा’, पुलिस ने नहीं दी इजाजत

कासगंज। उत्तर प्रदेश के कासगंज ज़िले में बड़ा विवाद कुछ दिन पहले ही सामने आय़ा था. अब बहुजनों से भेदभाव की बड़ी खबर सामने आयी है. निज़ामपुर गांव की रहने वाली शीतल की शादी संजय जाटव से तय हुई है. शीतल ठाकुर बहुल गांव में रहती हैं जहां बहुजनों की आबादी बहुत कम है. पर शीतल का मन है की उसकी बारात भी गाजे-बाजे के साथ आए और वो ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर से विदा हों. पर शीतल की इस ख़्वाहिश में शांति-व्यवस्था दिक्कत बन गई है. उनकी शादी इसी साल बीस अप्रैल को होनी है लेकिन वहां की पुलिस ने बारात निकालने की अनुमति नहीं दी है. उनके मंगेतर 27…

RSS से जुड़े पोस्टर में संत रविदास, वाल्मीकि को लिखा अस्पृश्य, भड़के बहुजन समाज के लोग

By: Ankur sethi उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में आरएसएस से जुड़े पोस्टर पर बड़ा बवाल खड़ा हो गया. उस पोस्टर में वाल्मीकि, संत रविदास के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए गया है. इस पोस्टर के सोशल मीडिया में आने के बाद खासा विवाद पैदा हो गया है. बहुजन समाज ने इस पोस्टर का खुलकर विरोध किया. दरअसल 25 फरवरी को मेरठ में आरएसएस का सबसे बड़ा समागम होने जा रहा है. जिससे पहले मेरठ शहर को तरह- तरह के पोस्टरों से पाटा जा रहा है. शहर में कुछ पोस्टर्स ऐसे लगाए गए जिनमें लिखा है, ‘हिंदू धर्म की जैसे प्रतिष्ठा, वसिष्ठ जैसे ब्राह्मण,…