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Delhi Police

पॉन्डिचेरी से ऑक्सफोर्ड तक के विश्वविद्यालय परिसरों में जेएनयू हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

देश और विदेश के तमाम विश्वविद्यालयों में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय हिंसा के खिलाफ सोमवार को प्रदर्शन किया गया. पॉन्डिचेरी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों ने प्रदर्शन किए.ऑक्सफोर्ड और कोलंबिया विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने एकजुटता दिखाते हुए मार्च किया और परिसर में छात्रों की सुरक्षा की मांग की.

JNU हिंसा: मोदी जी और शाह जी ने 90 साल बाद दिला दी नाजी शासन की याद

कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हमला करने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ''मोदी जी और अमित शाह जी ने छात्रों पर दमन चक्र चलाकर नाजी शासन की याद 90 साल बाद दिला दी. जिस तरह से छात्रों, छात्राओं और शिक्षकों पर हमला किया गया और जिस प्रकार पुलिस मूकदर्शक बनी रही, वह दिखाता है कि देश में प्रजातंत्र का शासन नहीं बचा है.'' उन्होंने कहा, ''युवा प्रजातंत्र और संविधान पर हमले

JNU में कैसे हुई हिंसा? छात्रों और रिपोर्टर ने बताई ‘आंखों देखी’

हम लगभग 8.30 बजे जेएनयू मुख्य द्वार पर पहुँचे। जेएनयू मेन गेट तक जाने वाली बेर सराय चिल्ड्रन पार्क (यानी बाबा गंगनाथ मार्ग) की सड़क पूरी तरह से अंधेरी थी। हमने देखा कि उस सड़क पर सभी स्ट्रीट लाइट को बंद कर दिया गया था। मुख्य गेट के पास पुलिस बल की भारी तैनाती थी। साथ ही पुलिस कम से कम सौ गुंडों के साथ खड़ी थी, जिनमें से कई ने लाठियां बरसाईं। उन्होंने मुख्य द्वार को अवरुद्ध कर दिया था, जेएनयू को नक्सल विश्वविद्यालय कहने के नारे लगा रहे थे, भारत माता की जय का नारा लगा रहे थे। गोल्लि मारों सौलन को। नारे लगाए जा रहे थे जिससे

दिल्ली के यूपी भवन पहुंचे छात्र और नेता सब गिरफ्तार, क्या विरोधियों को सबक सिखा रहे हैं शाह ?

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। पुलिस प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने के लिए कथित तौर पर घरों पर दबिश दे रही है और प्रदर्शनकारियों के परिजनों से मारपीट और बदसलूकी कर रही है। पुलिस की इसी बर्बर कार्रवाई के ख़िलाफ़ शुक्रवार को जामिया यूनिवर्सिटी के साथ और भी कई यूनिवर्सिटीज़ के छात्र संगठनों ने दिल्ली स्थित यूपी भवन पर धरना प्रदर्शन का आयोजन किया। लेकिन पुलिस ने छात्रों को प्रदर्शन नहीं करने दिया। जो भी छात्र प्रदर्शन करने

जामिया हिंसा पर आई रिपोर्ट: दिल्ली पुलिस जिम्मेदार, रिपोर्ट को नाम दिया- द ब्लडी संडे 2019

PUDR यानि कि पीपुल्स यूनियन डेमोक्रेटिक फॉर राइटस के छह सदस्यीय टीम ने 13 और 15 दिसंबर 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के परिसर में पुलिस की बर्बरता की घटनाओं में 16-19 दिसंबर 2019 तक चार दिवसीय तथ्य-खोज की। विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में क्रूरताएँ हुईं। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के खिलाफ, संसद द्वारा 11 दिसंबर 2019 को पारित किया गया। रिपोर्ट हमारी जांच पर आधारित है, पुलिस आतंक की तस्वीर प्रदान करती है और पुलिस को असहमति व्यक्त करने के लिए कानूनन बल के रूप में मंजूरी दी जाती है। PUDR ने परिसर में कई

जामिया हिंसा मामले में 10 लोग गिरफ्तार, कोई छात्र नहीं, तो छात्रों को पुलिस ने क्यों पीटा?

जामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों द्वारा ‘कथित’ हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि, इन 10 गिरफ्तार लोगों में एक भी ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया’ का छात्र नहीं है। इन सभी गिरफ्तार लोगों का कोई न कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड है। अब सवाल है कि हिंसा सड़क पर हुई, बसें सड़क पर जलीं और उन्हें जलाने वाले जामिया के छात्र नहीं थे, तो फिर दिल्ली पुलिस जामिया के कैम्पस में घुसकर छात्रों पर लाठियां क्यों भांज रही थी? छात्रों को लाइब्रेरी के अंदर डेस्क के नीचे शरण लिए छात्रों को बाहर

जेएनयू आपको थोड़ा और संवेदनशील मनुष्य बनाता है!

दिल्ली के जाने-मानेविश्विद्यालय में फीस वृद्धि को लेकर जेएनयू छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर रहे है. वही जेएनयू छात्र जयंत जिज्ञासु ने खत लिखा मुझे 5000 की फ़ेलोशिप मिलती है. रहने का खर्च लगभग नगण्य है. हॉस्टल में तीन वक़्त के भोजन पर 22-24 सौ रुपये खर्च होते हैं. हज़ार रुपये दोस्तों के साथ चाय-नाश्ते पर पांच सौ के आसपास यातायात पर और हज़ार रुपये कलम-काग़ज़-किताब पर. दोस्त अगर साथ लेकर चल पड़े तो कपड़े साल में एकाध बार ख़रीद लिए तो ठीक ही काम चल जाता है. साइकिल से चलता हूँ इसका अपना ही आनंद है. पिताजी मिड्ल स्कूल के टीचर के रूप में

काले कोर्ट और खाकी की लड़ाई SC का किसके पक्ष में फैसला?

दिल्ली में बुलंद कुछ नहीं बचा ना इंसानियत ना इमान ना भाईचारे का पैगाम पुलिस और वकिल की लड़ाई से बढ़ते हुए बवाल ने सब कुछ खाक कर दिया. एक तरफ दंगाई के मनसूबे ने पुलिस को पिट पिटकर अधमरा कर दिया. इसलिए पुलिस पूछ रही है गम हम इंतजार में इंसाफ की तारिख भी मुकर्रर होनी चाहिए. बीते कल हुआ क्या. दिल्ली पुलिस सड़को पर उतर आएं. जो पुलिस लोगों के सुरक्षा के लिए आधी रात तक ड्यूटी पर तैनात रहती है. बीबी बच्चों को छोड़कर चौकी पर तैनात रहती है. लोगों का सुरक्षा का इंतजाम करती है. हो रहे आपस में लड़ाई को सुलझाती है. लेकिन वहीं पुलिस कल

After 87 years it’s just the oppressor that has changed; Recalling Bhagat Singh and Police Brutality

Nearly after 9 decades, on the day of shahadat diwas, the young, passionate and determined generation of our country are risking their lives, careers, and putting every opportunity at stake for us, so that our children also receive affordable education, so that children don’t have to study tampered, so that the democratic sensibilities of our country isn’t destroyed.