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Delhi

झारखंड चुनाव से बीजेपी डरी?

पिछले दिनों महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों के नतीजे आये,तब राजनैतिक कार्यकर्ताओं को झटका लगा कि जनता आखिर चाहती क्या है . कुछ ही महीने पहले लोकसभा चुनाव में बीजेपी और उसके गठबंधन को बड़ी सफलता मिली थी. इस सफलता से बीजेपी के मंसूबे का बढ़ जाना अस्वाभाविक नहीं था. लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव जनता के अलग ही मूड का परिचय दे रहे हैं. कहा जा सकता है कि बीजेपी के मन में कोई दुचित्तापन है. केंद्र और राज्य केलिए उसकी पसंद अलग -अलग है. 2014 में भी लोकसभा चुनाव के कुछ ही समय बाद दिल्ली विधानसभा के चुनाव में जनता ने

PMC बैंक के बाद, अब दिल्ली के सहकारी बैंको का घोटाला?

दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक की हालत क्या पीएमसी बैंक जैसी हो रही है. ये सवाल इसलिए क्योंकि दिल्ली सरकार के रजिस्ट्रार ऑफ कॉपरेटिव सोसाइटीज ने दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक के सीईओ के खिलाफ मामला चलाने की इजाजत दी है. आरसीएस ने उन्हें बैंक ऑडिट टीम प्रमुख के कार्यकाल के दौरान कई तरह की गड़बड़ियों का दोषी पाया है. बताया जा रहा है कि इन गड़बड़ियों के कारण बैंक के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स ए .न.पी में तेजी से इजाफा हुआ और बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा. रजिस्ट्रार ऑफ कॉपरेटिव सोसाइटीज ने दिल्ली असेंबली के एक पैनल को मंगलवार को मामले की

आरएसएस की शाखा में खड़े प्रोफेसर विवेक कुमार के फोटो का क्या है असली सच पढ़िये…

By~ अशोक दास, सोशल एक्टीविस्ट बीते 48 घंटों से सोशल मीडिया पर एक बार फिर जवाहर लाल नेहरू युनिवर्सिटी के प्रोफेसर विवेक कुमार की एक फोटो घूम रही है। इस फोटो में विवेक कुमार आरएसएस के मंच से अपनी बात रख रहे हैं। इसके आधार पर दुष्प्रचार किया जा रहा है। कि प्रोफेसर विवेक कुमार आरएसएस के एजेंट हैं। यह तस्वीर पहली बार सामने नहीं आई है। बीते साल पहले भी कुछ लोगों ने उस तस्वीर को फेसबुक पर शेयर कर प्रोफेसर विवेक कुमार के बारे में दुष्प्रचार करने की कोशिश की थी।अमूमन मैं किसी मसले पर जल्दी कोई कमेंट करने से बचता हूं। लेकिन चूंकि…

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में डॉ. आंबेडकर की क्या राय…

आजादी से 1 वर्ष पहले 1946 में डॉ. आंबेडकर ने लिखा कि “ हिंदुओं और मुसलामनों की लालसा स्वाधीनता की आकांक्षा नहीं हैं. यह सत्ता संघर्ष है,जिसे स्वतंत्रता बताया जा रहा है.. कांग्रेस मध्यवर्गीय हिंदुओं की संस्था है, जिसकों हिदू पूंजीपतियों की समर्थन प्राप्त है, जिसका लक्ष्य भारतीयों की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि ब्रिटेन के नियंत्रण से मुक्त होना और सत्ता प्राप्त कर लेना है, जो इस समय अंग्रेजों की मुट्ठी में हैं.” ( डॉ, आंबेडकर, संपूर्ण वाग्यमय, खंड-17, पृ.3 ). मुसलमान... मध्यवर्गीय हिंदुओं के वर्चस्व से मुक्ति के लिए अलग…