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DR.B.R.Ambedkar

डॉ बाबासाहब और ओबीसी का रिश्ता ?”

इस देश में ओबीसी का 'संवैधानिक जन्मदाता' और 'संवैधानिक रखवाला' कोई और नहीं बल्कि " बाबासाहब डॉ आंबेडकर'' ही हैं ! 1928 में बाम्बे प्रान्त के गवर्नर ने 'स्टार्ट' नाम के एक अधिकारी की अध्यक्षता में पिछड़ी जातियों के लिए एक कमिटी नियुक्त की थी. इस कमिटी में डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर ने ही शूद्र वर्ण से जुडी जातियों के लिए " OTHER BACKWARD CAST " शब्द का सर्वप्रथम उपयोग किया था, इसी शब्द का शार्टफॉर्म ओबीसी है !! जिसको सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ी हुई जाति के रूप में आज हम पहचानते है और उनको पिछड़ी जाति या ओबीसी कहते

फूले से लेकर फूलन तक

मैं जब भी कभी महिलाओं के बारे में सोचती हूँ तो एक तरफ मुझे फूले दम्पत्ति-फातिमा शेख़ दिखते हैं और दूसरी तरफ फूलन दिखती हैं. ज्योतिबा फूले साहब- सावित्री बाई- फातिमा शेख ने महिलाओं के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया और उन्होंने महिलाओं को पढ़ाकर समाज को बेहतरी की तरफ ले जाने की कोशिश की. जहाँ पिछड़े वर्ग के माली समाज से आने वाले फूले साहब लड़कियों को अपने हिस्से का दावा करने के लिए एक उम्मीद प्रेरणा और हाथ में किताब देते हैं. वहीं पर जब हम लड़कियाँ फूलन को पढ़ती हैं तो मन में सवाल उठता है कि आखिर वो किस जाति किस समाज के

अमेरिका में “रन फॉर अंबेडकर” ने रचा इतिहास, जिसमें अम्बेडकर के लिए हज़ारों लोग दौड़े

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हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाएंगी बीएसपी प्रमुख मायावती

BY: JYOTI KUMARI महाराष्ट्र के नागपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने पहुंचीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को बड़ा ऐलान किया है। मायावती ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की तरह ही वह भी हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म) अपना लेंगी। हालांकि, ये फैसला वह सही और उचित समय पर लेंगी। इतना ही नहीं, उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र बताया था। न्यूज 18 में छपी खबर के अनुसार नागपुर में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा, ‘आप लोग मेरे धर्म

एक नई सुबह का पैगाम लेकर आया नेशनल इंडिया न्यूज

आएगी इंसाफ की हुक्मरानीअब न बहेगा ख़ू होकर पानीउठ रौशनी का लहरा दे परचमकर दे ये दुनिया पुरानीएक नई सुबह का पैगाम लेकर आएगा नेशनल इंडिया न्यूज.. नेशनल इंडिया न्यूज 1 मिलियन के मुकाम पर पहुंच गया है डेर सारे फोन कौल्स आ रहे हैं हमें बधाई दे रहे हैं लेकिन इसके हकदार आप लोग खुद हैं जो हमें नियमित रूप से देखते हैं. शुक्रिया तूफानों से भरे इस दौर में हमारी इस छोटी सी किश्ती को आपने ही थामे रखा. मैं किसी औपचारिकता के नाते आप दर्शकों की अहमीयत को रेखांकित नहीं कर रहा हूं. आप वो हैं जो मेरे और नेश्नल इंडिया न्यूज के लिए वक्त

Explained: Supreme Court SC/ST judgment, in review

By~ Faizan Mustafa On Tuesday, the Supreme Court recalled its directions in a March 20, 2018 verdict that had effectively diluted provisions of arrest under the Scheduled Castes & Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989. This was following a plea by the Centre seeking a review of that judgment. What is review of a judgment? ‘Review’ of a Supreme Court judgment is done by the same Bench. ‘Overruling’ means that the law laid down in one case is overruled in another case. When a higher court on appeal