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मुस्लिम पक्ष का ऐलान, अयोध्या पर दोबारा हो फैसला ?

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पीटिशन को लेकर मुस्लिम पक्ष दो धड़ों में बंट गया है. मामले में पक्षकार रहे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने रविवार 17 नवंबर को हुई बैठक में रिव्यू पीटिशन दाखिल करने से साफ इनकार कर दिया. दूसरी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एआईएमपीएलबी ने रविवार को फैसला किया कि वह अयोध्या जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा. और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एआईएमपीएलबी की बैठक में यह फैसला लिया गया. कि एआईएमपीएलबी ने कहा कि

मुफ्त नहीं, निशुल्क शिक्षा चाहिए!

मुफ्त शिक्षा किसी के खैरात की मांग जैसी है. जबकि निशुल्क शिक्षा मतलब बिना शुल्क लगाए शिक्षा पहला भीख जैसी मांग है. दूसरा प्राकृतिक अधिकार की मांग है. हम सभी जानते हैं कि सरकारों के पास जो पैसा आता है. उसके तीन मूल स्रोत हैं पहला जनता पर लगने वाले विभिन्न तरह के कर दूसरा देश के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल या बिक्री से होने वाली आय. तीसरा दूसरे देशों को वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात से होने वाली आय. भारत में एक चौथा आय का स्रोत बची-खुची सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनिया हैं कुछ अन्य आय. इन सभी आयों की मालिक जनता है. जिसे

आखिर 40 साल में पहली बार उपभोक्ताओं के खर्च में गिरावट क्यों आई!

सरकारी सर्वे में ये एक नई बात सामने आई है. कि पिछले 40 सालों में पहली बार साल 2017-18 में उपभोक्ताओं की खर्च सीमा में गिरावट देखन को मिली है और इसका प्रमुख कारण ग्रामीण इलाकों में मांग में आई कमी है. बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार भारत में घरेलू उपभोक्ता व्यय नामक राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय एनएसओ की लीक को सर्वे में कथित तौर पर दिखाया गया है. कि किसी भारतीय द्वारा एक महीने में खर्च की जाने वाली औसत राशि साल 2017-18 में 3.7 फीसदी कम होकर 1446 रुपये रह गई है. जो कि साल 2011-12 में 1501 रुपये थी. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार

क्या जेएनयू की फीस बढाने के समर्थक सार्वजनिक धन की इस लूट पर भी खामोश बने रहेंगे?

आम खाताधारकों पर मिनिमम बैलेंस के लिए पेनाल्टी और ज्यादा ट्रांजेक्शन करने पर तुरंत चार्ज लगाने वाले एसबीआई ने पिछले पांच साल मे कुल 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का लोन राइट-ऑफ किया है. कि आम आदमी को लूटने ओर कारपोरेट को बांटने की नीति मोदी सरकार में खूब परवान चढ़ रही है. और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा पिछले दो साल में राइट-ऑफ किया गया है. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 2016-17 में 20 हजार,339 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टा खाते डाल दिया था उस वक्त भी यह

दिल्ली के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा वह आपातकालीन इस आपातकालीन से अच्छी थी

राजधानी दिल्ली में लोगों का प्रदूषण से बुरा हाल हो रखा है और हवा में कोई सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा है.आज भी दिल्ली के कई शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरे के निशान से उपर है. दरअसल पिछले सप्ताह कुछ दिन हवा की स्थिति ठीक रहने से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से थोड़ी राहत जरूर मिली थी. लेकिन रविवार के बाद से दिल्ली की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और इसी जहरीली हवा के चलते लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. अगर हम अब की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर में नोएडा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. जहां AQI 482

भारत की भुखमरी में मोदी सरकार ने तोड़ा दुनिया का रिकाॅर्ड

किसी भी देश में स्वास्थ्य का अधिकार जनता का सबसे पहला बुनियादी अधिकार होता है. लेकिन भारत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में रोज़ाना हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. पृथ्वी पर हर एक इंसान का पेट भरने लायक पर्याप्त भोजन का उत्पादन हो रहा है. लेकिन फिर भी विश्व के कुछ हिस्सों में भुखमरी बढ़ती जा रही है और 82 करोड़ से ज़्यादा लोग "लगातार कुपोषण का शिकार" बने हुए हैं. दुनिया में हर इंसान को पर्याप्त भोजन मिले ये सुनिश्चित करने के लिए आख़िर क्या क़दम उठाए जा रहे हैं. 2019 के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत दुनिया के उन 45

मजदूरी और अशिक्षा के शिखर पर बहुजन बच्चों का कैसा ये बाल दिवस

ब्राह्मण ठाकुर और वैश्य समाज में गरीब होंगे. लेकिन उनके बच्चे मजदूरी नही करते उनके बच्चे बाल मजदूर नही हैं. बाल मजदूर सिर्फ ओबीसी एससी एसटी और मुसलमान समुदाय में मिलेंगे. मुसलमान में भी केवल भारतीय मूल के मुसलमान बेहद गरीब हैं. अशरफ(विदेशी मूल) समुदाय के मुसलमानों के बच्चे तो विदेशों में पढ़ते हैं. उनके बाप दादा हर बड़ी छोटी पार्टी में नेता हैं . भारत में 1,60,00,000 बाल मजदूर हैं. जिनकी उम्र 5 से 14 साल के बीच है. पढ़ाई लिखाई खेलने कूदने की उम्र में उन्हें श्रम करना होता है. तब जाकर उन्हें दो वक़्त की रोटी नसीब होती है .

बच्चे विश्वविद्यालयों में मारे जाते रहें, तो बाल-दिवस कैसे मनाएं?

आईआईटी मद्रास में एमए फस्ट ईयर की एक छात्रा ने रहस्यमयात्मक तौर से आत्महत्या कर ली है. आत्महत्या करने वाली छात्रा का नाम फातिमा लतीफ है. और केरल के कोल्लम जिले की रहने वाली थी और वो ह्यूमैनिटीज एंड डिवेलपमेंट स्टडीज इंटीग्रेटेड विषय में एमए फस्ट ईयर की छात्रा थी.और अपने क्लास में सबसे टॉपर थी. आशंका जताई जा रही है कि छात्रा ने एक प्रोफेसर के दबाव में आकर आत्महत्या की है. परिजनों के मुताबिक जिस प्रोफेसर पर आरोप है वो छात्रों को परेशान करता था. फातिमा लतीफ कोई आम लड़की नहीं थी. देश की प्रतिभा थी. एंट्रेंस टेस्ट की टॉपर

अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना आखिरी फैसला सुनाया !

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने आज 9 nov 2019 को अयोध्या केस पर फैसला सुनाया. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 45 मिनट तक फैसला पढ़ा और कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए और इसकी योजना 3 महीने में तैयार की जाए. कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया और कहा कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन आवंटित की जाए. वहीं वरिष्ठ पर्कार प्रोफेसर दिलीप मंडल ट्विटर पर लिखते हैं कि . आज मंदिर की बात न करें. मंदिर उनका एजेंडा है. उनके मैदान में न खेलें. न पक्ष में, न विपक्ष