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HYDERABAD RAPE CASE

हैदराबाद केस में जश्न मनाने वाले कही गलत तो नही !

11 दिन से उबलता हैदराबाद अब शांत हो गया है. क्या सच में हैदराबाद पीड़िता को इंसाफ मिल गया. क्या एनकाउटर में मारे गए चारों आरोपी ही असली दोषी थे. खैर पुलिस किसी को बचाने और अपनी नाकामी छिपाने के लिए किसी बी हद तक जा सकती है. अगर सच में असली दोषी वहीं थे. तो बाकी सब मामलों में भी पुलिस कोर्ट कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए. सबका एनकाउंटर कर अदालत का किमती वक्त बचाने के आलावा हर रेप पीड़िता को त्वरित इंसाफ मिल जाए. मुझे तो पुरी कहानी किसी फिल्म की तरह पहले से स्कीरिपटेड लगती है. जहां किसी रसूखदार को बचाने के लिए पुलिस किसी

मैं कहता आंखन देखी : फैसला ‘ऑन द स्पॉट’ का निहितार्थ

सोशल मीडिया पर अब यह खबर वायरल हो चुकी है कि तेलंगाना पुलिस ने उन चार आरोपियों को मार गिराया है. जिनके उपर प्रियंका रेड्डी नामक एक महिला पशु चिकित्सक के साथ बलात्कार के बाद जिंदा जला देने का आरोप था. पुलिस ने यह कारनामा आज 6 दिसंबर, 2019 को सुबह 3 बजे किया. पुलिस का कहना है कि चारों अपराधी भाग रहे थे और इसी क्रम में उन्हें मार दिया गया. जाहिर तौर पर इस खबर से देश के वे लोग जश्न में डूब गए हैं जो यह मानते हैं कि हाथ के बदले हाथ और आंख के बदले आंख के जरिए ही अपराध पर नियंत्रण पाया जा सकता है. उनके लिए संविधान कोई मायने

रेप मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र और मीडिया संस्थानों को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में मीडिया संस्थानों पर पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने केंद्र सरकार, तेलंगाना सरकार, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई), फेसबुक इंडिया, ट्विटर, न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, ऑपइंडिया डॉट कॉम, न्यू इंडियन एक्सप्रेस और