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JNU VOILENCE

पॉन्डिचेरी से ऑक्सफोर्ड तक के विश्वविद्यालय परिसरों में जेएनयू हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

देश और विदेश के तमाम विश्वविद्यालयों में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय हिंसा के खिलाफ सोमवार को प्रदर्शन किया गया. पॉन्डिचेरी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों ने प्रदर्शन किए.ऑक्सफोर्ड और कोलंबिया विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने एकजुटता दिखाते हुए मार्च किया और परिसर में छात्रों की सुरक्षा की मांग की.

आपको क्या लगता है कि एकलव्य का अंगूठा काटने वाला द्रोणाचार्य सिर्फ कहानियों में था?

By- श्याम मीरा सिंह सबसे पहले जेनएयू पर हुए आतंकी हमले पर जश्न मनाने वालों के सरनेम पढ़िए, "शुक्ला, दुबे, चतुर्वेदी, जादौन, तोमर, चौधरी, राजपूत, गुर्जर, पांडे, त्रिवेदी, त्रिपाठी, सिंह, मिश्रा, शर्मा" आदि ही क्यों हैं? आपने सोचा? अहीर क्यों नहीं है? जाटव क्यों नहीं है? कुमार क्यों नहीं है? वाल्मीकि क्यों नहीं है? नाई क्यों नहीं है? धोबी क्यों नहीं है? मीणा क्यों नहीं है? दरअसल इस देश का सड़ चुका "अपरकास्टवाद" हिंदूवाद के भेष में आपके घरों, विश्विद्यालयों में पहुंच चुका है. राष्ट्रवाद और हिंदूवाद की आड़ में ये लड़ाई, ऊंची

JNU: व्हाट्सएप संदेशों से योजना बनाकर हमला करने वाले ABVP कार्यकर्ताओं का पता लग गया

रविवार की शाम 7.03 बजे, व्हाट्सएप मैसेजिंग सेवा पर एक समूह चर्चा के लिए एक संदेश भेजा गया था: "Saalo ko hostel mein ghush ke tode।" हमने उनके हॉस्टल में प्रवेश किया और उनके साथ मारपीट की। समूह के एक अन्य प्रतिभागी ने जवाब दिया: "बिल्कुल, यह एक बार और सभी के लिए चीजों को निपटाने का समय है। अगर हम उन्हें अभी नहीं मारेंगे, तो कब? 'कोमियो' ने गंदगी फैला दी है। शाम 6 बजे के आसपास, एक नकाबपोश भीड़ रॉड से लैस जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर के अंदर हॉस्टल में घुस गई थी। वीडियो फुटेज में नकाबपोश हमलावरों से दहशत में भाग

जामिया के बाद अब जेएनयू के गर्ल्स हॉस्टल में गुंडों की तानाशाही

BY: Kanaklata Yadav आज शाम में हम लोग साबरमती ढाबे पर इकट्ठा थे, मुझे बाहर से खबर मिली कि बाहर बहुत से लोग मार पीट करने के लिए इकट्ठा हैं, काफी लोग कैंपस में भी घुस चुके हैं और आज रात में कुछ भी हो सकता है, आप लोग बच कर रहिये। हम लोग ये सब सुन ही रहे थे और जेएनयूटीए के पीस मार्च में शामिल होने वाले थे। हम और हमारे कई साथी साबरमती ढाबे पर चाय पी रहे थे, मुझे बाथरूम जाना था तो मैं साबरमती होस्टल में चली गई। बाथरूम के अंदर ही मुझे बाहर की आवाजें सुनाई देने लगीं, लोगों के चीखने भागने, गली गालौज और बदहवास भागती लड़कियों की