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राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म की आड़ में अपने वर्चस्व को बचाने, सवर्णों की खतरनाक राजनीति

BY: SHYAM MEERA SINGH सबसे पहले जेएनयू पर आतंकवादी हमले का जश्न मनाने वालों के उपनामों को पढ़ें, "शुक्ला, दुबे, चतुर्वेदी, जादौन, तोमर, चौधरी, राजपूत, गुर्जर, पांडे, त्रिवेदी, त्रिपाठी, सिंह, मिश्रा, शर्मा" आदि वे क्यों हैं? आपने सोचा अहीर क्यों नहीं है? जाटव क्यों नहीं? कुमार क्यों नहीं? वाल्मीकि क्यों नहीं? नाई क्यों नहीं है? धोबी क्यों नहीं? मीना क्यों नहीं है? वास्तव में, इस देश का सड़ा हुआ "अपरकेस" हिंदू धर्म की आड़ में आपके घरों, विश्वविद्यालयों तक पहुंच गया है। राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म की आड़ में ये लड़ाई

JNU: व्हाट्सएप संदेशों से योजना बनाकर हमला करने वाले ABVP कार्यकर्ताओं का पता लग गया

रविवार की शाम 7.03 बजे, व्हाट्सएप मैसेजिंग सेवा पर एक समूह चर्चा के लिए एक संदेश भेजा गया था: "Saalo ko hostel mein ghush ke tode।" हमने उनके हॉस्टल में प्रवेश किया और उनके साथ मारपीट की। समूह के एक अन्य प्रतिभागी ने जवाब दिया: "बिल्कुल, यह एक बार और सभी के लिए चीजों को निपटाने का समय है। अगर हम उन्हें अभी नहीं मारेंगे, तो कब? 'कोमियो' ने गंदगी फैला दी है। शाम 6 बजे के आसपास, एक नकाबपोश भीड़ रॉड से लैस जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर के अंदर हॉस्टल में घुस गई थी। वीडियो फुटेज में नकाबपोश हमलावरों से दहशत में भाग

JNU में कैसे हुई हिंसा? छात्रों और रिपोर्टर ने बताई ‘आंखों देखी’

हम लगभग 8.30 बजे जेएनयू मुख्य द्वार पर पहुँचे। जेएनयू मेन गेट तक जाने वाली बेर सराय चिल्ड्रन पार्क (यानी बाबा गंगनाथ मार्ग) की सड़क पूरी तरह से अंधेरी थी। हमने देखा कि उस सड़क पर सभी स्ट्रीट लाइट को बंद कर दिया गया था। मुख्य गेट के पास पुलिस बल की भारी तैनाती थी। साथ ही पुलिस कम से कम सौ गुंडों के साथ खड़ी थी, जिनमें से कई ने लाठियां बरसाईं। उन्होंने मुख्य द्वार को अवरुद्ध कर दिया था, जेएनयू को नक्सल विश्वविद्यालय कहने के नारे लगा रहे थे, भारत माता की जय का नारा लगा रहे थे। गोल्लि मारों सौलन को। नारे लगाए जा रहे थे जिससे

जामिया के बाद अब जेएनयू के गर्ल्स हॉस्टल में गुंडों की तानाशाही

BY: Kanaklata Yadav आज शाम में हम लोग साबरमती ढाबे पर इकट्ठा थे, मुझे बाहर से खबर मिली कि बाहर बहुत से लोग मार पीट करने के लिए इकट्ठा हैं, काफी लोग कैंपस में भी घुस चुके हैं और आज रात में कुछ भी हो सकता है, आप लोग बच कर रहिये। हम लोग ये सब सुन ही रहे थे और जेएनयूटीए के पीस मार्च में शामिल होने वाले थे। हम और हमारे कई साथी साबरमती ढाबे पर चाय पी रहे थे, मुझे बाथरूम जाना था तो मैं साबरमती होस्टल में चली गई। बाथरूम के अंदर ही मुझे बाहर की आवाजें सुनाई देने लगीं, लोगों के चीखने भागने, गली गालौज और बदहवास भागती लड़कियों की

सावरकर के सपनों का नहीं, बल्कि भगत सिंह और अंबेडकर के सपनों का भारत बनाना है: कन्हैया कुमार

पूर्णिया के इंदिरा गांधी स्टेडियम में सीएए और एनआरसी के विरोध में आयोजित इस जन प्रतिरोध रैली को संबोधित करते हुए कन्हैया ने कहा कि CAA और NRC के खिलाफ यह लड़ाई एक दिन की नहीं है..यह लड़ाई लंबी चलेगी। https://twitter.com/kanhaiyakumar/status/1206564754837213185?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1206564754837213185&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.jansatta.com%2Ftrending-news%2Fvideo-kanhaiya-kumar-slogans-aazadi-against-nrc-caa%2F1255419%2F CAA और NRC को ‘संविधान की आत्मा पर हमला’ बताते हुए कन्हैया ने

जेएनयू आपको थोड़ा और संवेदनशील मनुष्य बनाता है!

दिल्ली के जाने-मानेविश्विद्यालय में फीस वृद्धि को लेकर जेएनयू छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर रहे है. वही जेएनयू छात्र जयंत जिज्ञासु ने खत लिखा मुझे 5000 की फ़ेलोशिप मिलती है. रहने का खर्च लगभग नगण्य है. हॉस्टल में तीन वक़्त के भोजन पर 22-24 सौ रुपये खर्च होते हैं. हज़ार रुपये दोस्तों के साथ चाय-नाश्ते पर पांच सौ के आसपास यातायात पर और हज़ार रुपये कलम-काग़ज़-किताब पर. दोस्त अगर साथ लेकर चल पड़े तो कपड़े साल में एकाध बार ख़रीद लिए तो ठीक ही काम चल जाता है. साइकिल से चलता हूँ इसका अपना ही आनंद है. पिताजी मिड्ल स्कूल के टीचर के रूप में

क्या जेएनयू की फीस बढाने के समर्थक सार्वजनिक धन की इस लूट पर भी खामोश बने रहेंगे?

आम खाताधारकों पर मिनिमम बैलेंस के लिए पेनाल्टी और ज्यादा ट्रांजेक्शन करने पर तुरंत चार्ज लगाने वाले एसबीआई ने पिछले पांच साल मे कुल 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का लोन राइट-ऑफ किया है. कि आम आदमी को लूटने ओर कारपोरेट को बांटने की नीति मोदी सरकार में खूब परवान चढ़ रही है. और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा पिछले दो साल में राइट-ऑफ किया गया है. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 2016-17 में 20 हजार,339 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टा खाते डाल दिया था उस वक्त भी यह

बच्चे विश्वविद्यालयों में मारे जाते रहें, तो बाल-दिवस कैसे मनाएं?

आईआईटी मद्रास में एमए फस्ट ईयर की एक छात्रा ने रहस्यमयात्मक तौर से आत्महत्या कर ली है. आत्महत्या करने वाली छात्रा का नाम फातिमा लतीफ है. और केरल के कोल्लम जिले की रहने वाली थी और वो ह्यूमैनिटीज एंड डिवेलपमेंट स्टडीज इंटीग्रेटेड विषय में एमए फस्ट ईयर की छात्रा थी.और अपने क्लास में सबसे टॉपर थी. आशंका जताई जा रही है कि छात्रा ने एक प्रोफेसर के दबाव में आकर आत्महत्या की है. परिजनों के मुताबिक जिस प्रोफेसर पर आरोप है वो छात्रों को परेशान करता था. फातिमा लतीफ कोई आम लड़की नहीं थी. देश की प्रतिभा थी. एंट्रेंस टेस्ट की टॉपर

सस्ती पढ़ाई का हक मांगने पर जेएनयू छात्रों को पड़ा मंहगा ?

दिल्ली के JNU में छात्रों ने प्रशासन को लेकर जंग शुरू करदी है... छात्रो के हिसाब से सरकार JNU को बंद करने में जुटी है. साथ ही सरकार छात्रों की अवाज दबाने में लगी हुई है. जिसे लेकर छात्रों ने धरना प्रदर्शन किया... जहां पुलिस और छात्रों में जंग का महौल देखा जा सकता है. पुलिस छात्रों को आतंकवाद की तरहा मिटाने में जुटी हुई है. मानें युनिवर्सिटी जंग का मैदान बन गई है. इसी को लेकर आज ट्वीटर पर भी काफी गरमा गरमी देखने को मिली. कई जाने माने हस्तियों ने छात्रो का पक्ष लेते हुए ट्वीट भी किया.