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राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म की आड़ में अपने वर्चस्व को बचाने, सवर्णों की खतरनाक राजनीति

BY: SHYAM MEERA SINGH सबसे पहले जेएनयू पर आतंकवादी हमले का जश्न मनाने वालों के उपनामों को पढ़ें, "शुक्ला, दुबे, चतुर्वेदी, जादौन, तोमर, चौधरी, राजपूत, गुर्जर, पांडे, त्रिवेदी, त्रिपाठी, सिंह, मिश्रा, शर्मा" आदि वे क्यों हैं? आपने सोचा अहीर क्यों नहीं है? जाटव क्यों नहीं? कुमार क्यों नहीं? वाल्मीकि क्यों नहीं? नाई क्यों नहीं है? धोबी क्यों नहीं? मीना क्यों नहीं है? वास्तव में, इस देश का सड़ा हुआ "अपरकेस" हिंदू धर्म की आड़ में आपके घरों, विश्वविद्यालयों तक पहुंच गया है। राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म की आड़ में ये लड़ाई

हैदराबाद केस में जश्न मनाने वाले कही गलत तो नही !

11 दिन से उबलता हैदराबाद अब शांत हो गया है. क्या सच में हैदराबाद पीड़िता को इंसाफ मिल गया. क्या एनकाउटर में मारे गए चारों आरोपी ही असली दोषी थे. खैर पुलिस किसी को बचाने और अपनी नाकामी छिपाने के लिए किसी बी हद तक जा सकती है. अगर सच में असली दोषी वहीं थे. तो बाकी सब मामलों में भी पुलिस कोर्ट कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए. सबका एनकाउंटर कर अदालत का किमती वक्त बचाने के आलावा हर रेप पीड़िता को त्वरित इंसाफ मिल जाए. मुझे तो पुरी कहानी किसी फिल्म की तरह पहले से स्कीरिपटेड लगती है. जहां किसी रसूखदार को बचाने के लिए पुलिस किसी

रेप मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र और मीडिया संस्थानों को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में मीडिया संस्थानों पर पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने केंद्र सरकार, तेलंगाना सरकार, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई), फेसबुक इंडिया, ट्विटर, न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, ऑपइंडिया डॉट कॉम, न्यू इंडियन एक्सप्रेस और