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क्या एक सिक्के के दो पहलू हैं बीजेपी और कांग्रेस?

Published by- Aqil Raza By- Aqil Raza ~ क्या राजनीति का नाम सत्ता और विपक्ष तक ही सीमीत है, क्या सत्ता में बैठी सरकार की अलोचना महज़ इस बजह से की जाती है जिससे विपक्ष में बैठी पार्टी फिर से सत्ता पर काविज हो सके। क्या सरकार पर सवाल खड़े करने का मकसद समाज में बहतर सुधार करने से प्रेरित होना नहीं चाहिए। यह सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं इसको समझने की ज़रूरत है। देशभर में गौहत्या और मॉवलिंचिग की पिछले बीते सालों से लेकर अब तक कई घटनांए एक के बाद एक हमार सामने आई हैं। जिनमें SC/ST और मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादातर शिकार हुए हैं…

2019 में भाजपा का हारना तय है!

2019 में भाजपा का हारना तय है. जनता भाजपा के फरेब से परिचित हो चुकी है. भाजपा को भी पता है कि लोग अब पहले की तरह बेवकूफ बनने वाले नहीं हैं. इसीलिए वह विकास का मुद्दा छोड़कर अपने मूल हथियार यानी साम्प्रदायिक राजनीति का प्रयोग करने के लिए माहौल बनाने लगी है. इसके लिए लगभग सभी न्यूज चैनल , ट्विटर , व्हाट्सएप और फेसबुक का प्रयोग शुरू हो चुका है. फेक न्यूज और प्लांटेड न्यूज से जनता को साम्प्रदायिक होने के लिए उकसाया जा रहा है. लेकिन इसका भी कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है. प्रो-बीजेपी तमाम न्यूज चैनल्स और शोसल मीडिया ग्रुप्स/पेज…

जातिव्यवस्था पर चोट करने वाले ज्योतिबा फुले जीवनभर ब्राह्मणवाद से लड़ते रहे

ज्योतिबा फुले ने ब्राह्मणवाद को दुतकारते हुए बिना किसी ब्राम्हण-पंडित पुरोहित के विवाह-संस्कार शुरू कराया और बाद में इसे मुंबई हाईकोर्ट से मान्यता भी दिलाई. उनकी पत्नी सावित्री बाई फुले भी एक समाजसेविका थीं. उन्हें भारत की पहली महिला अध्यापिका और नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता कहा जाता है. अपनी पत्नी के साथ मिल कर स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था।