तेलंगाना सरकार डॉ. मनीषा बांगर को इसलिए इश्वरी बाई मेमोरियल अवार्ड से नवाज़ रही है

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प्रतिष्ठित सामाजिक न्याय क्रूसेडर डॉ. मनीषा बांगर के नाम इस साल (2020) का तेलंगाना सरकार और ईश्वरी बाई मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा दिए जाने वाला इश्वरी बाई मेमोरियल अवार्ड घोषीत किया गया है वहीं उत्पीड़ित बहुमत से मुक्ति के लिए डॉ. मनीषा बागर सामाजिक और राजनीतिक अभियान हम सभी के लिए प्रेरणा की गाथा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में, मनीषा बांगर ने हैदराबाद से नागपुर तक की यात्रा की और बीजेपी के जाने माने चेहरे नितिन गडकरी के खिलाफ जमकर चुनाव लड़ा। कौन हैं डॉ। मनीषा बांगर? शायद उसे भारत में किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। आज के राष्ट्रीय जीवन में समाजिक राजनीतिक के क्षेत्र में सक्रीय एक अद्भुत महिला, वह गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और लिवर प्रत्यारोपण हेपेटोलॉजिस्ट है। डॉ. मनीषा बांगर सामाजिक न्याय, विविधता और प्रतिनिधित्व के एजेंडे के लिए प्रतिबद्ध एक लोकप्रिय व्यक्तीमत्व है।

वास्तव में, वह बाबासाहेब अम्बेडकर, फुले, पेरियार और लोहिया की विचारधारा के प्रभावशाली समर्थन के लिए दुनिया भर में एक प्रसिद्ध मानवतावादी हैं, जो समकालीन युग के सामाजिक न्याय के एजेंडे में शामिल हैं। डॉ. मनीषा बागर देश के गांव शहर और विदेश के कई शहरों का लगातार २००५ से दौरा करके प्रदेश और भारत में सामाजिक अन्याय और जाति संप्रदायों पर शक्तिशाली व्याख्यान देती आई है। वे बामसेफ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत थी जब उन्होंने बहुजन समझ को और अल्पसंख्यक संगठीत करने का सराहनीय कार्य किया। डॉ। मनीषा बांगर (एमबीबीएस, एमडी, डीएम) लीवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय ख्याति की हेपेटोलॉजिस्ट हैं। वह दो दशकों में फैले भारतीय बहुजन आंदोलन में सबसे आगे रहने के लिए जानी जाती हैं, जिसका उद्देश्य भारत की 1.3 प्रतिशत जनसंख्या का नब्बे प्रतिशत हिस्सा बनाने वाली भारत की दलित जातियों और सामाजिक वर्गों को सशक्त बनाना और उनका उत्थान करना है।

पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया – डेमोक्रेटिक और नेशनल इंडिया न्यूज़ के संस्थापक सह प्रबंध संपादक, एक प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के उपाध्यक्ष के रूप में, वह यह सुनिश्चित करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है कि लोगों की आवाज़ पक्षपातपूर्ण और पक्षपाती मुख्यधारा मीडिया में सुनाई देती है। उनकी पिछली साख में उनके पद BAMCEF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हैं और यह महिला विंग की अध्यक्ष भी हैं। अपने मेडिकल करियर में, वह कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे SAASL (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ लिवर रोग) और INASL (इंडियन एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ लिवर डिजीज) के बोर्डों में शामिल हैं। यकृत रोग और सस्ती स्वास्थ्य देखभाल पहुंच के नियंत्रण में उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। वह कई पुरस्कारों की प्राप्तकर्ता रही हैं, विशेष रूप से हेपेटाइटिस एलायंस के मित्र और कलिंग पुरस्कार। पिछले एक दशक में डॉ। मनीषा बांगर को नियमित रूप से MIT, कोलंबिया विश्वविद्यालय, यूसी डेविस, ब्रैंडिस यूनिवर्सिटी, यूएसए, कार्लटन यूनिवर्सिटी कनाडा, कराची विश्वविद्यालय पाकिस्तान और भारत के कई विश्वविद्यालयों जैसे शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित केंद्रों में बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है। जैसे, संस्थानों में विविधता, नागरिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, दार्शनिकता को मुक्त करना, सामाजिक असमानताएँ और लैंगिक भेदभाव के मुद्दे। उसने भारत में कई शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में आवाज उठाने, संगठित करने और मदद करने के लिए भारतीय उपमहाद्वीप में पिछले कुछ वर्षों में जातिगत अत्याचारों, पिछड़े वर्गों के संस्थागत उत्पीड़न और अल्पसंख्यकों के हिंसक दमन की संख्या में वृद्धि का जवाब दिया है। अप्रैल 2016 में भारत के स्थायी समान विकास और विकास के रास्ते में बाधाओं को दूर करने के बारे में चर्चा करने के लिए एक संगोष्ठी में उसे संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका में आमंत्रित किया गया था। उनके काम के लिए उन्हें ग्लोबल बहुजन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

डॉ। मनीषा के सामाजिक-राजनीतिक विचारों और कार्यों को फुले अम्बेडकरवादी पेरियारवादी विचारधारा में मजबूती से रखा गया है। यद्यपि वह एक बौद्ध परिवार में पैदा हुई थी, लेकिन समतावादी दर्शन और क्रांतिकारी आंदोलनों के लिए उसकी खोज ने उसे सिख विचार और सिख धर्म का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया, जिस पर उसने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, मध्य पूर्व और यूरोप में कई बौद्धिक रूप से उत्तेजक बातें दी हैं। सिख विचार और मूल्यों के प्रचार-प्रसार के उनके प्रयासों को प्रमुख सिख नेताओं और मंचों से पुरस्कार और सम्मान के रूप में मान्यता मिली। डॉ. मनीषा बागर के अलावा और और इन महिलाओं को सम्मानीत किया जाएगा इनमें प्रबुद्ध लेखिका व तेलुगू अकादमी की पूर्व निदेशक बी. विजया भारती तारगम, मासिक पत्रिका भूमिका की संपादक कोंडाविती सत्यवती, और तेलंगाना बॉडी एंड आर्गन डोनर्स एसोसिएशन से संबद्ध के. भारती शामिल हैं। अब थोड़ा इश्वरी बाई पर प्रकाश डालते है यूनाइटेड आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के प्रख्यात लेखक पी एस सत्यनारायण इश्वरी बाई की जीवनी पर लिखी हुई किताब में इश्वरी बाई को ” Woman of Courage – J. Eashwari Bai ” लिखते है.

इश्वरी बाई का संपूर्ण जीवन सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में बहुजन समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा. उन्होंने डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के साथ दक्षिण भारत में बहुजनों की पृथक राजनीति का आगाज़ किया. यह सब करते हुए उन्हें महाराष्ट्र जैसा प्रगत वातावरण उपलब्ध नहीं मिला फिर भी वो तात्कालिक ब्राह्मणवादी माहोल में निरंतर कार्य करती रही. वह सक्रिय पॉलिटिकल लीडर थी और अपने जीवन में अनेक पॉलिटिकल पोजिशन पर आसीन होते हुए भी बहुजन समाज में सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के कार्य को प्रतिबद्ध तरीके से अंतिम सांस तक करती रही. आज भी सिर्फ तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में ही नहीं तो उत्तरी तमिलनाडु ( मद्रास प्रोविंस) में वह समस्त बहुजन आंदोलन के लोगो के लिए एक प्रेरणादाई शक्सियत और सामाजिक राजनीतिक आइकन के रूप में याद की जाती है. वह जनमानस की नेता है .

मसलन इस पर हमने डॉ. मनीषा बांगर से जानने की कोशिश किया कि इस अवार्ड के आपके लिए क्या मायने है तो उनका साफ तौर कहना है कि तो उन्होंने बताया. कि जो सम्मान मुझे मिला है यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. क्योंकि मैं तेलंगाना में ना पली-बढ़ी हूं ना वहां पर जन्म ली हूं. लेकिन वह मेरा कार्य क्षेत्र रहा है. वहां मेरा सामाजिक और खास तौर पर स्वास्थ सेविक कार्य किया है साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तरी भारत में मेरी पढ़ाई हुई, महाराष्ट्र में मै जन्म ली लेकिन तेलंगाना में पिछले 10-15 साल के रहने के वजह से वहां रहकर कार्य करने के कारण तेलंगाना सरकार ने मुझे सम्मानित किया यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपल्ब्धी है. साथ ही उन्होंने बातचीत के दौरान ये भी कहा कि मेरा शुद्ध-विशुद्ध कार्य देखकर उन्होंने मुझे इस सम्मान के लिए चुना. आगे वो ये भी कहते है जिस तरह मनीषा बांगर इश्वरीबाई और सामाजिक कार्य दोनो से जुड़ी रही आखिरी दम तक इससे बाकी महिलाओं को प्रेरणा मिली. इस लिये मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि मुझे यह सम्मान मिला.

डॉ. मनीषा बागर ये भी कहतीं है कि किसी पुरस्कार की चाहत में मैने यह सब काम कभी नही किया लेकिन पिछले 20 साल से लगातार समाजिक कार्य, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक चेतना बहुजन समाज के लोगों में आगे बढ़ाने के लिए मैनै बहुत प्रयत्न किया और यह मेरे जीवन का एक बहुमूल्य भाग बन चुका है. तो इन सबको देखते हुए तेलंगाना सरकार ने मुझे इस पुरस्कार से सम्मानित किया है. और मेरे लिए ये सौभाग्य की बात है मैं तेलंगाना सरकार का शुक्रगुजार हूं. साथ ही वो फिर आगे कहती है कि अपने जीवन में कोई पिछला रिकॉर्ड ना होने के बावजूद जिस प्रकार इश्वरीबाई ने यह काम किया उसी प्रकार मनीषा बांगर भी यह काम कर रही है. उनके पीछे उनके समर्थन के लिए कोई नही है लेकिन वह यह सबकुछ अपने दम पर कर रही है. आखिर में उन्होंने ये भी कहा कि ऐसी शकसियत की का मेमोरियल अवॉर्ड हमे प्रदान किया जा रहा है ये हमारे लिए खुशी और हमे गौरांवित करने वाली बात है !

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