अर्थव्यवस्था के संकट के लिए डॉ.मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार को गैर जिम्मेदार ठहराया
BY:SONIYA
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा की केंद्र सरकार की आर्थिक सुस्ती और सरकार के उदासीन रवैये की वजह से देखा जाए तो भारतीयों लोगों के भविष्य और आकांक्षाओं पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है. और वही दूसरी तरफ उन्होंन केंद्र सरकार पर लोक नीतियों को अपनाने में विफल रहने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि, ‘निर्मला सीतारमण के बयानों को देखा जाए तो ये पता चलता है कि भाजपा सरकार लोक नीतियों को अपनाने के लिए तैयार नहीं है.और वही उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था की समस्या दूर करने से पहले हमे उस समस्या की पूरी जानकारी होनी जरूरी है.

मनमोहन सिंह का कहना है कि ‘मैंने निर्मला सीतारमण का बयान देखा है और मैं उसपर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. लेकिन सरकार पर विपक्ष के सिर दोष मढ़ने का जुनून सवार है, इसलिए ये उस समस्या का हल नहीं ढूंढ पा रही है, जिससे हमारे अर्थव्यवस्था की हालत सुधर सके.मनमोहन सिंह ने मुद्रास्फीति के मामले में केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुद्रास्फीति को दबाए रखने की सनक के चलते आज किसान परेशान हैं. और सरकार की आयात-निर्यात नीति ऐसी है जिससे समस्याएं उत्पन हो रही हैं.

वहीं मनमोहन सिंह ने देवेंद्र फड़णवीस सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछले पांच साल में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कारखाने बंद हुए हैं. ‘महाराष्ट्र का हर तीसरा युवा बेरोजगार है. मनमोहन सिंह ने कहा कि कांग्रेस को किसी से राष्ट्रभक्ति का प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है.दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि‘कांग्रेस को परिवारभक्ति में ही राष्ट्रभक्ति नजर आती है.’इसी बात का जबाव दिया है मनमोहन सिंह ने कहा कि पार्टी ने अनुच्छेद 370 हटाने के पक्ष में वोट दिया लेकिन जिस तरीके से इसे किया गया उन्होने इसका विरोध किया.उन्होंने दावा किया कि संसद के इतिहास में पहली बार इस तरह का विभाजनकारी विधेयक पेश किया गया।

वही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हालत के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का दौर जिम्मेदार है.समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मुताबिक, कोलम्बिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स में मंगलवार को वित्तमंत्री ने कहा, “मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं है कि राजन जो कुछ भी कहते हैं, वही महसूस करते हैं… और आज, मैं यहां उन्हें पूरा सम्मान देते हुए यह सच्चाई आप सबके सामने रखना चाहती हूं कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की ‘जोड़ी’ को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के ‘सबसे बुरे दौर’ के लिए ज़िम्मेदार है।

वहीं भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अर्थव्यवस्था में इस समय दिख रहे धीमेपन को ‘बेहद चिंताजनक’ करार देते हुए कहा कि सरकार को ऊर्जा एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्रों की समस्याओं को तत्काल सुलझाना चाहिए.राजन ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा, ‘निजी क्षेत्र के विश्लेषकों की ओर से आर्थिक वृद्धि को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं, जिनमें से कई संभवतः सरकार के अनुमान से काफी नीचे है. मेरा मानना है कि आर्थिक सुस्ती निश्चित रूप से बहुत चिंताजनक है.’

वित्त मंत्री निरमला सीतारमण ने नोटबंदी और जीएसटी पर अपने विचार नहीं रखे. आखिर नोटबंदी से क्या हासिल हुआ जीएसटी से क्या हासिल हुआ रघुराम राजन ने नोटबंदी को ही अर्थव्यस्था में आई सुस्ती का कारण बताया था वहीं सरकार को आरोप लगाने की बजाय अर्थव्यवस्था पर छाए संकट का हल निकालना चाहिए।
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