Jhayra पत्र वसीम
जायरा वसीम ने अपने इंस्टाग्राम पर पाँच छह पन्नों की एक चिट्ठी शेयर की है जिसमें उन्होंने बताया है कि वो सिनेमा क्यों छोड़ रही हैं। जायरा ने इस चिट्ठी में बताया है कि उन्होंने सिनेमा इसलिए छोड़ा क्योंकि ये उनके और उनके मज़हब के बीच आ रहा था। सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है। कई मीडिया हाउसेस पर इस बात को लेकर डिबेट चल रही है। कुछ लोग जायरा को ये कह कर सपोर्ट कर रहे हैं कि बॉलीवुड छोड़ना या बॉलीवुड में आना उनका अपना डिसिज़न है। कुछ लोग कह रहे हैं कि ये बहस इसलिए चल रही है कि उनका नाम जायरा वसीम है अगर उनका सरनेम वसीम की जगह जैन होता तो इस बात को कंसीडर भी नहीं किया जाता। कोई कह रहा है कि वो किसी दबाव में ऐसा कर रही हैं वगैरह वगैरह। मैं भी यही मानता हूँ कि बॉलीवुड छोड़ना उनका अपना डिसिजन है ठीक वैसे ही जैसे बॉलीवुड में क़दम रखना उनका अपना डिसिजन था। लेकिन सिर्फ तबतक जब तक वो इस डिसिजन को पर्सनल रखती और छह पन्नों की चिट्ठी शेयर करके ये नहीं कहती की वो मज़हब की वजह से बॉलीवुड छोड़ रही हैं।
ऐसा करके वो उन महिलाओं की हिम्मत तोड़ रही हैं जो मज़हब की बेड़ियाँ तोड़ कर घर से बाहर निकलना चाहती हैं। ऐसा करके वो सपोर्ट कर रही हैं उन पित्तरसत्तात्मक कठमुल्लों को जो मज़हब के नाम पर औरतों के घर से बाहर निकलने पर रोक लगाते हैं, जो मुहम्मद शमी सिर्फ इसलिए ट्रोल करते हैं क्योंकि वो अपनी बीवी के साथ फोटो डाल देता है। जो आमिर खान और उसकी बेटी की फोटो पर विवाद खड़ा कसर देते हैं। जो नुसरत जहाँ को एक हिन्दू से शादी करने पर रंडी जैसी उपाधियों से सम्मानित कर देते हैं। जो औरतों को अपने पाँव की जूती बनाये रखना चाहते हैं। ऐसा करके वो उन महिलाओं की उम्मीदें तोड़ रही हैं जो उनको अपना आइडल मानती हैं और ऐसा करके वो खड़ा कर रही हैं अपने मज़हब को कटघरे में। ऐसा करके वो सवाल खड़े कर रही हैं इस्लाम पर और मौका दे रही हैं तमाम इस्लामोफोबिक्स को कि वो इस्लाम की छवि को और खराब करें।
जायरा एक अच्छी एक्ट्रेस हैं जिन्होंने अपनी एक्टिंग के दम पर नेशनल अवार्ड्स जीते हैं लेकिन उनका ये क़दम ज़रा भी सराहनीय नहीं है। इसके बाद भी मै उम्मीद करता हूँ कि वो फिर से सिनेमा की तरफ लौट कर आएंगी और अपनी एक्टिंग से दुनिया को प्रभावित करेंगी।
आज काश्मीर’ काश्मिरी तोंडी – पीटर फ्रेडरीक सह
काश्मिर हा मुद्दा हा पूर्णपणे राजकीय मुद्दा होता परंतु तो हिंदू माध्यमांच्या मुद्दय़ावरून भारतीय मीडियाने पूर्णपणे व्यापला होता.…






