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Uncategorized - March 17, 2018

BJP राज: 15 हजार रुपये की कमी ने छीन लिया मासूम, सरकार-पुलिस और मीडिया किसी ने नहीं सुना दर्द!

नई दिल्ली। राजस्थान के जयपुर में एक मासूम की 15 हजार रुपये कम होने की वजह से हॉस्पिटल में मौत हो गई। पुलिस सिर्फ जांच की बात कहकर मामले को टालने में लगी है. लेकिन मलाल इस बात का है कि एक मासूम की 15 हजार रुपये की वजह से मौत हो जाती है और हमारे देश की मीडिया के लिए यह कोई खबर ही नहीं लगती। एक बच्चे की मौत होना और सबकी खामोशी यह दो अलग घटनाएं बन जाती हैं। मामला जयपुर के सालासर चाइल्ड हॉस्पिटल का है। जब किसी ने दर्द को महसूस नहीं किया और फरियाद को अनसुना कर दिया तो परिजन ने सोशल मीडिया का सहार लेकर अपना दर्द बयां किया।

पढ़िए किस तरह से मृतक बच्चे के मामा ने अपनी विवशता को लिखा….पढ़कर आंखे नम हो जाएंगी..

मैं आशिष राय, (बच्चे का मामा), 2 साल 4 महीने का मेरा भांजा था 15000 रुपये कम होने की वजह से हम सब से हमेशा के लिये दूर हो गया।

22/02/18 को जब उसे सर्दी बुखार और दस्त हुआ तो हम उसे salasr child hospital (ढ़ेरके बालाजी बस स्टैंड सिकार रोड जयपुर, 302039) लेकर गए, उस दिन दवा दिया पर इससे आराम नही हुआ,

25/02/18 को जब फिर से उल्टी दस्त बुखार शुरु हुआ तो हमलोग उसी हॉस्पिटल मे दोबारा ले गए तो फिर से दवा दिया बोला कि अब ठीक हो जायेगा पर उसके बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ…

जब 26/02/18 शाम 5 बजे ले गए तो हॉस्पिटल वालों ने उसे भर्ती कर लिया और बोला थोड़ी देर मे सही हो जायेगा रात 10 बजे blood लाने को बोला हमने उसका इंतजाम कर दिया उसके बाद जब रात को 12 बजे डॉक्टर से पूछा तो बोला की 10% बचने की उम्मीद हैं हम बोले कि फिर रेफर कर दो तो बोला की 35 हजार ₹ दो तब करेंगे हमने किसी तरह 35 हजार का इंतेजाम कर के लिया…

जब पैसे लेकर गये तो 50000 रुपये मांगने लगा उस वक्त रात का 1:30 बज रहा था इतनी रात को मजदूर आदमी कहां से पैसे का इंतजाम कर पाते फिर रात को वहीं रुकने पर विवश हो गए. सोचा सुबह पैसे का जुगार कर के किसी अच्छे हॉस्पिटल ले जाउँगा, लेकिन सुबह 5:30 बजे मेरे भाँजे ने दम तोड़ दिया. पुलिस को भी शिकायत किया लेकिन वो भी इसे ठंडे बस्ते मे डालने लगा है।

 

इस घटना को 20 दिन हो गए लेकिन पुलिस प्रशासन अस्पताल के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करता नहीं दिखाई दे रहा है। पुलिस हमेशा जांच की बात कहकर परिजनों को टाल देती है. जरा सोचिए एक आम आदमी की जिंदगी कितनी मामूली हो गई है? मामूली सी रकम कम होने पर किसी बच्चे की मार दिया जाता है. और जब वो इंसाफ के लिए पुलिस के पास जाता है तो वो भी उसी समस्या को कोई गंभीर समस्या नहीं समझती।

 

-अनुपम

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